जिंदगी ने कुश्ती के अखाड़े में उतरने से पहले ही उन्हें कई कड़े दांव मारे, लेकिन पानीपत के ललित ने कभी हार नहीं मानी। बचपन में मां का साया उठ गया, पिता का सहारा भी नसीब नहीं हुआ, लेकिन पानीपत के इस लाल ने हालात के आगे घुटने टेकने की बजाय उन्हें ही चुनौती दे डाली। गरीबी, अकेलेपन और संघर्षों से भरे रास्ते पर चलते हुए ललित ने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि अब वह एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े हैं।
ललित ने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में उलटफेर किया और चीन के नंबर-1 पहलवान को धूल चटा दी। ललित अब एशियाई चैंपियन बनने वाले चौथे भारतीय पहलवान (ग्रीको-रोमन) बनने से सिर्फ एक कदम दूर हैं। ललित की कहानी सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि जिद, जुनून और जज्बे की मिसाल है, जिसने हर मुश्किल को पटखनी देकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। ललित ने दुनिया को बता दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल आपको इतिहास रचने से नहीं रोक सकती।
ललित ने चीन के नंबर-1 पहलवान को हराया
साल 2017 में जब 15 साल के ललित ग्रीको-रोमन कुश्ती की दुनिया में पूरी तरह डूब जाने के लिए सोनीपत के रायपुर स्पोर्ट्स अखाड़े में दाखिल हुए तब उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि वर्षों बाद किर्गिस्तान के बिश्केक में वह इतिहास रचने की कगार पर खड़े होंगे। सोमवार 6 अप्रैल 2026 को पानीपत के रहने वाले ललित ने एशियन कुश्ती चैंपियनशिप की 55 किलोग्राम भार वर्ग के सेमी-फाइनल में 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेडलिस्ट और टॉप-सीड चीन के शी हुओयिंग को हरा दिया।
ललित का अब फाइनल में उज्बेकिस्तान के तीसरे वरीयता प्राप्त इख्तियार बोतिरोव से मुकाबला होगा। ललित के पास एशियाई खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान बनने का मौक़ा है। मैट पर उनके शानदार ‘टेकडाउन’ के बिल्कुल उलट पानीपत की गलियों से लेकर एशियन पोडियम तक का सफर जरा भी आसान नहीं रहा है।
पालने में ही उठ गया था मां का साया
ललित ने मां को तब खो दिया था जब वह पालने में ही थे। वह पिता के बिना किसी सहयोग के बड़े हुए। उनके पिता पत्नी को खोने के गम में डूबे हुए थे और 2023 में उनका भी देहांत हो गया। कुश्ती ही वह जगह थी जहां ललित को दूसरा परिवार मिला। कुश्ती के अपने शुरुआती दिनों में जब वह झज्जर में कोच पवन शास्त्री के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रहे थे तब उनकी मुलाकात विजय गहलावत से हुई।
अखाड़े में विजय गहलावत के रूप में मिला बड़ा भाई
विजय गहलावत वरिष्ठ पहलवान हैं। उन्होंने ललित के लिए बड़े भाई और अभिभावक की भूमिका निभाई। ललित की जीत के बाद विजय गहलावत ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, ‘मैं ललित को तब से जानता हूं और देखता आ रहा हूं, जब वह स्कूल में एक छोटा बच्चा था। वह हमें कुश्ती लड़ते हुए देखता था और फिर खुद भी इसमें शामिल हो गया। एक बार मैंने उसे एक दंगल में देखा और उससे कहा कि अगर तुम्हें किसी भी चीज की जरूरत हो तो मैं तुम्हारे लिए हमेशा मौजूद हूं। वह 2015 में मेरे पास आया और तभी मैंने अपने पिता से कहा कि यह मेरा भाई है और अब यह मेरे साथ ही रहेगा।’
विजय के परिवार ने ललित को गोद ले लिया
