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IPL में VIVO की जगह लेना चाहती है रामदेव की पतंजलि, ऐमजॉन, टाटा, RIL भी बनना चाहती हैं स्पॉन्सर

रामदेव की कंपनी पतंजलि, टाटा और एमेजॉन के अलावा ड्रीम11, अडानी ग्रुप, और एजुकेशन स्टॉर्ट-अप बायजुस जैसे कई नाम भी आईपीएल 2020 की टॉइटल स्पॉन्सरशिप हासिल करने के संभावित उम्मीदवारों के तौर पर सामने आ रहे हैं।

ramdev bcci vivo ipl2020 bidयोगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पंतजलि भी आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप की दौड़ में शामिल है।

योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि (Patanjali) इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2020 में चीनी कंपनी VIVO की जगह लेना चाहती है। मतलब आईपीएल 2020 के टाइटल स्पॉन्सर की दौड़ में वह भी शामिल हो गई है। कंपनी ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। वहीं, एमेजॉन, टाटा और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) भी IPl 2020 का टाइटल स्पॉन्सर बनना चाहती हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल 2020 के टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स के लिए 10 अगस्त से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) मांगे हैं। इच्छुक पार्टियां 14 अगस्त तक अपने आवेदन भेज सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंतजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने कहा है, हम इस साल आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप हासिल करने के बारे में सोच रहे हैं। हम पतंजलि ब्रांड को एक वैश्विक मंच पर ले जाना चाहते हैं। इस संबंध में हम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को एक प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

दरअसल, चीनी मोबाइल फोन निर्माता कंपनी वीवो ने आईपीएल 2020 के लिए उसकी टाइटल स्पॉन्सरशिप छोड़ दी है। बीसीसीआई ने भी शनिवार यानी 8 अगस्त 2020 को इस पर मुहर लगा दी। ऐसे में बीसीसीआई को आईपीएल 2020 के टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए नए प्रायोजक की तलाश है। वहीं जियो (Jio), एमेजॉन (Amazon), टाटा ग्रुप (Tata Group), ड्रीम11 (Dream11), अडानी ग्रुप (Adani Group) और एजुकेशन स्टॉर्ट-अप बायजुस (Education Start-Up Byjus) समेत कई नाम आईपीएल प्रायोजन राइट्स हासिल करने के संभावित उम्मीदवारों के तौर पर सामने आ रहे हैं।

बता दें कि वीवो (VIVO) टाइटल स्पॉन्सशिप के लिए हर साल बीसीसीआई को 440 करोड़ रुपये का भुगतान करता है। कोरोनावायरस के चलते इस समय बाजार की हालत बहुत अच्छी नहीं है इसलिए बोर्ड भी समझता है कि एक साल के लिए कोई नई कंपनी शायद ही वीवो जितना ही भुगतान करे। सूत्रों की मानें तो बोर्ड को 180-200 करोड़ रुपए के बीच डील फाइनल होने की उम्मीद है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि चीनी कंपनी के विकल्प के दौर पर एक राष्ट्रीय ब्रांड के तौर पर पतंजलि का दावा बहुत मजबूत है। वहीं, उनका यह भी कहना है कि उसमें (पतंजलि) एक मल्टीनेशनल ब्रांड के तौर पर स्टार पावर की कमी है।

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