कभी-कभी क्रिकेट में जीत के लिए बल्ले से ज्यादा हौसले की जरूरत होती है। मोहाली में भी उस दिन कुछ ऐसा ही हुआ था। भारत के सामने 216 रन का लक्ष्य था, लेकिन 124 रन तक पहुंचते-पहुंचते भारतीय टेस्ट टीम के आठ विकेट गिर चुके थे। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, सुरेश रैना, एमएस धोनी कुल मिलाकर 70 रन ही बना पाए थे। गौतम गंभीर और सुरेश रैना तो खाता भी नहीं खोल पाए थे।

ऑस्ट्रेलिया की जीत तय लग रही थी। क्रीज पर वीवीएस लक्ष्मण थे और पैर में परेशानी के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। हर कदम पर दर्द था और लक्ष्य अब भी 92 रन दूर था। ऐसे वक्त में शायद किसी को भी भारत की जीत की उम्मीद नहीं थी, लेकिन वीवीएस लक्ष्मण को खुद पर भरोसा था। वीवीएस लक्ष्मण ने 10वें नंबर पर उतरे इशांत शर्मा के साथ मिलकर ऐसी साझेदारी शुरू की, जिसने मैच का रुख ही बदल दिया।

एक तरफ लंगड़ाते हुए वीवीएस लक्ष्मण ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का सामना कर रहे थे, वहीं दूसरे तरफ इशांत बिना घबराए उनका साथ निभा रहे थे। दोनों ने मिलकर 81 रन की साझेदारी की और ऑस्ट्रेलिया के जबड़े से जीत छीनकर भारत की झोली में डाल दी। मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई शायद यही सोच रहे होंगे कि भले ही 10 भारतीयों को आउट करो, लेकिन जब तक वीवीएस लक्ष्मण को नहीं आउट करते तब तक जीत पक्की नहीं।

यह कहानी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले की है, जो एक से पांच अक्टूबर 2010 के बीच मोहाली में खेला गया था। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। रिकी पोंटिंग की अगुआई वाली तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम की पहली पारी 151.4 ओवर में 428 रन पर ऑलआउट हुई।

ओपनर शेन वाटसन ने शतक लगाया। रिकी पोंटिंग ने 71 और विकेटकीपर टिम पेन ने 92 रन की पारियां खेलीं। भारत ने भी बढ़िया जवाब दिया। एमएस धोनी की अगुआई वाली तत्कालीन भारतीय टेस्ट टीम 108.1 ओवर में 405 रन बनाकर ऑलआउट हुई। सचिन तेंदुलकर 98, सुरेश रैना ने 86, राहुल द्रविड़ ने 77 और वीरेंद्र सहवाग ने 59 रन का योगदान दिया। ऑस्ट्रेलिया को 23 रन की मामूली बढ़त हासिल हुई।

दूसरी पारी में उसकी शुरुआत बढ़िया रही। शेन वाटसन ने अर्धशतक (56 रन) लगाया। साइमन काटिच ने 37 रन बनाए। हालांकि, दोनों के आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलियाई पारी लड़खड़ा गई। माइकल हसी और मार्कस नॉर्थ ही दहाई का आंकड़ा छू पाए। इस तरह ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी 60.5 ओवर में 192 रन पर ऑलआउट हो गई।

भारत की ओर से जहीर खान ने 43 और इशांत शर्मा ने 34 रन देकर 3-3 विकेट लिए। हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा ने क्रमशः 40 और 59 रन देकर 2-2 विकेट लिए। जहीर खान ने पहली पारी में 94 रन देकर पांच और हरभजन सिंह ने 114 रन देकर तीन विकेट लिए थे।

216 रन का लक्ष्य और लड़खड़ाती भारतीय पारी

इस तरह भारत को जीत के लिए 216 रन का लक्ष्य मिला। लक्ष्य बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन भारतीय पारी की शुरुआत बेहद खराब रही। गौतम गंभीर बिना खाता खोले आउट हुए। वीरेंद्र सहवाग 17 और राहुल द्रविड़ 13 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। सुरेश रैना भी खाता नहीं खोल पाए।

सचिन तेंदुलकर ने 38 रन बनाए, लेकिन वह भी ज्यादा देर नहीं टिक पाए। एक-एक करके विकेट गिरते गए और 33.4 ओवर में भारत का स्कोर आठ विकेट पर 124 रन हो गया। यहीं से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी कल्पना शायद ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भी नहीं की रही होगी।

पीठ दर्द से जूझ रहे लक्ष्मण का चट्टान जैसा हौसला

लक्ष्मण उस समय क्रीज पर थे। पीठ दर्द से जूझ रहे वीवीएस लक्ष्मण मुश्किल से चल पा रहे थे, लेकिन उन्हें न सिर्फ बल्लेबाजी करनी थी, बल्कि भारत को हार से बचाने के लिए लंबी पारी भी खेलनी थी। दूसरे छोर पर इशांत शर्मा आए। वह 10वें नंबर के बल्लेबाज थे और उनके बल्ले से ऐसे मौके पर बड़ी पारी की उम्मीद करना आसान नहीं था।

इशांत शर्मा ने भी नहीं छोड़ा वीवीएस लक्ष्मण का साथ

वीवीएस लक्ष्मण और इशांत शर्मा दोनों ने मिलकर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का सामना किया। लक्ष्मण ने अपनी मुश्किलों के बावजूद रन बनाने जारी रखे। इशांत ने भी धैर्य दिखाया। देखते ही देखते दोनों के बीच साझेदारी 50 रन के पार पहुंच गई और फिर 81 रन तक जा पहुंची।

ऑस्ट्रेलिया के लिए यह साझेदारी किसी झटके से कम नहीं थी। कुछ देर पहले तक जिस टीम की जीत लगभग तय मानी जा रही थी, उसे अब विकेट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। इशांत शर्मा ने इस साझेदारी में 92 गेंदों का सामना किया और 31 रन बनाए।

इशांत शर्मा की पारी भले ही बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन उस परिस्थिति में उसका महत्व बेहद बड़ा था। इशांत शर्मा ने वीवीएस लक्ष्मण के साथ मिलकर भारत को 124 रन से आगे बढ़ाकर जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया। इशांत 55.2 ओवर में 205 रन के स्कोर पर नौवें विकेट के रूप में आउट हुए। अब भारत को जीत के लिए सिर्फ 11 रन चाहिए थे।

फिर लिखी गई जीत की कहानी

इशांत के पवेलियन लौटने के बाद ड्रेसिंग रूम में फिर तनाव बढ़ गया, क्योंकि भारत के पास सिर्फ एक विकेट बचा था, लेकिन वीवीएस लक्ष्मण अब भी क्रीज पर थे। आखिरी विकेट के रूप में प्रज्ञान ओझा मैदान पर आए। ऑस्ट्रेलिया के पास भारत को रोकने का आखिरी मौका था। दूसरी तरफ वीवीएस लक्ष्मण जानते थे कि उन्हें बस 11 रन और बनाने हैं।

वीवीएस लक्ष्मण और प्रज्ञान ओझा ने कोई गलती नहीं की। दोनों ने जरूरी रन जुटाए और भारत ने 58.4 ओवर में 216/9 का स्कोर बनाकर मैच जीत लिया। वीवीएस लक्ष्मण 79 गेंद में 73 रन बनाकर नाबाद रहे। उनकी पारी में आठ चौके शामिल थे। प्रज्ञान ओझा ने 10 गेंद में नाबाद पांच रन बनाए।

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