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टी20 लीग के भंवर में फंसता अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट

टी20 लीग खिलाड़ियों की बची-खुची चिंता भी खत्म कर रही हैं।

टी20 लीग के भंवर में फंसता अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट
स्टीव स्मिथ।

चरनपाल सिंह सोबती

आइपीएल के बढ़ते वैश्विक दायरे में क्रिकेट की दुनिया की परेशानी की चर्चा अभी चल ही रही थी कि टी20 लीग के कार्यक्रम का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर हावी होने का नया मुद्दा सामने आ गया। अब तो इस पर आधिकारिक मोहर लगाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। राष्ट्रमंडल खेल के दौरान, आइसीसी की बर्मिंघम में बैठक में, जिस मुद्दे पर सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधियों ने सबसे ज्यादा चर्चा की, वह था- घरेलू टी20 लीग के विकास के दौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कैसे समायोजित करें?

जो नजारा है, उसमें तय है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए छोटी अवधि की क्रिकेट के बीच जगह ढूंढनी होगी। बदलाव का पहला जोरदार सबूत तब मिला जब दक्षिण अफ्रीका ने आस्ट्रेलिया में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज रद्द कर दी (अपने विश्व कप में खेलने को खतरे में डाल कर) ताकि उसके खिलाड़ी, जनवरी में उसके नए टी20 टूर्नामेंट के लिए उपलब्ध हों। उसी महीने में एक और टी 20 लीग यूएई में है जो और बड़ा झटका है- हर टीम में 9 विदेशी खिलाड़ी होंगे और इनमें से मैच खेलेंगे 4 नहीं, 5 खिलाड़ी। उन्हीं दिनों में आस्ट्रेलिया की बिग बैश और बांग्लादेश प्रीमियर लीग भी हैं। इन चार बड़ी टी20 लीग के बीच खिलाड़ी बंट रहे हैं- जो जितना ज्यादा पैसा या अच्छी संविदा देगा- खिलाड़ी उसी के साथ हो लेंगे। तो ऐसे में अपने देश के लिए खेलना वरीयता में कहां रहा?

वेस्ट इंडीज के आंद्रे रसेल टी 20 लीग खेल रहे हैं। ट्रेंट बोल्ट ने न्यूजीलैंड क्रिकेट का केंद्रीय अनुबंध छोड़ दिया ये कह कर कि परिवार के साथ और समय बिताना चाहते हैं पर कुछ ही घंटे बाद यूएई में खेलने का अनुबंध कर लिया। खिलाड़ी अब अपने देश के एनओसी मांगने के पचड़े से भी बच रहे हैं। डेविड वार्नर और क्रिस लिन भी यही करना चाहते हैं पर वे क्रिकेट आस्ट्रेलिया से बंधे हैं। वे अपने देश की बिग बैग लीग में नहीं, यूएई में खेलना चाहते हैं। आज हालत यह है कि डेविड वार्नर, स्टीव स्मिथ, पैट कमिंस या मिशेल स्टार्क जैसे शीर्ष टैस्ट खिलाड़ियों में से किसी का भी बीबीएल टीम के साथ अनुबंध नहीं है।

टी20 लीग खिलाड़ियों की बची-खुची चिंता भी खत्म कर रही हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स ने इसके लिए नए प्रयोग की शुरुआत की- वे खिलाड़ियों को एक लीग में खेलने का नहीं, साल के पूरे 12 महीने का अनुबंध देना चाहते हैं ताकि वे खिलाड़ी, उनकी चार अलग-अलग लीग में टीम के लिए उपलब्ध रहें। ट्रेंट बोल्ट, रसेल या क्रिस लिन ऐसा कर सकते हैं तो बाकी खिलाड़ी क्यों नहीं? इसका मतलब है खिलाड़ी के लिए क्लब और देश के बीच का रिश्ता फुटबाल जैसा हो जाएगा- बड़ी कमाई अपने क्लबों से। सिर्फ पैसा खेल रहा है। टी20 फ्रेंचाइज सर्किट का दौर देखिए।

आइपीएल विंडो ढाई/तीन महीने की यानी कि हर साल अप्रैल, मई और जून के शुरू के दिनों में कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं। साल का एक चौथाई हिस्सा तो आइपीएल के नाम हो गया। ऐसी ही विंडो आस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग और इंग्लैंड के द हंड्रेड टूर्नामेंट के लिए मंजूर हो गर्इं। असर- अगले साल इंग्लैंड में एशेज, जुलाई तक खत्म हो जाएगी। जनवरी से फरवरी : आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका और यूएई में लीग मार्च के आखिर से जून में आइपीएल जुलाई या अगस्त में हंड्रेड, कैरेबियन प्रीमियर लीग और मेजर लीग (अगले साल अमेरिका में शुरू)। कई बड़ी लीग जैसे पीएसएल तो चर्चा में ही नहीं आ पा रही। आइपीएल टीम मालिकों ने दक्षिण अफ्रीका की सभी 6 टी20 फ्रेंचाइजी खरीद ली हैं- दुनिया भर से 29 से ज्यादा कारपोरेट के मुकाबले में। क्रिकेट की दुनिया इस लीग को मिनी-आइपीएल का नाम दे रही है और वे गलत नहीं हैं।

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