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हॉकी के पितामह बलबीर सिंह सीनियर थे भारत के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर, कायम है ओलंपिक फाइनल में 5 गोल दागने का रिकॉर्ड

हेलसिंकी ओलंपिक (1952) फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ पांच गोल का उनका रिकार्ड आज भी कायम है। उन्हें 1957 में पद्मश्री से नवाजा गया था और यह सम्मान पाने वाले वह पहले खिलाड़ी थे।

नहीं रहे ओलंपिक हाकी स्वर्ण पदक विजेता गुरबख्श सिंह

तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बलबीर सिंह सीनियर ने सोमवार को 95 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। भारतीय खेल जगत ने उनके निधन पर शोक जताया है। खेल जगत ने बलबीर सिंह सीनियर को ऐसा दुर्लभ आदर्श बताया जिनकी उपलब्धियां कई पीढ़ियों तक खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी। ओलंपिक हॉकी स्वर्ण पदक विजेता गुरबख्श सिंह ने बलबीर सिंह सीनियर को अब तक सर्वश्रेष्ठ स्कोरर करार दिया। आइए जानते हैं उनके बारे में और भी बहुत कुछ।

टोक्यो ओलंपिक 1964 की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे 84 साल के गुरबख्श ने कहा, ‘हम सभी ने उन्हें (बलबीर सिंह सीनियर) भारत का सर्वश्रेष्ठ स्कोरर माना। उनके जमाने में भारतीय टीम विश्व में सर्वश्रेष्ठ थी। उन जैसी गोल करने की क्षमता बहुत कम लोगों के पास होती है।’

गुरबख्श ने याद किया कि भारत के 1948 ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद किस तरह से बलबीर सीनियर उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, ‘मैं 1948 में 13 साल का था। जब हमने हॉकी खेलनी शुरू की तो जो खिलाड़ी हमारे आदर्श हुआ करते थे उनमें बलबीर सीनियर, केशव दत्त, लेस्ली क्लाउडियस, केडी सिंह बाबू, ऊधम सिंह शामिल थे। हम उनके बारे में समाचार पत्रों में पढ़ते थे और उनकी क्लिपिंग रख लिया करते थे।’

गुरबख्श ने कहा, ‘ध्यानचंद संपूर्ण खिलाड़ी थे, बाबू गेंद पर नियंत्रण रखने में माहिर थे और बलबीर सीनियर को गोल करने की उनकी क्षमता के लिए याद किया जाता है। उनके बाद 1948 की टीम के खिलाड़ियों में से अब केवल केशव दत्त ही बचे हैं।’

हेलसिंकी ओलंपिक (1952) फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ पांच गोल का उनका रिकार्ड आज भी कायम है। उन्हें 1957 में पद्मश्री से नवाजा गया था। वह यह सम्मान पाने वाले वह पहले खिलाड़ी थे। बलबीर सीनियर ने लंदन (1948), हेलसिंकी (1952) और मेलबर्न (1956) ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे। वह 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के मैनेजर भी थे ।

पूर्व हॉकी कोच हरेंद्र सिंह ने उन्हें हॉकी का भीष्म पितामह बताया। हरेंद्र ने अपने सोशल अकाउंट पर लिखा, ‘उनकी खेल भावना और उपलब्धियों ने भारतीय खेलों के इतिहास के कई सुनहरे पन्ने लिखे। भारतीय हॉकी के लिए उनके योगदान का ऋण हम कभी नहीं चुका सकते।’

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने कहा, ‘बलबीर सर के निधन से दुखी हूं। हॉकी में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता। वह हम सभी के प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।’ भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने लिखा, ‘महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर के निधन से दुखी हूं। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं।’

वहीं पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने कहा, ‘भारतीय हॉकी के युगपुरूष बलबीर सिंह सीनियर का निधन। उनकी उपलब्धियां आपको हैरान कर देती हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।’

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