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दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर का खुलासा- श्रीसंत को सिर में मारना चाहता था

यह वाकया साल 2006 का था। भारत तब जोहानेसबर्ग में प्रोटियाज टीम के खिलाफ अपना तीसरा और आखिरी मैच खेलने वाला था। 'क्रिकबज' से हुई बातचीत में 40 साल के द.अफ्रीकी खिलाड़ी ने बताया, "मैंने जब उसे (श्रीसंत) आते हुए देखा था, तब मेरे दिमाग में सबसे पहला ख्याल आया था कि मैं उसके सिर पर बल्ला मार दूं।"

पूर्व प्रोटियाज गेंदबाज आंद्रे नेल ने हाल ही में क्रिकबज को इंटरव्यू में श्रीसंत से जुड़ा यह खुलासा किया है। (फोटोःएपी)

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर आंद्रे नेल ने भारतीय टीम के पूर्व गेंदबाज श्रीसंत को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में नेल ने कहा है कि उन्होंने एक बार श्रीसंत के सिर पर बल्ले से वार करने के बारे में सोचा था। यह वाकया साल 2006 का था। भारत तब जोहानेसबर्ग में प्रोटियाज टीम के खिलाफ अपना तीसरा और आखिरी मैच खेलने वाला था। ‘क्रिकबज’ से हुई बातचीत में 40 साल के द.अफ्रीकी खिलाड़ी ने बताया, “मैंने जब उसे (श्रीसंत) आते हुए देखा था, तब मेरे दिमाग में सबसे पहला ख्याल आया था कि मैं उसके सिर पर बल्ला मार दूं। ईमानदारी से बताऊं, तब मेरे दिमाग में यही बात चल रही थी। चाहे कोई भी बल्लेबाजी कर रहा हो, मुझे तब इस बात से कोई फर्क भी नहीं पड़ने वाला था।” टीम इंडिया ने इससे पहले हुए टेस्ट मैच की पहली पारी में 249 रन बनाए थे, जिसके बाद प्रोटियाज टीम महज 84 रनों पर ढेर हो गई थी।

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श्रीसंत ने उस मैच में पांच विकेट अपनी झोली में गिराए थे। उन्होंने तब 40 रन देकर पांच दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों को पवेलियन का रास्ता दिखाया था, जो उनके करियर की बेहतरीन प्रदर्शन में से एक है। दूसरी पारी में जब वह खेलने उतरे, तब भारत पहले ही 384 रनों की लीड ले चुका था।

नेल साल 2006 के आसपास मैदान पर विपक्षी खिलाड़ियों को अक्सर उकसाया करते थे। उन्होंने कबूला है कि उन्हें ऐसा करने में बेहद मजा आता था। (फोटोः एपी/फेसबुक)

इधर, नेल भी उस दौर में विपक्षी टीम के खिलाड़ियों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर सुर्खियों में रहते थे। प्रोटियाज खिलाड़ी आगे बोले, “सच बताऊं तो मुझे याद नहीं है कि मैंने क्या कहा था। वह उस मौके की बात थी।” हालांकि, बाद में श्रीसंत ने नेल की गेंद पर छक्का जड़ा था और वह इसके बाद ही पिच पर नाचने लगे थे। नेल ने उस वाकये को दोहराते हुए कहा, “मैं उसे कभी जश्न मनाते नहीं देखा था। आपकी गेंद पर जब कोई छक्का जड़ दे, तब आपके पास कोई विकल्प नहीं होता है, लेकिन वह बेहद मजेदार पल था। मैं हमेशा से मैदान पर लड़ने के मूड में रहता था। जब भी कोई मुझे पलट कर जवाब देता था तो मुझे मजा आता था।”

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