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वर्तमान टीम इंडिया के रवैए से नाखुश हैं हर्षा भोगले, कहा-सचिन, सौरव, द्रविड़ सुन सकते थे अपनी आलोचना

हर्षा भोगले ने कहा सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण का दौर भारतीय क्रिकेट का बेहतरीन दौर था। ये सब अपनी आलोचना सुन सकते थे।

Author नई दिल्ली | January 24, 2017 6:41 PM
कमेंट्री करने से मना किए जाने के बाद हर्षा भोगले ने पहली बार बोलते हुए कहा कि सचिन, सौरव, द्रविड़, लक्ष्मण अपनी आलोचना सुन सकते थे, वर्तमान में ऐसा नहीं है।(Photo: Twitter)

भारत के सबसे प्रसिद्ध और ईएसपीएन स्टार स्पोर्ट चैनल की ओर से कई बार बेस्ट कमेंटेटर का अवॉर्ड जीत चुके हर्षा भोगले को लाइव मैचों में अपने विचार व्यक्त करेने से रोक दिया गया है। वह भारत के सभी महत्वपूर्ण मैचों में कमेंटेटर के तौर पर मौजूद रहते थे, लेकिन पिछले साल बांग्लादेश के साथ एक रोमाचंक मैच के दौरान कमेंट्री करते हुए भारतीय टीम की आलोचना करने और बांग्लादेश के खेल की प्रशंसा करने के कारण उन्हें टीम इंडिया के मैचों में कमेंट्री करने के लिए साइन नहीं किया जा रहा है। लेकिन, यह पेशेवर प्रतिबंध भी हर्षा भोगले को अपने विचार खुलकर व्यक्त करने से नहीं रोक पा रहा है।

हर्षा भोगले क्रिकेट कमेंटेटर होने के साथ ही एक अच्छे राइटर और मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त फैन फॉलोविंग है। वह कई बड़े न्यूजपेपर्स के लिए साप्ताहिक कॉलम भी लिखते हैं। इन सभह माध्यमों के जरिए वह अपने विचार खुलकर व्यक्त करते हैं। एक अंग्रेजी न्यूजपेपर के साथ इंटरव्यू के दौरान जब हर्षा भोगले से यह पूछा गया कि मौजूदा भारतीय टीम में आपका अच्छा दोस्त कौन है तो इसके जवाब में हर्षा ने कहा, कभी कभी ज्यादा दोस्त ना होना अच्छा होता है। गौरतलब है कि हर्षा भोगले ने एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ भारत की संघर्षपूर्ण जीत पर आलोचना करते हुए बांग्लादेश के खेल की कफी तारीफ की थी। इस पर अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया था, जिसे महेंद्र सिंह धोनी ने भी रिट्वीट किया था।

हर्षा भोगले ने कहा, ‘मुझे नहीं पता, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि कभी कभी ज्यादे लोगों से दोस्ती ना होना भी अच्छा होता है। मैं भारतीय टीम के एक जनरेशन को काफी मिस करता हूं जो अब क्रिकेट से सन्यास ले चुकी है। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण यह भारतीय क्रिकेट का बेहतरीन दौर था। इनके साथ मुझे कभी यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ी कि मैं क्या कह रहा हूं। सचिन जब खराब फॉर्म से गुजर रहे थे तो मैंने कमेंट्री के दौरान कहा था, एक सम्राट किसी आम आदमी की तरह आउट होकर वापस आ रहा है। तब मेरे पीछे से किसी ने नहीं कहा था कि सचिन को यह बुरा लगेगा।’

हर्षा भोगले ने आगे कहा, ‘सौरव गांगुली के साथ कमेंट्री करते हुए मैं पूरी स्वतंत्रता के साथ अपनी बात कह सकता था, अपने विचार खुलकर व्यक्त कर सकता था। एक बार मैंने सौरव की बात को खारिज करते हुए कहा, आप उन खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने बहुत बड़े स्तर का क्रिकेट खेला है। सौरव ने जवाब दिया, आपने कितने विश्व कप को कवर किया है? अपनी बात कहिये, मैं जानना चाहता हूं की आप क्या सोचते हैं?’ हर्षा ने कहा कि मुझे कमेंट्री करने से रोकने के पीछे वजह नहीं बताई गई। यह मेरे लिए एक सबक की तरह है। सबको लगता है की दरवाजे बंद हो चुके हैं और यह सही भी है, लेकिन खिड़कियां अभी भी खुली हैं। हर्षा ने वर्तमान भारतीय टीम के बारे में कहा कि वे अपनी आलोचना नहीं सुन सकते।

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