चार साल में एक बार आयोजित होने वाले ‘एशियन गेम्स’ की शुरुआत साल 1951 में हुई थी। एशियन गेम्स का पहला संस्करण भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुआ था। भारत ने अब तक दो बार (साल 1951 और 1982) में इन खेलों की मेजबानी की है।

एशियन गेम्स में सर्वाधिक मेडल चीन के नाम हैं। चीन ने 1674 गोल्ड, 1105 सिल्वर और 791 ब्रॉन्ज के सात कुल 3570 मेडल हासिल किये हैं। सिर्फ तीन देश अब तक 1000 मेडल के आंकड़े को छू सके हैं। चीन के बाद जापान (3200 से ज्यादा मेडल) और साउथ कोरिया (2400 से ज्यादा मेडल) हैं।

भारत साल 1951 में आयोजित एशियन गेम्स में दूसरे पायदान पर रहा था। भारत ने तब कुल 51 मेडल जीते थे। इनमें 15 गोल्ड, 16 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज मेडल थे। साल 2023 में आयोजित एशियन गेम्स में भारत ने पहली बार कुल मेडल के मामले में शतक लगाया। पिछली बार भारत की झोली में 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 41 ब्रॉन्ज मेडल के साथ कुल 107 पदक आये थे।

भात ने 6 बार पार किया 50 का आंकड़ा

भारत ने साल 1951 के बाद 6 बार कुल पदकों के मामले में 50 का आंकड़ा पार किया है। भारत ने साल 1982 में 57 मेडल, साल 2006 में 53 मेडल, साल 2010 में 65 मेडल, साल 2014 में 57 मेडल, साल 2018 में 70 मेडल और साल 2023 में 107 मेडल जीते थे।

भारत ने एशियन गेम्स में जीते 779 मेडल

भारत ने एशियन गेम्स के इतिहास में अब तक कुल 779 मेडल जीते हैं। इसमें सर्वाधिक मेडल एथलेटिक्स से आए, जिसमें देश के नाम 85 गोल्ड, 102 सिल्वर और 96 ब्रॉन्ज मेडल हैं। निशानेबाजी में भारत ने अब तक 16 गोल्ड, 30 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज के साथ कुल 80 मेडल हासिल किये हैं।

भारत ने कुश्ती में कुल 65 मेडल (11 गोल्ड, 15 सिल्वर और 39 ब्रॉन्ज) जीते हैं। इसके अलावा, मुक्केबाजी में भी भारत ने पदकों का अर्धशतक लगाते हुए 9 गोल्ड, 17 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज के साथ कुल 62 मेडल जीते हैं।

भारत ने टेनिस में कुल 34 मेडल (10 गोल्ड, 7 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज) अपने नाम किये, जबकि रोइंग (नौकायन) में दो स्वर्ण, सात रजत और 19 कांस्य के साथ देश की झोली में कुल 28 पदक आये हैं। सेलिंग (पाल-नौकायन) में 23 पदक (एक स्वर्ण, आठ रजत और 14 कांस्य) भारत ने जीते हैं।

‘मैंने बेटे का बचपन छीन लिया’, एशियन गेम्स से पहले सीमा कालीरमना ने बताया मां और एथलीट बनने का संघर्ष

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकीं डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमना एशियन गेम्स 2026 की तैयारी में जुटी हैं। जनसत्ता से बातचीत में उन्होंने बताया कि बेटे से दूर रहना उनके लिए कितना मुश्किल है। कई बार उन्हें क्यों लगता है कि उन्होंने अपने बेटे का बचपन छीन लिया। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)