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फिक्सिंग में श्रीसंत सहित सभी 36 आरोपी बरी

दिल्ली की एक अदालत ने 2013 के आइपीएल-6 स्पॉट फिक्सिंग मामले में शनिवार को भारतीय टैस्ट क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य एस श्रीसंत और दो अन्य क्रिकेटरों अजीत चंदीला व अंकित चव्हाण.
Author July 26, 2015 11:32 am
फैसला सुनने के बाद कोर्ट से बाहर आते श्रीसंत (फोटो-पीटीआई)

दिल्ली की एक अदालत ने 2013 के आइपीएल-6 स्पॉट फिक्सिंग मामले में शनिवार को भारतीय टैस्ट क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य एस श्रीसंत और दो अन्य क्रिकेटरों अजीत चंदीला व अंकित चव्हाण को संगठित अपराध सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि पुलिस उनके खिलाफ मामला स्थापित करने में विफल रही है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा ने सभी 36 लोगों को बरी करने वाला फैसला सुनाते हुए कहा, ‘सबको (मामले से) बरी किया जाता है।’ इन लोगों पर धोखाधड़ी, साजिश और कठोर प्रावधानों वाले महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत आरोप लगाए गए थे।

दो साल पहले इस कथित घोटाले में पुलिस कार्रवाई के फौरन बाद भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआइ) ने तीनों खिलाड़ियों पर आजीवन पाबंदी लगा दी थी। उन्हें आरोपियों में भगोड़े डान दाऊद इब्राहीम व छोटा शकील के समकक्ष रखा गया था। इन सभी को दाऊद व शकील के संगठित अपराध के सिंडीकेट में संलिप्तता का आरोपी बनाया गया था।

अदालत को इस बात पर फैसला करना था कि क्या मामले में आरोप तय किए जाएं। अदालत ने कहा कि पुलिस मकोका और भारतीय दंड विधान के तहत ऐसे साक्ष्य नहीं पेश कर सकी जो कानून की नजर में टिक सकें। दाऊद व शकील सहित छह लोगों को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

अदालत का मानना था कि ऐसे सबूत नहीं हैं जिनसे मामले में आरोप तय किए जा सकें। पुलिस ने मामले में विभिन्न आरोपियों के खिलाफ 6000 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया है। उसने बाद में अनुपूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया। आरोपपत्र में कहा गया था कि आरोपियों के खिलाफ भादंसं की विभिन्न धाराओं और मकोका के प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने के लिए समुचित सबूत जुटा लिए गए हैं।

क्रिकेटरों ने फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनका न्यायपालिका पर हमेशा से विश्वास रहा है और उन्होंने खेल में लौटने की प्रतिबद्धता जताई। श्रीसंत ने एक बातचीत में कहा कि आखिरकार उन्हें इंसाफ मिला। ईश्वर ने चाहा तो मैं क्रिकेट में वापसी करूंगा। मुझे कोई शिकायत, कोई मलाल नहीं है। अदालत के आदेश को सुनकर 32 वर्षीय श्रीसंत खुद पर काबू नहीं रख सका और रोने लगा जबकि अन्य खिलाड़ियों ने खुशी से एक दूसरे को गले लगाया।

अदालत ने श्रीसंत व अन्य को मकोका के प्रावधानों के तहत जमानत देने के समय भी कहा था कि उनके खिलाफ मकोका के प्रावधानों के तहत पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उसने क्रिकेटर एस श्रीसंत, अंकित चव्हाण व अन्य के खिलाफ मकोका के कठोर प्रावधान लगाने के लिए दिल्ली पुलिस को आड़े हाथ लिया था।

उस समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनय कुमार खन्ना ने कहा था- इस बात का विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि इस समय आरोपी महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून के तहत दोषी हैं। आरोपियों के खिलाफ पहली नजर में कोई सबूत नहीं है जो संगठित अपराध सिंडीकेट के साथ उनका गठजोड़ स्थापित कर सके।

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