ताज़ा खबर
 

एथलेटिक्स के दम पर कामयाबी

संदीप भूषण भारतीय दल के इंडोनेशिया रवाना होने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या भारत अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहरा पाएगा। भारतीय खिलाड़ियों ने इसका जवाब दे दिया है। एशियाई खेलों के 67 साल के इतिहास में जकार्ता और पालेमबांग का 18वां सत्र भारत के लिए सबसे सफल रहा। एक तरफ वह स्वर्ण […]

Author September 6, 2018 4:23 AM
कुश्ती में भी बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ने पीले तमगे दिलाए लेकिन साक्षी की हार और सुशील का पहले दौर में बाहर होना खल गया।

संदीप भूषण

भारतीय दल के इंडोनेशिया रवाना होने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या भारत अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहरा पाएगा। भारतीय खिलाड़ियों ने इसका जवाब दे दिया है। एशियाई खेलों के 67 साल के इतिहास में जकार्ता और पालेमबांग का 18वां सत्र भारत के लिए सबसे सफल रहा। एक तरफ वह स्वर्ण जीतने के मामले में 1951 के 15 पदकों की बराबरी करने में कामयाब रहा तो दूसरी तरफ उसने कुल 69 पदकों के साथ 2010 के खेलों को पीछे छोड़ दिया। तब भारत के खाते में 65 पदक जुड़े थे। हालांकि पदक तालिका में भारत पिछली बार की तरह आठवें स्थान पर ही रहा।

इस सफलता का श्रेय एथलेटिक्स को जाता है। 15 में से सात स्वर्ण पदक एथलीटों ने जीते। युवा निशानेबाजों ने भी उम्दा प्रदर्शन से भारत के मान को बढ़ाया। हालांकि भारत के लिए सबसे बड़ा झटका कबड्डी और हॉकी में स्वर्ण पदक से चूकना रहा। यह ऐसे खेल हैं जिनमें भारत प्रबल दावेदार था। कुश्ती में भी बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ने पीले तमगे दिलाए लेकिन साक्षी की हार और सुशील का पहले दौर में बाहर होना खल गया। इन सब के बीच कुछ ऐसे यादगार पल भी रहे जिन्होंने 2020 ओलंपिक के लिए बेहतरी की उम्मीद जगाई। आइए निगाह डालते हैं भारतीय खिलाड़ियों ने कहां किया कमाल और कहां हुई चूक…

HOT DEALS
  • Honor 7X 64GB Blue
    ₹ 15445 MRP ₹ 16999 -9%
    ₹0 Cashback
  • Honor 8 32GB Pearl White
    ₹ 12999 MRP ₹ 30999 -58%
    ₹1500 Cashback

एथलेटिक्स

भारत के एथलीटों ने जकार्ता एशियाड में कुल पदक के मामले में 1951 के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। सात स्वर्ण, दस रजत और दो कांस्य पदक साथ उन्होंने 19 पदक झटके। इस स्पर्धा में नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), जीनसन जॉनसन (1500 मी), मनजीत सिंह (800 मी) और स्वप्ना बर्मन जैसे खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। खास कर हेप्टाथलन में बर्मन और भाला फेंक में नीरज का सोना भारतीय दल के लिए बड़ी उपलब्धि है। पहली बार भारत ने इनमें सोना जीता। वहीं 1500 मीटर में 20 साल बाद स्वर्ण पदक आया। मनजीत ने 36 साल का सूखा 800 मीटर दौड़ में खत्म किया तो त्रिकूद में भारत ने 48 साल बाद पीला तमगा जीता।

निशानेबाजी

इस स्पर्धा में युवाओं का बोलबाला रहा। बस दो स्वर्ण पदक आने के बाद भी निशानेबाजी का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है। इसका कारण है कि भारत ने जो नौ पदक जीते, उनमें से तीन युवा हैं। 16 साल के सौरभ चौधरी ने सोना जीतकर इतिहास रच दिया। राही सरनोबत ने भी स्वर्ण पदक जीतने वालीं पहली भारतीय महिला बनीं। राही ने रेकॉर्ड भी बनाया। 15 साल के शार्दूल विहान का प्रदर्शन भी अद्भुत रहा।

मुक्केबाजी

मुक्केबाजों ने निराश किया। अमित ने गोल्डन पंच लगाकर इज्जत बचा ली, नहीं तो दस में से आठ मुक्केबाज यहां फ्लॉप साबित हुए। विकास कृष्ण को कांस्य पदक मिला। इस स्पर्धा में भारत 2014 खेलों के पदकों की संख्या को पार नहीं पाया।

हॉकी

खिताब के प्रबल दावेदारों में शामिल भारत को मलेशिया के हाथों हार से कांस्य पदक ही मिला। अपने लीग चरण में 80 गोल दागकर रेकॉर्ड कायम करने वाली टीम रणनीतिविहीन दिखी। इस प्रदर्शन ने कई सीनियर खिलाड़ियों के साथ कोच हरेंद्र सिंह को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। महिला टीम से भी सोने की उम्मीद थी लेकिन उसे रजत मिला। हालांकि यह उसका 20 सालों में सबसे बेहतर प्रदर्शन है।

कबड्डी

कबड्डी की हार ने दिल ही तोड़ दिया। भारत को ईरान ने पटखनी दे दी। पुरुष कबड्डी टीम को पहले कोरिया और फिर ईरान के हाथों हार ने कांसे तक ला दिया। संघ में छिड़े घमासान ने इस खेल को भी बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है।

बैडमिंटन

महिला शटलरों का जलवा जारी रहा। 1982 में भारत ने पांच पदक जीते थे लेकिन वे सभी कांस्य थे। इस बार पीवी सिंधू ने रजत जीतकर इतिहास रच दिया। हालांकि वह एक बार फिर फाइनल के तिलिस्म को नहीं तोड़ पाईं। साइना नेहवाल को भी कांस्य पदक मिला। महिलाओं ने पहली बार एशियाड में पदक जीते। वहीं पुरुष शटलरों ने निराश किया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App