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चैंपियन्स ट्रॉफी में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखने उतरेगा भारत

कोच टैरी वाल्श के अचानक पद छोड़ने के कारण अस्तव्यस्तता के बावजूद भारतीय पुरूष हॉकी टीम एफआईएच चैंपियन्स ट्राफी में भी अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखकर इस साल के अपने बेहतरीन अभियान का सुखद अंत करना चाहेगी। भारत अपने पहले मैच में कल ओलंपिक चैंपियन जर्मनी से भिड़ेगा। यदि विश्व कप को छोड़ दिया जाए […]

Author December 5, 2014 1:28 PM
इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया जबकि बेल्जियम ने पाकिस्तान को हराया

कोच टैरी वाल्श के अचानक पद छोड़ने के कारण अस्तव्यस्तता के बावजूद भारतीय पुरूष हॉकी टीम एफआईएच चैंपियन्स ट्राफी में भी अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखकर इस साल के अपने बेहतरीन अभियान का सुखद अंत करना चाहेगी। भारत अपने पहले मैच में कल ओलंपिक चैंपियन जर्मनी से भिड़ेगा।

यदि विश्व कप को छोड़ दिया जाए तो 2014 कुल मिलाकर भारतीय हाकी टीम के लिये अच्छा साल रहा। विश्व कप में भारत नौवें स्थान पर रहा था लेकिन इसके बाद उसने सकारात्मक परिणाम हासिल किए।

वाल्श की देखरेख में भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता और फिर इंचियोन एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर 2016 के रियो ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई किया। उसने एशियाई खेलों में 16 साल बाद स्वर्ण पदक हासिल किया।

चैंपियन्स ट्राफी से कुछ दिन पहले भारतीय टीम ने विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया के खिलाफ उसकी सरजमीं पर टेस्ट श्रृंखला जीती जिससे निश्चित तौर पर सरदार सिंह एंड कंपनी का काफी मनोबल बढ़ा होगा।

लेकिन नवनिर्मित कलिंगा स्टेडियम में खेली जाने वाली चैंपियन्स ट्राफी में पोडियम तक पहुंचना भारत के लिये आसान नहीं होगा क्योंकि उसका सामना दुनिया की चोटी की टीमों से होगा।

भारत को पूल बी में मजबूत जर्मनी, ओलंपिक और विश्व कप के रजत पदक विजेता नीदरलैंड और विश्व कप के कांस्य पदक विजेता अर्जेंटीना के साथ रखा गया है। पूल ए में विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया, बेल्जियम, पाकिस्तान और इंग्लैंड की टीमें हैं।

यदि चैंपियन्स ट्राफी में रिकार्ड की बात की जाए तो भारत का इसमें रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है। वह केवल एक बार 1982 में पोडियम तक पहुंचा और तब भी टीम ने कांस्य पदक जीता था। वह चार बार चौथे स्थान पर रहा। दो साल पहले मेलबर्न में भी उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था।

इस बार भारतीयों के पास चैंपियन्स ट्राफी के अपने रिकार्ड में सुधार करने का सुनहरा मौका है क्योंकि हाल में अच्छे परिणाम हासिल करने के अलावा उन्हें स्थानीय दर्शकों का भी समर्थन मिलेगा।

लेकिन वाल्श के इस्तीफे के बाद चले नाटक का टूर्नामेंट में भारतीय प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ सकता है और यह देखना होगा कि सरदार एंड कंपनी हाई परफोरमेन्स निदेशक रोलैंड ओल्टमैंस की देखरेख में कैसा प्रदर्शन करती है। ओल्टमैंस को अभी टीम की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

