कभी ऐसा वक्त था जब बेल्जियम में हॉकी के पास अपना राष्ट्रीय स्टेडियम तक नहीं था। हॉकी को बेल्जियम में पहचान दिलाने के लिए खिलाड़ियों और प्रशंसकों को मुहिम चलानी पड़ती थी, लेकिन पिछले एक दशक में बेल्जियम हॉकी ने ऐसी छलांग लगाई कि अब घर में विश्व कप की मेजबानी कर रही है। नया बेल्फियस हॉकी एरिना इसी बदलाव का प्रतीक है।

कहना गलत नहीं होगा कि बेल्जियम में खिलाड़ी पहले आए, बड़ी जीतें पहले आईं और स्टेडियम अब आया है। बेल्जियम हॉकी टीम 2018 में विश्व कप और 2021 टोक्यो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता है। मौजूदा पीढ़ी के बेहतरीन ड्रैग-फ्लिकर में से एक अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स यह बात बहुत सहजता से कहते हैं।

अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स ने बताया, ‘‘जब हमने शुरुआत की थी तो घर में वर्ल्ड कप खेलने के बारे में सोचना भी मुश्किल था। हमारे पास हॉकी स्टेडियम या ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। अब यहां वर्ल्ड कप हो रहा है।’’ हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में पुरुषों का फाइनल बेल्जियम के नए नेशनल हॉकी स्टेडियम वावरे के बेल्फियस हॉकी एरीना में खेला जाएगा।

अप्रैल 2026 में ही हुआ स्टेडियम का उद्घाटन

इस हॉकी स्टेडियम का उद्घाटन अप्रैल में ही हुआ था यानी बेल्जियम के ओलंपिक चैंपियन बनने के पांच साल और वर्ल्ड कप जीतने के आठ साल बाद। तब बेल्जियम को वर्ल्ड कप या ओलंपिक में खेलते देखना कई खिलाड़ियों के लिए एक सपना हुआ करता था।

अनोखा है बेल्जियम की हॉकी का सफर

बेल्जियम की हॉकी का सफर कुछ ऐसा ही अनोखा और थोड़ा सोचने पर मजबूर करने वाला रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से पहले ही खिलाड़ी आ गए थे। पहचान मिलने से पहले ही नतीजे आ गए थे और जिस खेल को कभी बेल्जियम में टीवी पर दिखाए जाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था अब वही देश उसे दुनिया भर की स्क्रीन पर दिखाने की तैयारी कर रहा है।

जब दो बार FIH वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर चुने गए आर्थर वैन डोरेन बड़े हो रहे थे तो उन्हें नेशनल टीम अपने बहुत करीब नहीं लगती थी। बेल्जियम ओलंपिक और वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई तो कर लेता था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हॉकी में शीर्ष स्तर पर उसकी मौजूदगी बहुत कम थी। अपने देश को सबसे बड़े मंचों पर खेलते देखने का ख्याल भी बहुत दूर की कौड़ी लगता था।

हॉकी इंडिया लीग में वेदांता कलिंगा लांसर्स के लिए खेलने वाले वैन डोरेन कहते हैं, ‘‘जब हम बहुत छोटे थे तो यह चीज हमें अपने करीब नहीं लगती थी, लेकिन बचपन में आप नामुमकिन चीजों के सपने देखते हैं।’’ उन्होंने और उनकी पीढ़ी ने आखिरकार उस नामुमकिन चीज को हकीकत में बदल दिया, लेकिन उनके आस-पास का माहौल उस रफ्तार से नहीं बदल पाया।

ऑनलाइन याचिका

साल 2009 में बेल्जियम के हॉकी खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने देश के सरकारी टीवी चैनल VRT से हॉकी को ज्यादा कवरेज देने की मांग करते हुए ऑनलाइन याचिका शुरू की थी। बेल्जियम की राष्ट्रीय टीम बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी थी।

