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भारत की सबसे तेज रनर लॉकडाउन में कर रही थीं दूसरों की मदद, अब खुद झेल रहीं पैसों की किल्लत; लोग सरकार पर उठा रहे सवाल

दुती चंद की ट्रेनिंग एथेलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के नियमों के तहत नहीं होती है, इसलिए उन्हें एएफआई से मदद भी नहीं मिल पा रही हैं। कोविड-19 के कारण ओलंपिक गेम्स को अगले साल तक के लिए टाल दिया गया है। ऐसे में उन्हें अपनी तैयारी के लिए फंड खुद से ही जुटाना है। महामारी के कारण भले ही खेल की गतिविधियों पर अंकुश लगा है। ओलंपिक गेम्स भले ही टाल दिए गए हों लेकिन एथलीट अपनी तैयारी में जुटे हैं।

दुती चंद ने कोरोना की जंग में अपने गांव के तमाम लोगों की मदद की है लेकिन अब वे खुद आर्थिक संकट का शिकार हो रही हैं।

कोरोना वायरस के फैले संक्रमण के चलते न सिर्फ लोगों की सेहत बिगड़ रही है बल्कि कईयों का कमाई का जरिया भी समाप्त हो गया है। लॉकडाउन के हालात में न सिर्फ दिहाड़ी मजदूरों की रोजी रोटी चलनी मुश्किल हो रही है बल्कि बिजनेस और कॉरपोरेट से जुड़े लोगों का काम धंधा भी ठप्प हो गया है। वहीं अब खेल से जुड़े नामी चेहरे भी इस जंग में आर्थिक संकटों का सामना कर रहे हैं। भारत की सबसे तेज धावक दुती चंद को भी पैसों की कमी आन पड़ी है। ऐसे में दुती अपनी कार बेचने को मजबूर हो गई हैं।

दुती ने साल 2018 में तेलंगाना से 30 लाख रुपए में BMW 3 Series खरीदी थी लेकिन अब उन्हें अपनी पसंदीदा कार को बेचना पड़ रहा है। दुती साल 2021 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों के लिए रकम इकट्ठा करने के लिए अपनी कार को बेचना चाहती हैं। मासूम हो कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से फिलहाल कोई बड़ा खेल इवेंट नहीं हो पा रहा है, और न ही खिलाड़ियों को स्पॉन्सर मिल रहे हैं। ऐसे में दुती को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के लिए बता दें कि दुती की ट्रेनिंग एथेलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के नियमों के तहत नहीं होती है, इसलिए उन्हें एएफआई से मदद भी नहीं मिल पा रही है। दुती राज्य सरकार केआईआईटी यूनिवर्सिटी के अंडर ट्रेनिंग ले रही थी। उन्हें कई स्पॉन्सरशिप सिर्फ इस साल ओलंपिक तक के लिए ही मिली थी, लेकिन ओलंपिक गेम्स को अगले साल तक के लिए टाल दिया गया है। ऐसे में उन्हें अपनी तैयारी के लिए फंड खुद से ही जुटाना है।

अपनी BMW कार के साथ दुती चंद

दुती के इन हालात को लेकर कई लोग सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह देश का दुर्भाग्य है। कुछ दिन पहले ही दुती उन लोगों की मदद कर रही थीं जो लॉकडाउन में बेरोजगार हो गए थे। अपने गांव के गरीब लोगों की दुती ने कई जरूरतमंद चीजों को सप्पाई किया था लेकिन अब वो उन पर खुद संकट के बादल छाए हैं। बहरहाल, हम उम्मीद करते हैं सरकार उनकी जल्द से जल्द मदद करे।

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