वाल्श को पिछले साल सितंबर में भारत का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था लेकिन हाकी इंडिया और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के साथ अनुबंध संबंधी बातचीत नाकाम रहने के बाद पिछले महीने उन्होंने अपना पद छोड़ दिया था।
वाल्श के जाने बाद चैंपियन्स ट्राफी भारत का पहला टूर्नामेंट होगा और ओल्टमैंस अच्छी तरह से जानते हैं कि उनकी भूमिका कितनी अहम है।
उन्होंने कहा, ‘‘टीम का मनोबल उच्च्ंचा है क्योंकि हम अच्छी तरह से जानते हैं कि प्रत्येक काम में कुछ बाधाएं आती हैं। हम अभी केवल आगे के बारे में सोच रहे हैं। हमारी निगाहें केवल चैंपियन्स ट्राफी पर टिकी हैं और हमने इसके लिये अच्छी तरह से तैयार होने की हर संभव कोशिश की है। ’’
ओल्टमैंस ने कहा, ‘‘लड़कों ने कड़ी मेहनत की है। वे जानते हैं कि उनसे काफी उम्मीद की जा रही है। वे वास्तव में 2014 में फिर से अच्छा प्रदर्शन करने के लिये प्रतिबद्ध हैं। टीम जर्मनी के खिलाफ खेलने के लिये पूरी तरह तैयार है। ’’
भारत ने एशिया कप जीतने वाली 16 सदस्यीय टीम के अधिकतर सदस्यों को बरकरार रखा है तथा इसमें कुछ अतिरिक्त खिलाड़ी जोड़े हैं जिससे टीम को फायदा होगा।
ड्रैग फ्लिकर गुरजिंदर सिंह, ललित उपाध्याय, एस के उथप्पा और गोलकीपर हरजोत सिंह टीम के नये चेहरे हैं। कप्तान सरदार सिंह की मध्यपंक्ति में भूमिका अहम होगी जबकि रक्षापंक्ति की जिम्मेदारी बीरेंद्र लाकड़ा, वी आर रघुनाथ, रूपिंदर पाल सिंह और गुरबाज सिंह के कंधों पर रहेगी।

भारत की अग्रिम पंक्ति में युवा और कड़ी मेहनत करने वाले रमनदीप सिंह, आकाशदीप सिंह, एस वी सुनील, निक्किन थिम्मैया और ललित हैं जबकि गोलकीपिंग की जिम्मेदारी उप कप्तान पी आर श्रीजेश के उच्च्पर हैं जिन्हें अभी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर माना जाता है।

भारत की सबसे बड़ी मजबूती पेनल्टी कार्नर होनी चाहिए क्योंकि अभी टीम में रघुनाथ, रूपिंदर और गुरजिंदर के रूप में तीन अच्छे ड्रैग फ्लिकर हैं।

लेकिन भारत के लिये मजबूत जर्मनी से पार पाना आसा नहीं होगा जिसने नौ बार चैंपियन्स ट्राफी जीती है। उसने हालांकि आखिरी बार 2007 में खिताब जीता था।

जर्मनी की टीम पिछले सात साल से खिताब का सूखा खत्म करने के लिये प्रतिबद्ध है। इससे वह इस साल विश्व कप में अपने लचर प्रदर्शन (छठा स्थान) की निराशा को भी खत्म करना चाहेगी।

जर्मनी ने टूर्नामेंट में युवा लेकिन मजबूत टीम उतारी है जिसमें मोरिट्ज फरस्टे, टोबियास हाक, फ्लोरियन फुक्स और गोलकीपर निकोलस जाकोबी के रूप में उपयोगी खिलाड़ी शामिल हैं।

भारत और जर्मनी दोनों ही चैंपियन्स ट्राफी जैसे बड़े टूर्नामेंट में सकारात्मक शुरूआत के महत्व को जानते हैं और इसएिल वे कल जीत दर्ज करने के लिये कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

इस बीच टूर्नामेंट के अन्य मैचों में कल पूल ए आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड तथा पाकिस्तान और बेल्जियम आमने सामने होंगे जबकि पूल बी में भारत और जर्मनी के अलावा हालैंड और अर्जेंटीना की टीमें एक दूसरे से भिड़ेंगी।

 

 

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