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जज्बा: ‘पदक पर पंच लगा कर ही दम लूंगा’

जनवरी 2019 में एमेच्योर से पेशेवर मुक्केबाज बने 28 साल के इस एथलीट से दोबारा एमेच्योर में लौटने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा, मेरा शुरू से ही सपना रहा है देश के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करना। मैंने इसके लिए पूरी कोशिश भी की लेकिन हो नहीं पाया।

भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण।

‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है।’ मुक्केबाज विकास कृष्ण अलम्मा इकबाल की लिखी इन पंक्तियों को चरितार्थ करने में जुटे हैं। ओलंपिक का टिकट कटा चुके इस खिलाड़ी का सपना भारत को पदक दिलाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे पूर्णबंदी के दौरान भी जमकर पसीना बहा रहे हैं। जनसत्ता से विकास ने कहा कि उन्हें अर्जुन की तरह सिर्फ मछली की आंख की पुतली यानी ओलंपिक पदक दिख रहा है और वे इसे पाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अर्जुन पुरस्कार विजेता ने कहा कि वे इसके लिए पेशेवर मुक्केबाजी में सीखे तकनीकों का इस्तेमाल करेंगे और इस बार पदक पर पंच लगा कर ही दम लेंगे।

पूर्णबंदी के कारण विकास फिलहाल घर में ही अभ्यास कर रहे हैं। वैश्विक खेल प्रतियोगिता की तैयारियों के बारे में बताते हुए विकास कहते हैं, ओलंपिक का एक साल के लिए टलना मेरे लिए बेहतरीन मौका लेकर आया है। हर खिलाड़ी को इस टूर्नामेंट की तैयारी के लिए कुछ समय चाहिए होता है। मेरी तैयारी को पुख्ता करने के लिए भी लगभग एक साल का समय चाहिए था। अब वह मिल चुका है। मैं अपनी तैयारी पर ध्यान लगा रहा हूं। हालांकि घर और कैंप की तैयारी में काफी अंतर होता है। फिर भी मैं खुद को फिट और मजबूत करने के लिए जो कर सकता हूं, उसे कर रहा हूं।

विकास ने कहा कि सही मायने में देखा जाए तो अभी मेरी तैयारी कमजोर है और ऐसा ही पूरे विश्व के मुक्केबाजों के साथ है। कोरोना महामारी के कारण किसी भी देश का कोई भी खिलाड़ी पूर्ण अभ्यास नहीं कर पा रहा है। इसलिए चिंता की बात नहीं है। कैंप शुरू होने के साथ ही मैं पूर्ण अभ्यास में जुट जाऊंगा।

जनवरी 2019 में एमेच्योर से पेशेवर मुक्केबाज बने 28 साल के इस एथलीट से दोबारा एमेच्योर में लौटने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा, मेरा शुरू से ही सपना रहा है देश के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करना। मैंने इसके लिए पूरी कोशिश भी की लेकिन हो नहीं पाया। इस बार मैं किसी भी हाल में पदक पर पंच लगाना चाहता हूं।
विजेंदर सिंह के बाद विकास दूसरे पुरुष मुक्केबाज हैं जिन्होंने तीसरी बार ओलंपिक का टिकट कटाया है। जॉर्डन के अम्मान में अपने विरोधियों को शानदार पंच के सहारे धराशाई करने वाले इस एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता ने दिखा दिया कि वे अब नए अवतार में ओलंपिक के लिए हाजिर हैं।

यहां मुकाबलों के दौरान अपने फुटवर्क और पंच से काफी तेज प्रहार करने वाले इस खिलाड़ी ने इसका श्रेय पेशेवर मुक्केबाजी को दिया। उन्होंने कहा कि पहले एमेच्योर से पेशेवर मुक्केबाजी को अपनाना काफी मुश्किल था। मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन अब मैं ओलंपिक के लिए पूरी तरह तैयार हूं।

पूर्णबंदी के बाद अभ्यास के लिए वे एमेच्योर मुक्केबाजी टूर्नामेंटों को तवज्जों देंगे या पेशेवर को, इस पर उन्होंने कहा कि फिलहाल मैैं पेशेवर मुक्केबाजी के सहारे ही अपने अभ्यास को मजबूती दूंगा। पेशेवर मुक्केबाजों के खिलाफ लड़ना काफी कठिन होता है। क्वालीफायर के दौरान भी मैंने ये महसूस किया। एमेच्योर को हराना उतना मुश्किल नहीं जितना एक पेशेवर मुक्केबाज को हराना है।

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