भारतीय क्रिकेट टीम 2022 के टी20 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल में पहुंची थी, लेकिन उसका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। इंग्लैंड से 10 विकेट की शर्मनाक हार झेलकर टूर्नामेंट से बाहर हुई थी। इसके बाद रोहित शर्मा की अगुआई वाली टीम ने रणनीति बदली। उसने आक्रामक क्रिकेट खेलना शुरू किया। इस रणनीति से भारतीय टीम 2024 में टी20 वर्ल्ड कप जीती। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने संन्यास लिया। कोच राहुल द्रविड़ की भी सुखद विदाई हुई।
सूर्यकुमार यादव नए कप्तान बने और कोच की भूमिका में गौतम गंभीर दिखे। अभिषेक शर्मा और इशान किशन जैसे खिलाड़ियों की एंट्री हुई। भारतीय टीम को आक्रमक क्रिकेट खेलने से सफलता मिलती रही। टीम 2026 में खिताब की रक्षा करने में सफल रही। इसके बाद फिर भारतीय टीम में बदलाव हुए। लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ कप्तान सूर्यकुमार यादव को बाहर किया गया।
भारतीय टीम संकट में
श्रेयस अय्यर की 3 साल बाद टीम में बतौर कप्तान एंट्री हुई। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में अपनी बल्लेबाजी से सनसनी मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी को भी मौका मिला, लेकिन भारतीय टीम संकट में दिखाई दे रही है। आयरलैंड जैसी टीम ने उसका क्लीन स्वीप कर दिया। इंग्लैंड दौरे पर वह 4 में से 3 मैच हार गई है। संजू सैमसन प्लेइंग 11 से बाहर हो गए हैं और उसे जीत का अभी भी इंतजार है।
आईपीएल की तरह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फर्क
बीते दो साल में विस्फोटक क्रिकेट से टी20 क्रिकेट में जिन खिलाड़ियों का डंका बजा वह इंग्लैंड में संघर्ष करते दिख रहे हैं। बल्लेबाज हों या गेंदबाज बेबस ही नजर आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण आईपीएल है। लीग के 2026 सत्र में बल्लेबाजों का बर्चस्व देखने को मिला। छोटी बाउंड्री और फ्लैट विकेट पर 250 रनों का लक्ष्य हासिल करना भी संभव दिख रहा था। हर गेंद पर बल्लेबाज बड़ा शॉट खेलने का प्रयास कर रहा था और उसे सफलता भी मिल रही थी। गेंदबाज बचने की कोशिश में धीमी गेंद, कटर और वाइड गेंद का सहारा ले रहे थे।
आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फर्क
आयरलैंड और इंग्लैंड में भी भारतीय खिलाड़ी इसी रणनीति के साथ खेलने की कोशिश में दिखे। बल्लेबाज हर गेंद पर बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में आउट हो रहे हैं। वहीं गेंदबाज विविधता से गेंदबाजी करने का प्रयास कर रहे हैं। आईपीएल में विकेट का मोल नहीं होता क्योंकि इम्पैक्ट प्लेयर नियम की वजह से टीम के पास अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाने का मौका होता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में परिस्थितिओं का सम्मान करना जरूरी है। ऐसा करने पर खिलाड़ी को सफलता मिलेगी। नहीं करने पर दुर्दशा होती है।
विविधता के प्रायस में प्रिंस यादव ने दिया चौका
इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर इसके तमाम उदाहरण देखने को मिले हैं। आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के कारण भारतीय टीम में जगह पाने वाले प्रिंस यादव को आयरलैंड में डेब्यू का मौका मिला। इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में प्रिंस यादव को खेलने का मौका मिला। उन्होंने पहली ही गेंद पर बेहतरीन यॉर्कर से जोस बटलर को चलता किया। पूरे ओवर में उन्होंने 136 से ज्यादा रफ्तार से गेंद की और ज्यादा रन नहीं दिए। अगले ओवर में उन्होंने धीमी गेंद का प्रयास किया और हैरी ब्रूक ने चौका जड़ दिया। अगली गेंद पर उन्होंने रफ्तार बढ़ाई और ब्रूक पवेलियन लौट गए। गेंदबाज आईपीएल में पड़ी मार के कारण विविधता से गेंद करने की कोशिश करते हैं।
भारत-इंग्लैंड के खिलाड़ियों में फर्क
दूसरी ओर जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने पेस और शॉर्ट बॉल से लगातार भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया है। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 में वैभव सूर्यवंशी ने डेब्यू किया। उनके साथ ओपनिंग करने उतरे अभिषेक शर्मा ने स्ट्राइक ली। जोफ्रा आर्चर को उन्होंने कई बार बड़ा शॉट लगाने का प्रयास किया, लेकिन वह तेज बल्ला चला रहे थे और गेंद विकेटकीपर जोस बटलर के पास जा रही थी। ऐसा लगा रहा था कि बटलर को जोफ्रा कैच प्रैक्टिस करा रहे थे। इंग्लैंड की बल्लेबाजी की बात करें तो फिल साल्ट ने पहला ओवर मेडन खेला। शुरुआत में वह पिच पर टिके रहने की कोशिश कर रहे थे। अंत में वह 44 गेंद पर 70 रन बनाकर आउट हुए।
भारत के सामने ताज बचाने की चुनौती
भारत-इंग्लैंड के बीच आखिरी टी20 मैच शनिवार को साउथैप्टन में खेला जाएगा। भारतीय टीम को टी20 रैंकिंग में शीर्ष पर बने रहने के लिए यह मैच जीतना होगा। पूरी खबर पढ़ें।
