भारतीय एथलेटिक्स को एक नया सितारा मिल गया है। महज 18 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की रहने वालीं अनुष्का यादव ने हैमर थ्रो में इतिहास रचते हुए सीनियर महिला राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इंजरी से शानदार वापसी के बाद अनुष्का यादव ने अंतर राज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में 67.02 मीटर का जबरदस्त थ्रो कर न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि एशियन गेम्स के लिए भी क्वालिफाई कर लिया।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ अनुष्का भारत की सबसे युवा राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर बन गई हैं। वह अब जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाली एथलीट बन गई हैं। अनुष्का ने 2017 में सरिता सिंह के बनाए 65.25 मीटर के नौ साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा।
‘हैमर थ्रो को भी मिले जैवलिन जैसी पहचान’
रिकॉर्ड बनाने वाली अनुष्का की सबसे बड़ी इच्छा सिर्फ पदक जीतना नहीं, बल्कि भारत में हैमर थ्रो को लोकप्रिय बनाना है। उनका मानना है कि देश में जैवलिन थ्रो को जिस तरह पहचान मिली है, वैसी ही पहचान हैमर थ्रो को भी मिलनी चाहिए। अनुष्का यादव ने कहा, ‘‘भारत में बहुत कम लोग हैमर थ्रो के बारे में जानते हैं, लेकिन हर कोई जैवलिन थ्रो जानता है। मैं चाहती हूं कि लोग हैमर थ्रो को भी उसी तरह पहचानें।’’ भारत में जैवलिन की लोकप्रियता के पीछे ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा की बड़ी भूमिका रही है। अब अनुष्का यादव चाहती हैं कि हैमर थ्रो को भी देश में नई पहचान मिले।
एशियन गेम्स में गोल्ड और 70 मीटर का लक्ष्य
अनुष्का यादव अपने लक्ष्य को लेकर बिल्कुल स्पष्ट हैं। उन्होंने साफ कहा कि वह आगामी एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना चाहती हैं। साथ ही उनका सपना जल्द से जल्द 70 मीटर के आंकड़े को पार करना है। अनुष्का यादव ने कहा, ‘‘मैं एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना चाहती हूं और उम्मीद है कि जल्द ही 70 मीटर का आंकड़ा पार करूंगी।’’ एशियन गेम्स क्वालिफिकेशन के लिए तय 61.72 मीटर के मानक को अनुष्का यादव ने आसानी से पार कर लिया। इस सीजन एशिया की महिला हैमर थ्रो रैंकिंग में वह 11वें स्थान पर हैं।
चोट ने रोकी थी रफ्तार, लेकिन नहीं टूटा हौसला
अनुष्का यादव की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ महीने पहले तक उनका सीजन मुश्किल में नजर आ रहा था। मार्च में अपने गांव में खेत पर ट्रैक्टर चलाने के दौरान उनके घुटने में लिगामेंट इंजरी हो गई थी। अनुष्का यादव ने बताया कि वह पिता और भाई के साथ खेत में काम कर रही थीं, तभी चोटिल हो गईं। हालांकि, रिकवरी उम्मीद से जल्दी हुई, लेकिन चोट के कारण उनका सीजन देर से शुरू हुआ। इसके बावजूद उन्होंने वापसी करते हुए पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में 4 मीटर से ज्यादा का सुधार किया। अनुष्का यादव का पिछला सर्वश्रेष्ठ 62.89 मीटर था, जो उन्होंने पिछले साल नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीतते समय हासिल किया था।
पिता ने बदली राह, रनिंग से पहुंचाया हैमर थ्रो तक
दिलचस्प बात यह है कि अनुष्का की शुरुआत हैमर थ्रो से नहीं हुई थी। वह पहले 100 मीटर दौड़ में रुचि रखती थीं, लेकिन पिता सुशील यादव ने उन्हें हैमर थ्रो अपनाने की सलाह दी। सुशील यादव खुद भी पूर्व हैमर थ्रोअर रहे हैं। वही अनुष्का यादव के शुरुआती कोच हैं। सुशील यादव ने 12 साल की उम्र में पहली बार बेटी के हाथ में हैमर थमाया था। अनुष्का यादव बताती हैं कि उनके पिता ने ही उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आज वह पिता के अलावा चिराग यादव और गगन यादव से भी ट्रेनिंग लेती हैं।
अब भारत को अनुष्का से बड़ी उम्मीदें
भारत में हैमर थ्रो का इतिहास बहुत लंबा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस इवेंट को अभी वह पहचान नहीं मिली है जो जैवलिन को मिली है। एशियन गेम्स में महिला वर्ग में भारत की एकमात्र पदक विजेता मंजू बाला रही हैं। मंजू बाला ने 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था। अब अनुष्का यादव उस पदक का रंग बदलने की कोशिश में हैं।
“हमें ऐसी उपलब्धियां और चाहिए”, चीन को उसके घर में मात देने वाली भारतीय बेटियों को आनंद महिंद्रा का सलाम
भारतीय महिला रिले टीम ने चीन में चीन को हराते हुए इतिहास रचा और एशियाई रिले चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल अपने नाम किया। टीम की इस ऐतिहासिक जीत पर आनंद महिंद्रा ने बेहतरीन पोस्ट करते हुए बधाई संदेश दिया है। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
