भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2026 के मुकाबले पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस मैच को लेकर पाकिस्तान की सरकार तरफ से खेलने से इनकार किया गया है। वहीं अगर ऐसा हुआ तो इससे आईसीसी, ब्रॉडकास्टर्स समेत पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। भारत-पाकिस्तान के वर्ल्ड कप मैच की कुल अनुमानित कीमत 4500 करोड़ बताई जा रही है।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड होगा कंगाल?

इस मुकाबले के नहीं होने से सबसे बड़ा नुकसान खुद पाकिस्तान को ही उठाना पड़ सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को सालाना आईसीसी के रेवेन्यू का करीब 5.75 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। यह कीमत तकरीबन 314 करोड़ रुपए होती है। अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ विश्व कप का मुकाबला नहीं खेलता है तो उसे इस रकम से सीधे-सीधे हाथ धोना पड़ सकता है।

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वहीं पाकिस्तान सरकार के फैसले पर अगर पीसीबी अड़ा रहा तो उसे भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच के नुकसान भी भरपाई भी करनी पड़ सकती है। यानी आईसीसी पीसीबी के रेवेन्यू में कटौती करके उससे इसकी भरपाई करने को कहे सकता है। आईसीसी ने अपनी रिलीज में साफ किया है पीसीबी या तो इस मामले को सुलझा ले या फिर इसके दूरदर्शित दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं। पाकिस्तान का यह कदम पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को कंगाल कर सकता है।

भारत-पाकिस्तान मुकाबले की कमाई का पूरा गणित

अब अगर भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले वर्ल्ड कप मैच की कुल कमाई की बात करें तो इसे अनुमानित तौर पर 4500 करोड़ यानी 500 मिलियन यूएस डॉलर बताया गया है। इसमें करीब 300 करोड़ की कमाई ऐड यानी विज्ञापनों से होती है। इस मैच के बीच एक 10-15 सेकंड का ऐड स्लॉट 25 से 40 लाख रुपए का होता है।

इसके अलावा दोनों बोर्ड को भी यह मैच नहीं होने पर 200-200 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है, इस नुकसान की भरपाई कर लेगा, लेकिन पाकिस्तान के लिए ऐसा करना मुश्किल हो सकता है। साथ ही टिकेट प्रणाली, स्पॉन्सर आदि चीजों से भी सैकड़ों करोड़ का नुकसान हो सकता है।

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यानी फाइनेंशियल मुद्दे पर यह पाकिस्तान का खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा काम है। पाकिस्तान की सरकार के मंत्री और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड प्रमुख मोहसिन नकवी की इस कदम के लिए देश में कूटनीतिक तौर पर भले वाहवाही हो जाए लेकिन अंदरूनी तौर पर यह बोर्ड को कंगाल करने और देश के क्रिकेट ईको सिस्टम को एक बड़ा नुकसान पहुंचाने वाला कदम है।