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VIVO ने किया IPL 2020 की टाइटल स्पॉन्सरशिप छोड़ने का फैसला, रिप्लेसमेंट को लेकर BCCI का बढ़ा सिरदर्द

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 2 अगस्त को हुई आईपीएल गर्वनिंग काउंसिल की बैठक में ही स्पष्ट कर दिया था कि वह वीवो से करार नहीं तोड़ेगा।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: August 4, 2020 5:53 PM

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की एक प्रमुख फ्रैंचाइजी ने सोमवार शाम को अन्य सातों फ्रैंचाइजीस को फोन करके सूचित किया कि वीवो इंडिया ने कम से कम इस साल के लिए टूर्नामेंट के टाइटल स्पॉन्सरशिप से पीछे हटने का फैसला किया है। बीसीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल को चीनी कंपनी के साथ करार नहीं तोड़ने का फैसला लेने के लिए देश भर में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।

चीनी कंपनी वीवो दुनिया की इस सबसे महंगी घरेलू क्रिकेट लीग की टाइटल स्पॉन्सर है। हालांकि, गालवान घाटी में भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पर वीवो से करार तोड़ने का दबाव पड़ रहा था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद वीवो को आईपीएल का टाइटल स्पॉन्सर बनाए रखने के बीसीसीआई के फैसले का विरोध शुरू हो गया था।

कैट ने भी लिखा है अमित शाह पत्र: कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भी इसका विरोध किया। उसने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र भेजकर बीसीसीआई को इस आयोजन के लिए मंजूरी नहीं देने की मांग की है। बता दें कि कैट 10 जून के बाद से ही देश में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर अभियान चला रहा है। उसके इस अभियान को देश भर में काफी समर्थन भी मिल रहा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वीवो (VIVO) इस साल आईपीएल (IPL) के टाइटल स्पॉन्सरशिप से पीछे हट रहा है। अगर ऐसा होता है तो बीसीसीआई के लिए सही रिप्लेसमेंट (उपयुक्त प्रतिस्थापन) ढूंढना बड़ा सिरदर्द होगा। वह भी ऐसे समय जब कोविड-19 के कारण बाजार में पहले से ही मंदी छाई है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि वीवो बीसीसीआई के साथ अपना करार तोड़ रहा है।

खबर के मुताबिक, वीवो इंडिया 2021 में वापसी करेगी और 2023 तक आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सर रहकर अपना कॉन्ट्रैक्ट पूरा करेगी। वीवो इंडिया ने 2017 में आईपीएल के प्रायोजन अधिकार 2199 करोड़ रुपये में हासिल किए थे। इसके मुताबिक, वह हर सीजन में आईपीएल को करीब 440 करोड़ का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह करार पांच साल के लिए हुआ था।

बता दें कि बीसीसीआई ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 2 अगस्त को हुई आईपीएल गर्वनिंग काउंसिल की बैठक में ही स्पष्ट कर दिया था कि वह वीवो से करार नहीं तोड़ेगा। उसकी दलील थी कि मौजूदा वित्तीय कठिन परिस्थितियों को देखते हुए इतने कम समय में बोर्ड के लिए नया प्रायोजक ढूंढ़ना मुश्किल होगा। इस कारण सभी प्रायोजकों को बरकरार रखा गया है।

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