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एशियाई खेल 2014: योगेश्वर दत्त ने 28 साल बाद कुश्ती में दिलाया सोना

इंचियोन। लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने रविवार को यहां 17वें एशियाई खेलों में भारत का कुश्ती में स्वर्ण पदक का 28 साल का इंतजार खत्म किया, लेकिन सत्यव्रत कादियान और बबीता कुमारी कांस्य पदक के मुकाबले में हार गईं। योगेश्वर ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल के फाइनल में ताजिकिस्तान के जालिमखान यूसुपोव […]

Author September 29, 2014 10:38 AM

इंचियोन। लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने रविवार को यहां 17वें एशियाई खेलों में भारत का कुश्ती में स्वर्ण पदक का 28 साल का इंतजार खत्म किया, लेकिन सत्यव्रत कादियान और बबीता कुमारी कांस्य पदक के मुकाबले में हार गईं।

योगेश्वर ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल के फाइनल में ताजिकिस्तान के जालिमखान यूसुपोव को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का एशियाई खेलों में सोल 1986 में करतार सिंह की खिताबी जीत के बाद पहला स्वर्ण पदक है। योगेश्वर ने दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 2006 के अपने प्रदर्शन में सुधार करके भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ाई। उन्होंने दोहा एशियाई खेल 2006 में कांस्य पदक जीता था। यह भारतीय पहलवान सेमीफाइनल में एक समय पीछे चल रहा था लेकिन उन्होंने आखिरी क्षणों में वापसी करके फाइनल में जगह बनाई और फिर स्वर्ण पदक जीतने में किसी तरह की कोताही नहीं बरती। उन्हें हालांकि फाइनल में यूसुपोव की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। उन्होंने कई अवसरों पर अपने प्रतिद्वंद्वी को चित करने की कोशिश की लेकिन इसमें वह नाकाम रहे। उन्होंने पहला पीरियड समाप्त होने पर एक अंक हासिल किया। दूसरे पीरियड में उन्होंने दो और अंक हासिल करके 3-0 से जीत दर्ज की।

इससे पहले योगेश्वर ने क्वार्टर फाइनल में उत्तर कोरिया के जिनयोक कांग को 3-1 से हराया। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला चीन के ईरलैंबबीक केताई से था। चीनी पहलवान मुकाबले में अधिकतर समय बढ़त पर रहा लेकिन आखिरी क्षणों में भारतीय ने पासा पलट दिया। योगेश्वर तब 7-9 से पीछे चल रहा था जब उन्होंने अंतिम क्षणों में अपने प्रतिद्वंद्वी को चित किया और मुकाबला जीत लिया।

इस बीच सत्यव्रत पुरुषों के 97 किग्रा फ्रीस्टाइल के कांस्य पदक के मुकाबले कजाखस्तान के मामेद इब्राजिमोव से आसानी से 0-3 से हार गए। वह क्वार्टर फाइनल में किर्गीस्तान के मागोमेद मुसीव से अंकों के आधार पर 1-3 से हार गए थे लेकिन उनके इस प्रतिद्वंद्वी के फाइनल में पहुंचने के कारण उन्हें रेपाशेज में उतरने का मौका मिला। रेपाशेज में उन्होंने पाकिस्तान के बिलाल हुसैन अवान को तकनीकी तौर पर बेहतर होने के कारण 12-0 से हराकर कांस्य पदक के मुकाबले में प्रवेश किया।

महिलाओं के 55 किग्रा फ्रीस्टाइल में बबीता कांस्य पदक के मुकाबले में हार गई। उन्होंने सेमीफाइनल तक की दौड़ में पहले दौर में कंबोडिया की सीरे माओ डोर्न को चित किया और फिर क्वार्टर फाइनल में आयरम अबदिलदिना को अंकों के आधार पर 3-1 से हराया। लेकिन सेमीफाइनल में उनका सामना 15 बार की विश्व चैंपियन और तीन बार की ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता जापानी पहलवान साओरी योशिदा से था जिन्होंने उम्मीद के मुताबित आसानी से यह मुकाबला जीता। बबीता ने हालांकि अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया लेकिन योशिदा यह मुकाबला 14-4 से जीतने में सफल रही।
कांस्य पदक के मुकाबले में भी बबीता कुछ खास नहीं कर पाई और चीन की झियुचुन झोंग से 1-3 से हार गई। भारत की एक अन्य पहलवान ज्योति महिलाओं के ही 75 किग्रा फ्रीस्टाइल के क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की ओचिरबातयान बुरमा से आसानी से 0-4 से हार गई।

 

 

 

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