IPL में बगावत? मेगा ऑक्शन के पक्ष में नहीं दो टीमें, BCCI ने यूपीसीए से छीना वोटिंग राइट

आईपीएल 2022 के मेगा ऑक्शन की अभी डेट आई भी नहीं है कि दो बड़ी टीमों के बड़े अधिकारियों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है। साथ ही बीसीसीआई ने 4 दिसंबर को बोर्ड के चुनाव से पहले बड़ा फैसला लेते हुए यूपीसीए से वोटिंग राइट छीन लिया है।

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आईपीएल ट्रॉफी सभी पुरानी 8 टीम के लोगो के साथ (फाइल फोटो, सोर्स- Indian Express)

आईपीएल (Indian Premier League) के 2022 संस्करण के लिए हाल ही में सभी टीमों ने अपने रिटेंशन की लिस्ट सौंप दी है। अब इंतजार है मेगा ऑक्शन का जिसकी तारीखों की अभी घोषणा नहीं की गई है। लेकिन इससे पहले कुछ बगावती सुर सामने आए हैं। दिल्ली कैपिटल्स (DC) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के अधिकारियों ने इस प्रणाली का विरोध किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केकेआर के मुख्य अधिकारी वेंकी मैसूर और दिल्ली कैपिटल्स के पार्थ जिंदल का मानना है कि आईपीएल का मेगा ऑक्शन अब उतना उपयोगी नहीं रहे गया है। उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया अब सभी के लिए एक समान नहीं रहे गई है।

एक क्रिकेट वेबसाइट से बात करते हुए मैसूर ने कहा कि, लीग के लिए अब एक अहम मोड़ आ रहा है, जहां आपको यह सोचना होगा कि क्या मेगा ऑक्शन की जरूरत है। आने वाले नए खिलाड़ियों के लिए ड्राफ्ट तय किए जा सकते हैं या फिर आप आपसी सहमति से ही उन्हें ले सकते हैं। खिलाड़ियों को लोन पर लिया जा सकता है और हमें लंबे समय के लिए टीम बनाने की अनुमति दी जा सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि, ‘सभी आईपीएल टीमों के पास अपनी-अपनी एकेडमी है और स्काउटिंग प्रणाली है, जो युवा और अनकैप्ड खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ती है। उन्हें भविष्य के लिए तैयार भी किया जाता है। ये सब करने के बाद खिलाड़ियों को नीलामी में भेजने के बजाय आप उनको रिटेन करवाकर फ्रेंचाइजियों को निवेश का लाभ दे सकते हैं।’

केकेआर के अधिकारी ने ये भी कहा कि, ‘एक समय था, जब बड़ी नीलामी सभी टीमों को एक समान स्तर पर लाने का काम करती थी। हालांकि तब भी हमें ऐसा लगता था कि अगर आप टीमों को कुछ खिलाड़ियों को वापस चुनने का अधिकार दे रहे हैं तो वह रिटेंशन द्वारा नहीं बल्कि राइट-टू-मैच (आरटीएम) कार्ड के जरिए होना चाहिए।

दिल्ली कैपिटल्स के सह-मालिक हुए निराश

वहीं स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए दिल्ली के सह-मालिक पार्थ जिंदल ने भी मेगा ऑक्शन के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि,’हमनें पंत, अक्षर, शॉ और नॉर्किया को रिटेन किया। लेकिन दुर्भाग्यवश हम श्रेयस अय्यर, शिखर धवन, अश्विन और कगिसो रबाडा जैसे खिलाड़ियों को नहीं ले पाए। ये काफी दुखद रहा।’

उन्होंने कहा कि, ‘IPL की रिटेंशन पॉलिसी इस तरह है कि हम इन खिलाड़ियों को रिटेन नहीं कर सके। मुझे लगता है कि आने वाले समय में इस पर गौर करने की जरूरत है। आप टीम बनाने हैं युवाओं को अवसर मिलते हैं, वे आपकी फ्रेंचाइज़ी के लिए खेलते हैं, फिर वे जाकर काउंटी या अपने-अपने देशों के लिए खेलते हैं और फिर तीन साल बाद आप उन्हें खो देते हैं।’

गौरतलब है कि इस साल आईपीएल में दो नई टीमें लखनऊ और अहमदाबाद की जुड़ी हैं। ऐसे में दोनों टीमों को अपनी टीम बनाने के समान अधिकार देने के लिए आईपीएल मैनेजमेंट द्वारा रिटेंशन पॉलिसी को चेंज किया गया। हर टीम सिर्फ अधिकतम चार खिलाड़ी रिटेन कर सकती थी जिसकी अंतिम तिथि थी 30 नवंबर। सभी टीमों ने अपने रिटेन किए गए खिलाड़ियों की सूची बोर्ड को सौंप दी है।

यूपीसीए से BCCI ने छीना वोटिंग का अधिकार

साथ ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा आज एक बड़ा फैसला करते हुए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) से वोटिंग राइट भी छीन लिया गया है। परिणामस्वरूप 4 दिसंबर को होने वाले बीसीसीआई के चुनाव में यूपीसीए भाग नहीं ले पाएगा। यह पहला मौका होगा जब उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व नहीं होगा।

आपको बता दें कि दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक यूपीसीए में नियमानुसार वार्षिक आम सभा (एजीएम) नहीं होने और आर्थिक गड़बड़ियों की शिकायत पर यह अधिकार छीना गया है। बीसीसीआई की 22 नवंबर की जारी लिस्ट में देश के 31 क्रिकेट क्लब शामिल किए गए लेकिन यूपीसीए का नाम नहीं जोड़ा गया है।

वहीं यूपीसीए के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता की तरफ से किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया गया। जानकारों का ये भी कहना है कि यूपीसीए में सचिव (फहीम) और अध्यक्ष कार्यकारी हैं, इसलिए भी उनको बीसीसीआई की वोटिंग में भाग लेने का अधिकार नहीं है।

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