भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शुक्रवार (8 मई) को कर्नल अशोक यादव (सेवानिवृत्त) को भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) का कामकाज संभालने वाली तदर्थ समिति से हटा दिया है। इस कदम की वजह समिति के अंदर चल रही आपसी कलह और मतभेद बताए जा रहे हैं। तदर्थ समिति का गठन 27 मार्च को आईओए ने किया था।
यह कदम दिल्ली उच्च न्यायालय के 18 फरवरी के उस आदेश के बाद उठाया गया था, जिसमें ईएफआई में नए चुनाव कराने और महासंघ के कामकाज की देखरेख के लिए ओलंपिक संघ को एक अंतरिम संस्था नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। इस समिति की अध्यक्षता यशोधरा राजे सिंधिया कर रही थीं और इसमें फ्रांसिस्को लीमा, वकील विदुष्पत सिंघानिया और कर्नल अशोक यादव शामिल थे।
कामकाज के संबंध में शिकायत
आईओए की अध्यक्ष पीटी उषा द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश में शीर्ष खेल संस्था ने कहा कि उसे यादव के आचरण और कामकाज के संबंध में ‘कई शिकायतें’ मिली थीं। यादव इस समिति में सदस्य (प्रशासन) के तौर पर काम कर रहे थे। आदेश में कहा गया, ‘खिलाड़ियों और अधिकारियों सहित विभिन्न वर्गों के हितधारकों से मिली ये शिकायतें लगातार ऐसे मामलों की ओर इशारा करती हैं जिनमें आपसी सहयोग की कमी थी और उनका आचरण संस्थागत मर्यादा के उन मानकों के अनुरूप नहीं था जिनकी अपेक्षा इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपे गए किसी सदस्य से की जाती है।’
अशोक यादव क्या बोले
आईओए ने कहा, ‘उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए और तदर्थ समिति के सुचारू, निष्पक्ष और प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने के हित में यह आदेश दिया जाता है कि कर्नल अशोक यादव (सेवानिवृत्त) को तदर्थ समिति के सदस्य (प्रशासन) के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाता है।’ हालांकि, यादव ने आरोप लगाया कि उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने कुछ खास घुड़सवारों का पक्ष लेने के साथ तय नियमों को दरकिनार करने की कोशिशों का विरोध किया था।
एक राइडर को दूसरों के मुकाबले तरजीह क्यों दें?
यादव ने पीटीआई को बताया, ‘मध्य प्रदेश घुड़सवारी अकादमी के एक घुड़सवार राजू सिंह ने 23-25 अप्रैल के दौरान ब्रिटेन में एक एफईआई इवेंटिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। नियमों के अनुसार घुड़सवारों को ईएफआई को सूचित करना होता है कि वे किस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं और उस टूर्नामेंट को उनके ट्रायल के तौर पर माना जाना चाहिए। उन्होंने ऐसा नहीं किया। मुख्य तकनीकी सलाहकार अधिराज सिंह को बिना किसी सलाह-मश्विरे के नियुक्त किया गया था। बाद में कहा गया कि हम उनके मामले पर विचार करें लेकिन हमने मना कर दिया। हम एक राइडर को दूसरों के मुकाबले तरजीह क्यों दें? नियम सबके लिए एक जैसे होते हैं।’
पैनल के भीतर मतभेद
यादव ने यह भी दावा किया कि पैनल के भीतर मतभेद तब और बढ़ गए जब अधिराज सिंह ने कथित तौर पर चयन नियमों में बदलाव कर दिया। उन्होंने कहा, ‘अधिराज सिंह ने नियमों में बदलाव करके तीन के बजाय चार ट्रायल प्रतियोगिता की अनुमति दे दी। उसी दिन से उन्होंने मुझे नापसंद करना शुरू कर दिया। असल में वे आशीष मलिक को निशाना बनाना चाहते हैं जो एक बहुत ही प्रतिभाशाली ‘इवेंटिंग राइडर’ हैं।’
यशोधरा राजे सिंधिया ने इस्तीफा देने की थी धमकी
उन्होंने आगे दावा किया कि यशोधरा राजे सिंधिया ने एक समय समिति के वाट्सएप ग्रुप से हटते हुए इस्तीफा देने की धमकी भी दी थी। यादव ने आरोप लगाया, ‘एशियाई खेलों के लिए चयन के मापदंड हर हफ्ते बदले जा रहे हैं। अक्टूबर 2025 में बनाए गए चयन के मापदंड सभी को पसंद आए थे, लेकिन वे कुछ राइडर्स को निशाना बनाना चाहते हैं। यादव ने कहा कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चयन नीति में किसी भी बदलाव को पहले अध्यक्ष से मंजूरी मिलनी चाहिए।
आईओए की छवि खराब होगी
उन्होंने कहा, ‘मैंने चयन समिति से कहा कि उन्हें इसे अध्यक्ष से मंजूर करवाना होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आईओए का कहना है कि उसे अपनी साख बचानी है और अगर यशोधरा राजे सिंधिया इस्तीफा दे देती हैं तो इससे आईओए की छवि खराब होगी। चूंकि मैं उनसे नियमों का पालन करने के लिए कह रहा हूं इसलिए उन्होंने मुझे हटा दिया है।’
हितों का टकराव
सेवानिवृत्त अधिकारी ने दिल्ली घुड़सवारी और पोलो संघ से जुड़े ‘हितों के टकराव’ का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, ‘असल में यहां हितों का टकराव है। यशोदरा राजे सिंधिया दिल्ली संघ की संस्थापक हैं और अधिराज इसके अध्यक्ष हैं। और अगर आप दिल्ली संघ का रजिस्टर्ड पता देखें तो वह असल में यशोदरा राजे सिंधिया का ही घर है। मैंने यशोदरा राजे सिंधिया से यह भी पूछा कि दिल्ली संघ ने पिछले 29 साल में अपने चुनाव नहीं करवाए हैं और अब समय आ गया है कि ये चुनाव करवाए जाएं।’
‘उपयुक्त विकल्प’ की घोषणा जल्द
अधिराज सिंह और यशोदरा राजे सिंधिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी टिप्पणी नहीं मिल पाई। कर्नल यादव ने कहा कि आईओए को उनके खिलाफ मिली शिकायतों को दिखाना चाहिए लेकिन ‘वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि ऐसी कोई शिकायत है ही नहीं।’ आईओए ने यह भी कहा कि तदर्थ समिति अध्यक्ष से सलाह-मश्विरा करके इस पद के लिए एक ‘उपयुक्त विकल्प’ की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
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आईटीए वह संस्था है जो ओलंपिक और दुनिया की दूसरी बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में डोपिंग रोधी कार्यक्रमों का संचालन करती है। लुसाने में स्थित आईटीए लगभग 50 अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के डोपिंग रोधी कार्यक्रमों का भी संचालन करती है। पूरी खबर पढ़ें।