विजय के पिता की प्रतिक्रिया ने कुश्ती में ललित की यात्रा की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। विजय गहलावत ने बताया, ‘मेरे पिता ने कहा- ठीक है, यह हमारा तीसरा बेटा है और हमने उसे गोद ले लिया है। तब से वह हमारे परिवार का एक अभिन्न अंग बन गया है। वह सभी उत्सवों और कार्यक्रमों का हिस्सा होता है।’ ललित ने जब विजय के साथ ट्रेनिंग शुरू की तो उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि वह युवा पहलवान अपने लक्ष्य से न भटके।
ललित की सफलता से संतुष्ट हैं विजय
विजय गहलावत ने बताया, ‘उसके स्कूली दिनों से ही मैंने यह सुनिश्चित किया है कि वह कोई भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से नहीं चूके। एक पहलवान होने के नाते मुझे पता था कि कौन सी चीजें नहीं करनी चाहिए और मैंने यह सुनिश्चित किया कि उसे यह जानकारी मुझसे मिले। उसने धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं, कैडेट नेशनल चैंपियनशिप में पदक जीते और फिर U23 एशियन चैंपियनशिप में भी। अब वह एशियन चैंपियनशिप के फाइनल में है। मुझे पहले कभी भी इतनी संतुष्टि महसूस नहीं हुई।’
जब विजय से पूछा गया कि ललित के साथ उसका कैसा रिश्ता है तो उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘मान लो जी जैसे उस्ताद और शागिर्द का होता है। वह मुझे सब कुछ बताता है। मैंने पक्का किया है कि वह किसी भी तरह की गलत संगत से दूर रहे। अगर कुछ चाहिए होता है तो मैं उसके साथ जाता हूं।’
वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर जीत चुके हैं विजय
विजय के नाम कई राष्ट्रीय खिताब और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में एक सिल्वर मेडल है। विजय गहलावत 2016 में नेवी में शामिल हुए और नेवी टीम के साथ ट्रेनिंग करने के लिए रायपुर स्पोर्ट्स एकेडमी चले गए। वहां कुलदीप सिंह सहरावत की देखरेख में ट्रेनिंग होती है। अपनी किशोरावस्था में ही ललित को कोच और उनके पहलवानों के साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिला।
कुलदीप सिंह सहरावत ने मजाकिया अंदा में कहा, ‘जब वह हमारी अकादमी में आया तो बच्चा था। वह 2017 में आया और तब से वह हमारे साथ यहीं रह रहा है और ट्रेनिंग कर रहा है। जब विजय हमारे साथ जुड़ा तो ललित भी उसके साथ ही आ गया। वह पहले झज्जर में ट्रेनिंग कर रहा था, लेकिन तब वह बच्चा था। यहां आने के बाद, विजय और हमारी अकादमी ने पक्का किया कि उस पर किसी भी चीज का कोई बोझ न हो। हमने उसे यहां ट्रेनिंग दी और उसने हमें अच्छे नतीजे भी दिए। उसने यह खेल यहीं सीखा और आखिरकार नेवी में भर्ती हो गया।’
कुलदीप सहरावत की कोचिंग में पारंगत हुए ललित
कुलदीप उस समय कोच थे जब भारत ने अपना एकमात्र ग्रीको-रोमन वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीता था। कुलदीप ने किशोर ललित में छिपी प्रतिभा को पहचाना और उसे एक तकनीकी रूप से मजबूत पहलवान बनाने के लिए तैयार करना शुरू कर दिया। कुलदीप ने समझाते हुए कहा, ‘ग्रीको-रोमन पूरी तरह से तकनीक पर आधारित है। भारत में ग्रीको-रोमन में हमारे पास बहुत कम तकनीकी पहलवान हैं। अगर कोई एलीट लेवल पर तकनीक को सही तरीके से इस्तेमाल कर पाता है तो उसी से ग्रीको-रोमन में मेडल मिलते हैं।’
प्रीति पवार का दमदार पंच, पेरिस ओलंपिक मेडलिस्ट को हरा रचा इतिहास, प्रिया-अरुंधति ने भी बढ़ाया भारत का मान
प्रीति पवार की शानदार जीत के साथ एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत का दबदबा दिखा। प्रिया और अरुंधति चौधरी ने भी फाइनल में जगह बनाकर देश का मान बढ़ाया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