इसके बावजूद देश में हॉकी की चर्चा उसके खिलाड़ियों और क्लबों से बाहर बहुत कम थी। आज पीछे मुड़कर देखें तो यह समय बेहद अहम लगता है। उस दौर में हॉकी देखने वाले कई बच्चे अब वही खिलाड़ी हैं, जो इस महीने वावरे में विश्व कप के मैदान पर उतरेंगे।

बेल्जियम में हॉकी खेलने वालों की संख्या कम नहीं थी। फेडरेशन के मुताबिक, 2002 से 2012 के बीच यानी 10 वर्षों में खिलाड़ियों की संख्या दोगुनी होकर करीब 30 हजार हो गई थी, लेकिन पड़ोसी देशों, खासकर नीदरलैंड्स की तुलना में हॉकी को बेल्जियम में उतनी पहचान नहीं मिली थी। खेल के लिए जरूरी सुविधाएं और बुनियादी ढांचा भी उतना मजबूत नहीं था।

आर्थर वान डोरेन भी बचपन में टेनिस खेलते थे। वह बताते हैं कि जब उन्होंने हॉकी को चुनने का फैसला किया तो कई लोगों को यह अजीब लगा। उन्होंने कहा, ‘‘कई लोगों ने कहा कि मैं पागल हूं। टेनिस बेल्जियम में कहीं ज्यादा स्थापित और लोकप्रिय खेल था। इसके मुकाबले हॉकी की पहुंच कम थी और इसे करियर के तौर पर चुनना भी आसान नहीं माना जाता था।’’

आर्थर वान डोरेन को लगता था कि खेल के जरिये बच्चों के विकास और शिक्षा में मदद करने के मामले में बेल्जियम जर्मनी और नीदरलैंड्स से पीछे था। इसके बावजूद उन्होंने हॉकी को चुना। उन्हें टीम के साथ खेलना, साथियों के साथ रहना और सबसे बढ़कर हॉकी खेलना पसंद था।

बड़ी जीतों का दौर: फिर आने लगे नतीजे

बेल्जियम ने 2014 के विश्व कप में पांचवां स्थान हासिल किया। रियो ओलंपिक 2016 में टीम ने रजत पदक जीता। दो साल बाद 2018 में बेल्जियम की रेड लायंस टीम पहली बार विश्व चैंपियन बनी। तीन साल बाद 2021 के टोक्यो ओलंपिक में उसने स्वर्ण पदक जीत लिया। जिस देश की टीम कभी बड़े टूर्नामेंटों में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करती थी, वही अब विश्व हॉकी की मजबूत टीमों में शामिल हो चुकी थी।

इसके बावजूद बेल्जियम के पास अपना एक अच्छा राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम नहीं था। वावरे में यह कमी भी पूरी हो गई। पुराने जस्टिन पीटर्स स्टेडियम को दो हॉकी मैदानों वाले बेल्फियस हॉकी एरीना में बदल दिया गया। इसमें चार हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता है। विश्व कप के दौरान अस्थायी स्टैंड लगाए जाएंगे, जिससे इसकी क्षमता बढ़कर दस हजार हो जाएगी।

विश्व कप खत्म होने के बाद ये अस्थायी स्टैंड हटा दिए जाएंगे और स्टेडियम का इस्तेमाल बेल्जियम की राष्ट्रीय टीमों, युवा खिलाड़ियों और स्थानीय क्लबों के लिए किया जाएगा। यह स्टेडियम बेल्जियम हॉकी की पूरी कहानी का प्रतीक भी है। टीम ने कई वर्षों तक सीमित सुविधाओं के बावजूद बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। अब जाकर उसकी सुविधाएं भी उसकी सफलता के स्तर तक पहुंच रही हैं।

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World Cup Hockey 2026 Schedule, Venue, Indian Men’s And Women’s Team Match Details: भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें वर्ल्ड कप 2026 खेलने के लिए तैयार हैं। हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के मुकाबले बेल्जियम और नीदरलैंड्स में खेले जाएंगे। पुरुषों का टूर्नामेंट 15 अगस्त को शुरू होगा और 30 अगस्त को खत्म होगा। महिलाओं का टूर्नामेंट भी उसी दिन शुरू होगा लेकिन वह 29 अगस्त को खत्म होगा। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)