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भारतीय बैडमिंटन ने 2014 में नई ऊंचाईयों को छुआ

भारतीय बैडमिंटन के लिए मौजूदा साल सफलता से भरा रहा जिसमें देश के खिलाड़ियों ने आठ व्यक्तिगत खिताब जीते और टीम चैम्पियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को बैडमिंटन में नई ताकत के रूप में पेश किया। साइना नेहवाल और के श्रीकांत ने चीन ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर का खिताब जीता जबकि पीवी […]

Author December 22, 2014 3:51 PM
शटलर साइना नेहवाल खेल मंत्रालय द्वारा पद्म भूषण के लिए आवेदन खारिज होने से निराश हैं।

भारतीय बैडमिंटन के लिए मौजूदा साल सफलता से भरा रहा जिसमें देश के खिलाड़ियों ने आठ व्यक्तिगत खिताब जीते और टीम चैम्पियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को बैडमिंटन में नई ताकत के रूप में पेश किया।

साइना नेहवाल और के श्रीकांत ने चीन ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर का खिताब जीता जबकि पीवी सिंधू ने विश्व चैम्पियनशिप सहित कुल पांच कांस्य पदक जीते। इसके अलावा भारत ने उबेर कप और एशियाई खेलों में ऐतिहासिक पदक जीते।

पिछले कुछ वर्षों में जहां साइना भारतीय बैडमिंटन का चेहरा रही वहीं इस साल कई युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।

साइना ने जहां साल में तीन खिताब जीते वहीं श्रीकांत, पारूपल्ली कश्यप, अरविंद भट, सिंधू और एचएस प्रणय भी कम से कम एक खिताब जीतने में सफल रहे हैं। सौरभ वर्मा और पीसी तुलसी भी अंतरराष्ट्रीय चैलेंज वर्ग की प्रतियोगिताओं में खिताब जीतने में सफल रहे।

भारत के लिए साल का पहला खिताब साइना ने इंडिया ग्रां प्री गोल्ड के साथ जीता और इसके साथ ही उन्होंने अपने लंबे समय के खिताबी सूखे को भी खत्म किया। उन्होंने इसके अलावा जून में आस्ट्रेलिया सुपर सीरीज और फिर नवंबर में चीन सुपर सीरीज प्रीमियर का खिताब जीता।

साइना के प्रदर्शन में जहां उतार चढ़ाव देखने को मिला वहीं युवा सिंधू ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। वह लखनउच्च् में इंडिया ग्रां प्री गोल्ड के फाइनल में पहुंची और इसके बाद गिमचियोन में एशियाई बैडमिंटन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक  ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की महिला युगल जोड़ी भी अप्रैल में एशियाई बैडमिंटन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने में सफल रही।

भारत ने मई में पहली बार प्रतिष्ठित थामस और उबेर कप फाइनल्स की मेजबानी की और साइना और सिंधु ने इस टूर्नामेंट को भारत के लिए यादगार बनाते हुए महिला टीम को कांस्य पदक दिलाया।

सिंधु जुलाई में राष्ट्रमंडल खेलों का महिला एकल का खिताब जीतने के करीब पहुंची लेकिन कनाडा की मिशेल ली के हाथों शिकस्त के साथ उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

राष्ट्रमंडल खेलों में हालांकि भारत का प्रदर्शन कुल मिलाकर अच्छा रहा। ग्लास्गो में हुए इन खेलों में पारूपल्ली कश्यप ने पुरूष एकल में स्वर्ण पदक का भारत का 32 साल का इंतजार खत्म किया और आरएमवी गुरूसाईदत्त ने भी कांस्य पदक जीता। वर्ष 2010 की चैम्पियन ज्वाला और अश्विनी की जोड़ी को हालांकि रजत पदक के साथ संतोष करना पड़ा।

एक महीने बाद 19 वर्षीय सिंधू विश्व चैम्पियनशिप में दो कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी जब कोपेनहेगन में उन्होेंने सेमीफाइनल में जगह बनाई।

युवा प्रणय को इसके बाद वियतनाम ग्रां प्री ओपन के फाइनल में शिकस्त का सामना करना पड़ा लेकिन वह इंडोनेशिया मास्टर्स ग्रां प्री गोल्ड में खिताब जीतने में सफल रहे जो उनके करियर का पहला खिताब था।

भारत इसके बाद एशियाई खेलों की बैडमिंटन स्पर्धा में पदक के 28 साल के सूखे को भी समाप्त करने में सफल रहा जब साइना और सिंधू की अगुआई में भारतीय महिला टीम ने इंचियोन में कांस्य पदक जीता।

कंधे की चोट के कारण सात महीने बैडमिंटन से दूर रहे अजय जयराम भी इसके बाद अल्मेरे में डच ओपन ग्रां प्री का खिताब जीतने में सफल रहे।
नवंबर में साइना और श्रीकांत ने चीन ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर में क्रमश: महिला और पुरूष एकल का खिताब जीतकर इतिहास रचा। जहां यह साइना का साल का तीसरा खिताब था वहीं श्रीकांत ने अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता। श्रीकांत ने इस टूर्नामेंट में फाइनल के अपने सफर के दौरान दो बार के ओलंपिक चैम्पियन और पांच बार के विश्व चैम्पियन चीन के लिन डैन को भी हराया।

साइना और श्रीकांत इसके अलावा सत्र के अंत में होने वाले बीडब्ल्यूएफ विश्व सुपर सीरीज फाइनल्स में जगह बनाने में सफल रहे जिसमें दुनिया के शीर्ष आठ खिलाड़ी खेलते हैं। ये दोनों इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचे।

 

 

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