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इस भारतीय क्रिकेटर ने छीन ली थी पाकिस्तान के जबड़े से जीत, आज है गुमनामी के अंधेरे में…

गांगुली (124) को आकिब जावेद ने क्लीन बोल्ड किया और भारत की उम्मीदों को गहरा झटका लगा। इसके बाद मानो विकेटों का पतझड़ ही लग गया और...

Author Published on: November 13, 2017 8:53 AM
मैच के दौरान शॉट लगाते ऋषिकेष कानितकर।

भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले हाईवोल्टेज ही रहते हैं। 18 जनवरी 1998 को दोनों टीमों के बीच ढाका में खेले गए इंडिपेंडेंस कप के फाइनल मुकाबले को भला कौन भूल सकता है, जब ऋषिकेश कानितकर के चौके ने जीत की दहलीज पर खड़ी पाकिस्तान के जबड़े से जीत छीन ली थी लेकिन इस खिलाड़ी को आज शायद ही कोई जानता हो।

48-48 ओवरों के इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान की ओर से सईद अनवर ने 132 गेंदों में 140 रन की जबरदस्त पारी खेली। इसके बाद शाहिद अफरीदी 18 और आमेर सोहेल 14 रन बनाकर आउट हो गए। पाकिस्तान 66 रन पर 2 विकेट खो चुका था। ऐसे में एजाज अहमद ने अनवर का बखूबी साथ निभाते हुए 117 रन की पारी खेली और पड़ोसी मुल्क ने 7 विकेट खोकर 316 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। भारत की ओर से हरविंदर सिंह ने 3, जबकि जवागल श्रीनाथ और सचिन तेंदुलकर ने 1-1 विकेट झटके।

टारगेट का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत बेहतरीन रही और सौरभ गांगुली-सचिन तेंदुलकर (41) के बीच 71 रन की साझेदारी हुई। इसके बाद रॉबिन सिंह ने 83 गेंदों में 4 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 82 रन टीम के खाते में जोड़े। गांगुली एक छोर पर खूंटा गाड़े खड़े थे और भारत 3 विकेट खोकर लक्ष्य के करीब खड़ा था लेकिन यहां से विकेटों का पतन शुरू हो गया।

गांगुली (124) को आकिब जावेद ने क्लीन बोल्ड किया और भारत की उम्मीदों को गहरा झटका लगा। इसके बाद मानो विकेटों का पतझड़ ही लग गया। अगले 4 विकेट 32 रन पर गिर चुके थे। ऋषिकेष कानितकर-जवागल श्रीनाथ क्रीज पर मौजूद थे और भारत को जीत के लिए 2 गेंदों में 1 रन की जरूरत थी। मैच बेहद रोमांचक मोड़ पर था और तभी 47.5 ओवर में शकलेन मुश्ताक की गेंद पर ऋषिकेष कानितकर ने चौका जड़कर पाकिस्तान की मुट्ठी से जीत छीन ली। पूरा स्टेडियम में तिरंगे ही तिरंगे दिख रहे थे और साथी खिलाड़ी ऋषिकेष कानितकर को जमकर शाबाशी दे रहे थे।

बता दें कि ऋषिकेष कानितकर ने 2 टेस्ट मैचों में 74 रन बनाए थे। वहीं बात अगर 34 वनडे की करें तो उन्होंने एक अर्धशतक की मदद से 339 रन बनाने के अलावा 17 विकेट चटकाए। सन् 1997 में वनडे मैच के साथ अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले कानितकर ने अपना आखिरी मैच 2000 में खेला था।

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