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इस बार विश्व कप का फॉरमेट अलग, भारत और इंग्लैंड प्रबल दावेदार

भारत की तारीफ करते हुए ज़हीर खान ने कहा "इस बार विश्व कप का फॉरमेट अलग है। प्रत्येक टीम को एक-दूसरे से मैच खेलना है और जिस तरह की भारतीय टीम की ताकत है, जिस निरंतरता के साथ हर एक खिलाड़ी अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है और इस टीम ने सफेद गेंद से जिस निरंतरता के साथ प्रदर्शन किया है, उससे मुझे लगता है कि टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचने में कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी।"

Author Published on: February 20, 2019 6:24 PM
जहीर खान ने भारत और इंग्लैंड को बताया विश्व कप जीतने का प्रबल दावेदार June 10, 2009. AP/PTI

भारत के सबसे सफल बाएं हाथ के गेंदबाज जहीर खान का मानना है कि इंग्लैंड और वेल्स की संयुक्त मेजबानी में इसी साल होने वाले आईसीसी विश्व कप (50 ओवर) में मेजबान इंग्लैंड के साथ-साथ भारत भी खिताब का प्रबल दावेदार है। जहीर ने हालिया दौर में सीमित ओवरों में भारत के निरंतर अच्छे प्रदर्शन की तारीफ की और इसी के दम पर उसे तीसरे विश्वकप खिताब की रेस में खड़ा किया है। 2011 विश्व विजेता टीम का अहम हिस्सा रहे जहीर ने हालांकि भारतीय टीम को मेजबान इंग्लैंड से सतर्क रहने की बात कही।

जहीर बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में फेरीट क्रिकेट बैश (एफसीबी) लीग के कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे, जहां उन्हें लीग का मेंटॉर नियुक्त किया है। जहीर ने कहा, “इस बार विश्व कप का फॉरमेट अलग है। प्रत्येक टीम को एक-दूसरे से मैच खेलना है और जिस तरह की भारतीय टीम की ताकत है, जिस निरंतरता के साथ हर एक खिलाड़ी अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है और इस टीम ने सफेद गेंद से जिस निरंतरता के साथ प्रदर्शन किया है, उससे मुझे लगता है कि टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचने में कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी।”

विश्व कप-2011 में नौ मैचों में 21 विकेट लेकर भारत को विश्व कप चैम्पियन बनाने वाले जहीर ने कहा कि मौजूदा समय में दोनों टीमें शानदार प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि इंग्लैंड को अपनी घरेलू परिस्थितियों का ज्यादा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इंग्लैंड अपने घर में खेलगा। इसलिए मेजबान होने के नाते उसे घरेलू परिस्थितियों का फायदा भी मिलेगा। इंग्लैंड ने हाल के दिनों में काफी अच्छा प्रदर्शन भी किया है। भारत और इंग्लैंड फाइनल तक पहुंचने का माद्दा रखते हैं।” भारत हाल ही में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में सीरीज जीतकर लौटा है और अब उसे 24 फरवरी से सीमित ओवरों की सीरीज के लिए आस्ट्रेलिया की मेजबानी करनी है। इंग्लैंड में मई में शुरू होने वाले विश्व कप से पहले भारत की यह सीमित ओवरों की आखिरी सीरीज होगी। इस लिहाज से इस सीरीज के काफी मायने हैं।

विश्व कप के लिए भारतीय टीम का चयन काफी हद तक इस सीरीज पर निर्भर करता है। भारत के लिए 200 वनडे मैचों में 282 विकेट लेने वाले जहीर ने कहा, “मुझे लगता है कि जो टीम इस सीरीज में उतरने जा रही है, वही टीम विश्व कप के लिए भी इंग्लैंड जाएगी। विश्व कप को लेकर अब हमें ज्यादा माथा-पच्ची करने की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके लिए हमारी टीम तैयार है।” जहीर ने भारत की मौजूदा तेज गेंदबाजी खेप की तारीफ करते हुए कहा, “जितने भी तेज गेंदबाज उभरकर आ रहे हैं, चाहे वह खलील अहमद, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर या फिर सिद्धार्थ कौल हों। इन गेंदबाजों का आना, भारत के लिए काफी अच्छी खबर है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मेरा मानना है कि आपकी बेंच जितनी ज्यादा मजबूत होगी, टीम भी उतनी ही मजबूत होगी। इन गेंदबाजों के बीच में जितनी ज्यादा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी, क्रिकेट का स्तर भी उतना ही ज्यादा ऊपर उठेगा।”

आस्ट्रेलिया सीरीज के बाद आईपीएल का आगाज होगा और फिर टीम विश्व कप खेलने जाएगी। ऐसे में खिलाड़ियों पर पड़ने वाले वर्कलोड को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। खिलाड़ियों पर पड़ने वाले वर्कलोड पर जहीर ने कहा कि इसका ख्याल खिलाड़ियों को खुद रखना होगा। 40 साल के जहीर ने कहा, “मुझे लगता है कि पिछले दो साल से वर्कलोड का काफी अच्छे से मैनेजमेंट हो रहा है। आप देखते हैं कि कभी किसी खिलाड़ी को आराम दिया जा रहा है तो कभी कोई खिलाड़ी चोट के कारण बाहर हो जाते हैं।” जहीर खिलाड़ियों पर पड़ने वाले वर्कलोड को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “खिलाड़ियों को अगर वर्कलोड मैनेज करना है तो उसके अलग तरीके हैं। वे अभ्यास में भी इसे मैनेज कर सकते हैं। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि एक खिलाड़ी के लिए इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता कि वह ज्यादा से ज्यादा मैच खेले।”

यह पूछे जाने पर कि विश्व कप को देखते हुए क्या वर्कलोड का असर खिलाड़ियों पर पड़ सकता है, पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा, “खिलाड़ियों को ज्यादा खतरा नहीं लेना चाहिए। खिलाड़ियों की खुद की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने वर्कलोड को मैनेज करें। इसके लिए उनके पास फिजियो, ट्रेनर और पूरा सिस्टम मौजूूद हैं। मैं यह नहीं मानता कि अगर आप ज्यादा से ज्यादा मैच खेलोगे तो चोटिल हो जाओगे। चोट पर किसी का नियंत्रण नहीं होता है।”

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