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U-19 कप्तान प्रियम गर्ग ने याद किए पुराने दिन, बताया- पापा दूध बेच प्रैक्टिस में जाने के लिए देते थे 10 रुपए, घर में टीवी नहीं था तो शोरूम में देखता था सचिन के मैच

प्रियम गर्ग सोमवार (2 नवंबर) को भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान बनाए गए। बता दें कि अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप अगले महीने से दक्षिण अफ्रीका में होगा।

Author लखनऊ | Updated: December 3, 2019 5:03 PM
अंडर-19 टीम के कैप्टन प्रियम गर्ग,फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम का कप्तान बनने के बाद प्रियम गर्ग ने अपने पुराने दिन याद किए। उन्होंने बताया, ‘‘पापा दिनभर घर-घर जाकर दूध बेचते थे और रात में 10 रुपए इसलिए देते थे, जिससे मैं मेरठ जाकर क्रिकेट की प्रैक्टिस कर सकूं। उस वक्त आर्थिक हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि मुझे अपना सपना पूरा करने के लिए बस की छत पर बैठकर सफर करना पड़ता था। उन यात्राओं के दौरान मैं अक्सर सोचता था कि एक दिन बहुत पैसा कमाऊंगा और अपने पापा की मदद करूंगा।’’ बता दें कि प्रियम गर्ग सोमवार (2 नवंबर) को भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान बनाए गए। बता दें कि अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप अगले महीने से दक्षिण अफ्रीका में होगा।

प्रियम गर्ग ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘‘मेरे पापा ने काफी मेहनत की। उन्होंने हर वह काम किया, जो आप सोच सकते हैं। दूध बेचा, स्कूल वैन चलाई, सामान उठाया। उन्होंने यह सब इसलिए किया, जिससे मुझे अच्छा जीवन मिल सके। वह मुझे क्रिकेटर बनते देखना चाहते थे। वह मुझे मेरठ ले गए और अच्छी अकैडमी जॉइन कराई।’’

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परीक्षितगढ़ वाले मेरे घर से मेरठ में संजय रस्तोगी की अकैडमी करीब 20 किलोमीटर दूर है। ऐसे में मेरे पापा की कोशिश यह रहती थी कि वह मेरे साथ जाएं या पांचों बहनों में से कोई एक मेरे साथ जरूर रहे। हालांकि, मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं अकेले सफर कर सकता हूं।

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वह सब नहीं है, वह कहते हैं। उनके पिता 20 किमी दूर मेरठ में संजय रस्तोगी की एकेडमी में कोच करने के लिए परीक्षितगढ़ में उनके घर से उनके साथ जाएंगे या यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी पांच बहनों में से एक ने ऐसा किया हो। जब तक वह कहता है, वे आश्वस्त थे कि वह अकेले यात्रा कर सकता है। प्रवीण कुमार व भुवनेश्वर कुमार जैसे स्विंग गेंदबाज देने वाली अकैडमी में अपना हुनर निखारने के बाद प्रियम को उत्तर प्रदेश की अंडर-14 क्रिकेट टीम के चुना गया। इसके बाद वह अंडर-16 व अंडर-19 टीमों में भी खेले। पिछले साल अपनी पहली रणजी ट्रॉफी खेलते हुए प्रियम ने 867 रन ठोंके, जिनमें एक दोहरा शतक, 2 शतक और 5 अर्द्धशतक शामिल थे।

प्रियम बताते हैं कि लाखों भारतीयों की तरह उन्होंने भी सचिन तेंडुलकर की वजह से क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा। उस वक्त उनके घर में टीवी नहीं होता था, जिसके चलते वह पास मौजूद शोरूम में जाकर सचिन तेंडुलकर को खेलते हुए देखते थे। प्रियम कहते हैं कि सचिन सर की वजह से ही मैं क्रिकेट खेलना चाहता था।

प्रियम के पापा नरेश बताते हैं कि बेटे को रोजाना सुबह अकैडमी लेकर जाना पड़ता था। ऐसे में मैंने दूध बेचना छोड़ दिया और स्कूल वैन चलाने लगा। साथ ही, अखबार भी बेचता था। रोजाना रात को मैं प्रियम को वैन में ले जाता और हम साथ डिनर करते थे। इसके बाद मैं अखबार उठाता और उन्हें जगह-जगह देता हुआ अकैडमी पहुंच जाता था। मैं ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं और क्रिकेट के बारे में ज्यादा नहीं जानता। एक दिन मेरी मुलाकात राहुल द्रविड़ से हुई। उन्होंने मुझसे कहा कि चिंता मत करो। तुम्हारा बेटा अपनी जगह खुद बना लेना। उस दिन मैं बहुत खुश था।

प्रियम के कोच रस्तोगी ने बताया, ‘‘वह प्रवीण व भुवनेश्वर के नक्शेकदम पर चलना चाहता था, लेकिन कुछ महीने बाद मैंने उसे बैटिंग पर फोकस करने के लिए कहा। अकैडमी में आने के सिर्फ एक साल बाद ही वह अंडर-14 टीम में चुन लिया गया था।’’

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