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बातचीत-सरकार को गोल्फ को बढ़ावा देना चाहिए: वाणी कपूर

पेश है वाणी कपूर से बातचीत के कुछ अंश

Author November 2, 2017 2:47 AM
वाणी कपूर – भारतीय महिला गोल्फ प्लेयर

संदीप भूषण
अकसर सुनने में आता है कि गोल्फ उच्च वर्ग का खेल है। यह काफी हद तक सही भी है। जहां क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस के किट बाजार में पांच हजार से मिलते हैं, वहीं एक गोल्फ स्टिक की कीमत ही हजारों में होती हैं। फिर यह खेल भारत जैसे मध्यम वर्गीय देश में कैसे पल-बढ़ रहा है ? साथ ही करिअर के तौर पर अपनाने की चाह लिए गरीब परिवार का बच्चा कैसे इस खेल को अपना सकता है? ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब लिए जनसत्ता ने गोल्फ तेजी से उभरती भारतीय गोल्फर वाणी कपूर से। पेश है वाणी कपूर से बातचीत के कुछ अंश-


सवाल : टेनिस, बैडमिंटन और क्रिकेट के जमाने में गोल्फ में आना और करिअर के तौर पर चुनना कितना चुनौतीपूर्ण रहा ?

’मैं किसी बड़े गोल्फ घराने से ताल्लुक नहीं रखती इसलिए इस खेल में जमना मेरे लिए काफी मुश्किल भरा रहा। पिताजी गोल्फ खेलते थे। वे मुझे डीएलएफ गोल्फ क्लब जब पहली बार लेकर गए तो मैं नौ साल की थी। वक्त बीतने के साथ यह मेरे लिए खेल से ज्यादा जीवन का हिस्सा बन गया। 2012 में मैंने पेशेवर गोल्फ की शुरुआत की। पहले देश में टूर्नामेंट और फिर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलना और पहचान बनाना कठिन काम था। हालांकि मेरे कोच की मेहनत ने रंग दिखाना शुरू किया। लिहाजा 2012 में ही हीरो महिला गोल्फ टूर में मैंने दूसरा स्थान पाया। 2009 और 2011 में मैं भारतीय महिला गैरपेशेवर गोल्फरों में पहले स्थान पर थी। साल 2014, 2015, 2016 में लगातार मैं हीरो आॅडर आॅफ मेरिट में पहले स्थान पर रही।

सवाल :किसी भी महंगे खेल में अभ्यास और साजो सामान के लिए पैसे की जरूरत होती है। इसके इंतजाम के लिए प्रायोजक तलाशना भी बड़ी चुनौती है। क्या आपको भी शुरुआत में ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा?
’शुरुआत में तो हर किसी को प्रायोजक मिलना मुश्किल होता है। गोल्फ जैसे खेल में तो हर हाल में आपको किसी न किसी की मदद की जरूरत होती है। यहां किसी टूर पर जाना हो या किट का इंतजाम करना, इनमें इतने पैसे खर्च होते हैं कि खुद वहन करना मुश्किल है। किसी भी खेल में सबसे पहले आपको खुद को साबित करना होता है। यूरोपियन टूर या अन्य देशों में जाकर खेलने में मवाना शुगर ने मेरी काफी मदद की है। वह हर मौके पर मेरे साथ खड़ी होती है।

सवाल :भारत में गोल्फ को गरीब खिलाड़ियों तक पहुंचाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
’सबसे पहले तो किसी भी खेल की बुनियादी जरूरत उसके लिए मैदान होता है। भारत में गोल्फ कोर्स की काफी कमी है।। यहां जो कोर्स हैं भी उनमें प्रवेश के लिए आपको भारी भरकम फीस देनी होती है। मेरे मुताबिक सरकार को फुटबॉल के मैदान और अन्य खेलों की व्यवस्था की तरह गोल्फ कोर्स बनवाने चाहिए। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत काम किया जा सकता है। साथ ही खिलाड़ियों को किट मुहैया कराए जाने चाहिए।

सवाल :गोल्फ के लिए भी क्रिकेट, फुटबॉल और बैडमिंटन की तरह लीग का आयोजन करना चाहिए? इसके क्या लाभ हो सकते हैं?
’निजी लीग का सबसे बड़ा फायदा तो यह होगा कि खिलाड़ियों को आसानी से प्रायोजक मिल जाएंगे। आप देख सकते हैं कि किसी भी खेल में जबसे लीग का आयोजन होने लगा है, नए खिलाड़ी उभरकर आ रहे हैं। गोल्फ के लिए भी यही बात लागू होती है। जब लीग होने लगेंगी तो कई भारतीय गोल्फर जो पैसे के अभाव में विदेशी टूर पर नहीं जा सकते, उन्हें विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलेगा।

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