इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (IPL 2026) में कोलकाता नाइट राइडर्स ने भारत के केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ी वरुण चक्रवर्ती को बाएं पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद खेलने के लिए मजबूर करके विवाद खड़ा कर दिया है, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवाजीत सैकिया ने माना कि जब आईपीएल चल रहा होता है तो बोर्ड फ्रैंचाइजी के मामलों में ‘दखल नहीं दे सकता’।
एक आम जानकारी यह है कि केंद्रीय अनुबंध वाले सभी खिलाड़ियों के लिए फ्रैंचाइजी का फिजियो भारत के फिजियो को अपडेट देता है और अगर किसी खिलाड़ी की चोट और बढ़ सकती है तो बीसीसीआई टीम को चेतावनी दे सकता है। गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच के दौरान वरुण चक्रवर्ती पूरे समय लंगड़ाते हुए गेंदबाजी करते रहे, जिससे यह सवाल उठने लगे कि अभिषेक नायर और उनकी टीम ने हेयरलाइन फ्रेक्चर होने के बावजूद चक्रवर्ती को मैदान में क्यों उतारा?
चोटिल खिलाड़ियों पर बीसीसीआई का रुख
सैकिया से खास तौर पर चक्रवर्ती के बारे में नहीं पूछा गया था, लेकिन उन्होंने कुछ फ्रैंचाइजियों द्वारा चोटिल खिलाड़ियों को खेलने के लिए मजबूर किए जाने के मामले पर बीसीसीआई का रुख साफ किया। सैकिया ने कहा, ‘जहां तक आईपीएल की बात है तो फ्रैंचाइजियां खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस का ध्यान रखती हैं। बेशक सीओई (बेंगलुरु में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के फिजियो भी उन पर नजर रखते हैं, उनके वर्कलोड और उन्हें फिट रखने की योजना पर भी काम करते हैं।’
सैकिया का बयान चिंताजनक
सैकिया का अगला बयान चिंताजनक था। उन्होंने माना, ‘निगरानी तो होती है, लेकिन जब आईपीएल चल रहा होता है तो हम बहुत अधिक दखल नहीं दे सकते। अगर यह भारतीय टीम की स्थिति होती तो हमारा नियंत्रण अधिक होता।’ सैकिया के इस बयान से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या बीसीसीआई किसी फ्रेंचाइजी को चोटिल खिलाड़ी को मैदान में उतारने से रोकने की स्थिति में है। सैकिया ने कहा, ‘अब हम फ्रेंचाइजियों को खिलाड़ियों के बारे में फैसला लेने की आजादी दे रहे हैं। जब राष्ट्रीय टीम के चयन की बात आएगी तो हम निश्चित रूप से उनके फिटनेस स्तर पर गौर करेंगे।’
ऋषभ पंत को झटके पर झटका
भारत बनाम अफगानिस्तान टेस्ट और वनडे इंटरनेशनल सीरीज के लिए 19 मई 2026 को टीम इंडिया का ऐलान हुआ। ऋषभ पंत से टेस्ट टीम की उप-कप्तानी छीन ली गई और वनडे टीम से बाहर कर दिया गया। पूरी खबर पढ़ें।
