ताज़ा खबर
 

एशियाई खेल: चुनौती के लिए तैयार हैं भारतीय महिला पहलवान

हाल में राष्ट्रमंडल खेल में जैसा प्रदर्शन भारतीय पुरुष पहलवानों ने किया, वैसा प्रदर्शन महिलाएं नहीं कर पाईं। इसकी बड़ी वजह उन्हें कनाडा के अलावा नाइजीरियाई पहलवानों की कड़ी चुनौती का सामना करना रहा।

Author May 31, 2018 6:29 AM
राष्ट्रमंडल खेल में विनेश ने भारतीय महिलाओं में अकेला स्वर्ण जीता था।

मनोज जोशी

हाल में राष्ट्रमंडल खेल में जैसा प्रदर्शन भारतीय पुरुष पहलवानों ने किया, वैसा प्रदर्शन महिलाएं नहीं कर पाईं। इसकी बड़ी वजह उन्हें कनाडा के अलावा नाइजीरियाई पहलवानों की कड़ी चुनौती का सामना करना रहा। इसके बावजूद भारतीय महिलाएं एक स्वर्ण सहित दो रजत और दो कांस्य पदक जीतने में कामयाब रहीं लेकिन भारतीय महिलाओं की आगे की राह और भी मुश्किल है। अब उन्हें अगस्त में एशियाई खेलों में जापान, चीन और मंगोलिया के अलावा पूर्व सोवियत देशों की कड़ी चुनौती का सामना करना है और जिस तरह इस साल एशियाई चैम्पियनशिप में विनेश और नवजोत ने जापानी पहलवानों को शिकस्त दी है, उससे इन पहलवानों से बढ़िया प्रदर्शन करने की उम्मीदें जग गई हैं।

50 किलो वर्ग में इस बार चीन की सुन यनान नहीं उतरतीं तो उनकी जगह एशियाई चैम्पियन लेई चुन भी विनेश को इसी साल हरा चुकी हैं। विश्व विजेता जापान की युई सुसाकी और विश्व स्पर्धा की कांस्य पदक विजेता उत्तर कोरिया की किम सोन ह्यांग भी इसी वजन में हैं। राष्ट्रमंडल खेल में विनेश ने भारतीय महिलाओं में अकेला स्वर्ण जीता था। वहीं 53 किलो वजन में विश्व स्पर्धा की रजत पदक विजेता जापान की मायू मुकैदा और एशियाई विजेता उत्तर कोरिया की पाक योंग मी के अलावा मंगोलिया और कज़ाकिस्तान की तगड़ी पहलवान मौजूद हैं। इस वजन में भारत की सबसे बड़ी चुनौती बबीता हैं। हाल में वे राष्ट्रीय शिविर में शामिल नहीं हुई थीं।

57 किलो में राष्ट्रमंडल खेल की रजत पदक विजेता पूजा ढांडा के वजन में विश्व स्पर्धा की कांस्य पदक विजेता किर्गिस्तान की एसूलू टिनीबेकोवा और एशियाई विजेता चीन की पेई शिंगरू के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया और मंगोलिया की मजबूत पहलवान हैं। एसूलू रियो में कांस्य पदक के मुकाबले में साक्षी मलिक के हाथों हारी थीं लेकिन उसके बाद से उन्होंने अपने प्रदर्शन को फर्श से अर्श पर पहुंचाया है। नई दिल्ली में पिछले साल उन्होंने फाइनल में सरिता को हराकर एशियाई स्पर्धा का खिताब जीता था लेकिन अब साक्षी 62 किलो में आ गई हैं। उनके वजन में विश्व विजेता मंगोलिया की ओरखोन के अलावा चीन और जापान की दिग्गज पहलवान हैं तो वहीं 68 किलो में मंगोलिया की ओरखोन विश्व स्पर्धा में शिल्पी शेरोन को हरा चुकी हैं जबकि रियो में उन्हें साक्षी मलिक ने हराया था।

एशियाई विजेता झाओ फेंग सहित मगोलिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और दक्षिण कोरियाई पहलवान भी इस वजन में कम नहीं हैं। इनमें किर्गिस्तान की पहलवान से दिव्या को इस साल एशियाई स्पर्धा में हार का सामना करना पड़ा था। सुपर हैवीवेट वर्ग में किरण के लिए करीब-करीब सभी प्रतियोगी सवा सेर हैं। इसी वजन में मौजूदा एशियाई चैम्पियन नवजोत कौर के साथ ट्रायल में दिव्या की कुश्ती के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। नवजोत ने एशियाई चैम्पियनशिप में जापान की पहलवान को हराकर एक बड़ा उलटफेर किया था।

स्वर्ण भी जीत सकती हैं महिलाएं

“जहां तक हमारी महिला पहलवानों का सवाल है, मुझे उन पर पूरा भरोसा है। एशियाई चैम्पियनशिप में विनेश और नवजोत ने जापानी पहलवानों को हराकर इसे साबित भी किया है। अगर हमारी पहलवान अनुशासन के साथ प्रशिक्षकों की सिखाई तरकीबों को आजमाने में सफल रहीं तो वे एशियाई खेलों में पहली बार स्वर्ण जीतने का कमाल भी कर सकती हैं।”

-बृजभूषण शरण सिंह, अध्यक्ष, भारतीय कुश्ती संघ

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App