IND vs NZ: टीम इंडिया को हलाल मीट ही मिलेगा, नए डाइट मेन्यू में बीफ और पोर्क को कैटरिंग स्टाफ की ना; जानें पूरा मामला

हलाल में जानवर के गले की नस को काटकर तब तक छोड़ दिया जाता है जब तक कि उसका पूरा खून नहीं निकल जाए। झटका में जानवर के गर्दन पर तेज धारदार हथियार से वार करके उसे तुरंत मार दिया जाता है। झटके से जानवर को मारने से उसकी रक्त कोशिकाओं में खून के थक्के रह जाते हैं।

Team India hit the ground running in Kanpur ahead of the 1st IND vs NZ Test Match Halaal Meat Menu
टीम इंडिया ने कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में 23 नवंबर की शाम जमकर पसीना बहाया। (सोर्स- ट्विटर/बीसीसीआई)

IND Vs NZ, Kanpur Test Match: भारत और न्यूजीलैंड के बीच दो मैच की सीरीज का पहला टेस्ट 25 नवंबर से कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में खेला जाना है। दोनों टीमें कानपुर पहुंच चुकी हैं। हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) मंगलवार को तब विवादों से घिर गया जब पता चला कि न्यूजीलैंड के खिलाफ कानपुर में पहले टेस्ट मैच के दौरान भारतीय क्रिकेटर्स के लिए केवल ‘हलाल’ मांस की सिफारिश की गई है।

भारतीय क्रिकेटर्स के लिए जो व्यंजन सूची (मेन्यू) तैयार की गई है। इसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि पोर्क (सूअर का मांस) और बीफ (गोमांस) किसी भी रूप में भोजन का हिस्सा नहीं होने चाहिए। खिलाड़ियों के डाइट चार्ट का एक सर्कुलर सोशल मीडिया पर भी वायरल है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के पास भी इसकी एक प्रति है। इसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि पोर्क (सूअर का मांस) और बीफ (गोमांस) किसी भी रूप में भोजन का हिस्सा नहीं होने चाहिए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता और एडवोकेट गौरव गोयल ने इस सिफारिश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

बीसीसीआई के मेन्यू में ऑल-डे काउंटर, स्टेडियम में मिनी ब्रेकफास्ट, लंच, टी टाइम स्नैक और रात में डिनर शामिल है। इससे पोर्क (Pork) और बीफ (Beef) को बाहर रखा गया है। मांसाहारी व्यंजन में हलाल मीट को शामिल किया गया है। यानी खिलाड़ियों को खाने में अब बीफ और पोर्क सर्व नहीं किया जाएगा, जबकि सर्टिफाइड हलाल मीट ही सर्व किया जाएगा। इसी को लेकर बवाल मचा है।

इस संबंध में जब पीटीआई ने बीसीसीआई के पदाधिकारियों से बात करने का प्रयास किया तो कोई भी प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार नहीं था। माना जा रहा है कि भोजन की यह सूची खिलाड़ियों के पोषण को ध्यान में रखते हुए सहयोगी स्टॉफ और चिकित्सा दल ने तैयार की है। हिंदू और सिख अमूमन ‘झटका’ वाला मांस जबकि मुस्लिम ‘हलाल’ मांस खाना पसंद करते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इस मसले पर बीसीसीआई (BCCI) पर भड़के हुए हैं।

व्यंजन सामग्री में दो तरह के मांस का जिक्र किया गया है। चिकन (मुर्गे का मांस) और भेड़ का मांस। सूचीबद्ध मांसाहारी भोजन में भुना हुआ चिकन, भेड़ का भुना हुआ मांस, काली मिर्च सॉस के साथ भेड़ के मांस के चॉप, मुर्ग यखनी, चिकन थाई करी, मसालेदार ग्रील्ड चिकन, गोवा मछली करी, टंगड़ी कबाब और लहसुन की चटनी के साथ तला हुआ चिकन शामिल हैं।

मंगलवार यानी 23 नवंबर को सोशल मीडिया पर करीब दिनभर #BCCI_Promotes_Halal ट्रेंड हुआ। लोगों बीसीसीआई पर हलाल मीट प्रमोट करने का आरोप लगाया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ प्रवक्ताओं ने भी इस मामले में टिप्पणियां कीं और बीसीसीआई पर निशाना साधा।

गौरव गोयल ने ट्वीट में लिखा कि बीसीसीआई को हलाल प्रमोट नहीं करना चाहिए। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘बीसीसीआई यह याद रखे कि बोर्ड भारत में बना हुआ है, पाकिस्तान में नहीं।’ उन्होंने इस संबंध में एक वीडियो संदेश भी जारी किया।

कुछ यूजर्स ने ट्विटर पर लिखा है कि हलाल मीट सिर्फ मुस्लिमों के लिए जरुरी है। ऐसे में सभी भारतीय खिलाड़ियों के लिए इसे जरुरी नहीं किया जाना चाहिए। कुछ ट्विटर यूजर्स ने लिखा है कि बीसीसीआई इस तरह का फैसला लेकर देश को संकट में डाल रही है।

इस बीच, एबीपी न्यूज ने बीसीसीआई एक पदाधिकारी के हवाले से लिखा है, बोर्ड की ओर से ऐसा कोई सर्कुलर जारी नहीं किया गया है। खिलाड़ियों को वेज या नॉन वेज खाना है या फिर हलाल मांस खाना है या नहीं, ये उनकी निजी पसंद है। बोर्ड ने इस पर कभी कोई अनुदेश जारी नहीं किया है।

क्या होता है हलाल मीट?

हलाल में जानवर के गले की नस को काटकर तब तक छोड़ दिया जाता है जब तक कि उसका पूरा खून नहीं निकल जाए। झटका में जानवर के गर्दन पर तेज धारदार हथियार से वार करके उसे तुरंत मार दिया जाता है। झटके से जानवर को मारने से उसकी रक्त कोशिकाओं में खून के थक्के रह जाते हैं। विज्ञान के अनुसार, दोनों तरह के मांस में बराबर पोषक तत्व होते हैं। अब तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं कि कौन से मांस का सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक है। 

हलाल मीट को लंबे समय तक रखना आसान

हलाल मीट को लंबे समय तक संभालकर रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें खून के थक्के नहीं होते हैं। झटके से काटे गए जानवर के मांस को संभालकर रखना मुश्किल होता है, क्योंकि इसके अंदर रहने वाला खून इसे जल्दी खराब कर देता है।

पोर्क या बीफ को मेन्यू में शामिल करना आश्चर्यजनक नहीं: पूर्व क्रिकेटर

इस संबंध में एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने पीटीआई से कहा कि सूअर का मांस और गोमांस को भोजन सामग्री में शामिल नहीं करना आश्चर्यजनक नहीं हैं, लेकिन इस बारे में कभी लिखित निर्देश नहीं दिए गए।

इस क्रिकेटर ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘जब मैं टीम में था तो मैच के दिनों में कभी ड्रेसिंग रूम में गोमांस या सूअर का मांस नहीं भेजा गया। भारत में तो कम से कम कभी नहीं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि लिखित निर्देश देने के अलावा इसमें कुछ भी नया है।’

उन्होंने कहा, ‘इससे पहले कि कोई इसका कुछ अर्थ लगाए, क्रिकेटर्स को कभी गोमांस खाने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि इसमें बकरे के मांस की तरह काफी मात्रा में वसा होती है। हमें हमेशा कम प्रोटीनयुक्त भोजन करने की सलाह दी जाती रही है, जैसा कि मुर्गे के मांस या मछली में होता है।’

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