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IPL 2018: पुजारी तय करते हैं होटल से कब निकलेंगे खिलाड़ी, जानिए कैसे-कैसे टोटके करते हैं टीमों के मालिक

क्रिकेट इतिहासकार बोरिया मजूमदार ने अपनी पुस्तक 'इलेवन गॉड्स एंड ए बिलियन इंडियन्स' में बहुत से ऐसे टोटोकों के बारे में लिखा है, जिन्हें आईपीएल टीम के मालिकों द्वारा फॉलो किया जाता है।

राज कुंद्रा, शाहरुख खान और प्रीति जिंटा (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2018 की शुरुआत 7 अप्रैल से होने जा रही है। आईपीएल सीजन 11 में आठ टीमें खेल रही हैं, पहला मुकाबला चेन्नई सुपरकिंग्स और मुंबई इंडियन्स के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होगा। आईपीएल के इस सीजन के लिए जनवरी में खिलाड़ियों की नीलामी हुई थी। इस नीलामी में आठ टीमों के मालिकों ने अपनी पसंद के खिलाड़ियों को चुना और इन पर करोड़ों रुपयों का दाव लगाया। हर बार टीम के मालिक अपने खिलाड़ियों पर करोड़ों रुपए का दाव लगाते हैं और टीम की जीत के लिए हर संभव कोशिश करते हैं।

मालिकों द्वारा टीम की जीत के लिए कई बारे ऐसे काम किए जाते हैं, जिनके बारे में जानकर आपको काफी आश्चर्य होगा। टीम के मालिकों द्वारा बहुत से टोटके अपनाए जाते हैं और खिलाड़ियों के ऊपर भी इन टोटोकों को अपनाने का दबाव बनाया जाता है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक क्रिकेट इतिहासकार बोरिया मजूमदार ने अपनी पुस्तक ‘इलेवन गॉड्स एंड ए बिलियन इंडियन्स’ में बहुत से ऐसे टोटोकों के बारे में लिखा है, जिन्हें आईपीएल टीम के मालिकों द्वारा फॉलो किया जाता है।

किसी टीम का मालिक मैच के वक्त पूरे समय अपने पास देवी-देवता की तस्वीर रखता है। खेल के दौरान पूरे तीन घंटों में टीम का कोई खिलाड़ी जब भी चौका या छक्का जड़ता है तो मालिक देवी की तस्वीर को प्रणाम करता है। इसके अलावा जब विरोधी टीम का कोई विकेट गिरता है तब भी मालिक देवी की मूर्ति के आगे नतमस्तक होता है। वहीं किसी टीम के लिए पुजारी यह तय करते हैं कि खिलाड़ी मैच के दिन किस वक्त अपने होटल के कमरों से निकलेंगे। मजूमदार ने अपनी किताब में लिखा, ‘वह समय दिन के दौरान किसी भी समय हो सकता है। इस मामले में कोई भी तर्क नहीं कर सकता। खिलाड़ी जिस भी स्थिति में हों, उन्हें उस निश्चित समय पर अपने कमरों से निकलना पड़ता है, क्योंकि पुजारी ने उन्हें आदेश दिया है।’

मजूमदार ने इस वाक्ये से संबंधित मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का एक बयान भी अपनी किताब में लिखा, जिसमें तेंदुलकर कह रहे हैं, ‘मैंने बहुत से खिलाड़ियों को तौलिया लपेटकर होटल के कॉरिडोर में घूमते हुए देखा है। उन पर कमरे से बाहर निकलने का और नीचे जाकर ब्रंच करने का दबाव बनाया जाता है, भले ही उन्हें भूख नहीं लगी हो, लेकिन उन्हें जाना पड़ता है, क्योंकि उन्हें कमरा खाली करना होता है।’ मैच के दिनों में टीम के सीनियर मैनेजमेंट के लोग एक ही समय पर करीब दो बजे एक साथ होटल के कमरों से निकल जाते थे। मजूमदार ने किताब में लिखा, ‘इस नियम का पालन करने के लिए दिखाया गया अनुशासन अविश्वसनीय था। इतना सब करने के बाद भी अगर टीम मैच नहीं जीतती थी तो वह अलग विषय हो जाता था।’

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