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आकलन: हार्दिक में है कपिल सरीखा हरफनमौला बनने का दम!

हार्दिक पंड्या ने इंडियन प्रीमियर लीग से ख्याति पाई थी। इसी लीग में प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारतीय टीम में हुआ। उन्होंने अपने निरंतर खेल से कभी चयनकर्ताओं को अपने फैसले पर अफसोस नहीं होने दिया।

Author August 23, 2018 7:21 AM
पंड्या को कपिल के सामने खड़ा करने का खेल तब शुरू हुआ जब उन्होंने एक कैलेंडर इयर में 500 से ऊपर रन बना डाले।

भारत 2019 विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से अपने सबसे महत्त्वपूर्ण दौरे पर है। भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ अब तक की शृंखला में कई उतार-चढ़ाव भरे पल देखने को मिले। पांच मैचों की टैस्ट सीरीज के पहले दो मैच हार कर भारतीय टीम ने तीसरे में वापसी की। बल्लेबाजी की धुरी भारतीय कप्तान विराट कोहली से हटकर मध्यक्रम और निचले क्रम तक पहुंची है। इस बीच तीसरे टैस्ट मैच की पहली पारी में इंग्लैंड को ध्वस्त करने वाले हार्दिक पंड्या को लेकर फिर से चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस मैच में पांच विकेट चटकाने के साथ पहली पारी में 18 और दूसरी पारी में बेहतरीन 52 रन की अर्धशतकीय पारी खेलकर पंड्या ने साबित किया कि वे हरफनमौला के तौर पर टीम के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। उनके इस प्रदर्शन के बाद उनकी तुलना पूर्व कप्तान और अपने जमाने के बेहतरीन ऑलराउंडर कपिल देव से भी होने लगेगी। क्या पंड्या की तुलना कपिल से करना ठीक है? इसी पर संदीप भूषण की रिपोर्ट…

हार्दिक पंड्या ने इंडियन प्रीमियर लीग से ख्याति पाई थी। इसी लीग में प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारतीय टीम में हुआ। उन्होंने अपने निरंतर खेल से कभी चयनकर्ताओं को अपने फैसले पर अफसोस नहीं होने दिया। इंग्लैंड के वर्तमान दौरे पर भी हार्दिक का प्रदर्शन ठीकठाक ही रहा। बात बल्लेबाजी की हो या गेंदबाजी की हार्दिक ने हरफनमौला के तौर पर निराश नहीं किया। पिछले दो साल के रिकॉर्ड को देखें तो उन्होंने कई मौकों पर टीम को हार से बचाया है। हालांकि इतने भर से उनकी तुलना कपिल से की जाए यह कहां तक जायज है। क्या इससे पंड्या पर भी प्रदर्शन का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता?

दरअसल, पंड्या को कपिल के सामने खड़ा करने का खेल तब शुरू हुआ जब उन्होंने एक कैलेंडर इयर में 500 से ऊपर रन बना डाले। साथ ही विकेट चटकाने का आंकड़ा भी कपिल के इर्द-गिर्द घूमने लगा। यह 2017 की बात है। पंड्या ने इस साल एक दिवसीय मैचों में कुल 555 रन बनाए और 31 विकेट भी अपने खाते में जोड़ लिए। यह आंकड़ा कपिल के 1986 में बनाए 517 रन और 32 विकेट के आसपास का ही था। इन आंकड़ों के सहारे ही क्रिकेट जगत में कपिल और पंड्या की तुलना शुरू हुई। हालांकि महज इस छोटे से प्रदर्शन से पंड्या को कपिल के बराबरी का आंकने से पहले हमें तब के और आज के हालात व बदलते क्रिकट के नियमों को भी देखना होगा।

कपिल जिस वक्त भारतीय टीम को अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी से जीत दिला रहे थे, तब न तो आज की तरह पावरप्ले था और न ही यह सिर्फ बल्लेबाजों का खेल था। कपिल वेस्ट इंडीज के घातक गेंदबाजों का बखूबी मुकाबला करते थे जबकि वे ऐसे तेज गेंदबाज थे जिनसे दिनभर में 20-25 ओवर कराए जा सकते थे। हार्दिक के तेजी से रन बटोरने की कला और मध्य में गेंदबाजी के साथ विकेट चटकाना उन्हें भले ही इस बहस की श्रेणी में लाता है लेकिन कपिल के सामने खड़ा होने के लिए इतना ही काफी नहीं। क्षेत्ररक्षण की पाबंदियों में लंबे शॉट लगाने वाले पंड्या की बल्लेबाजी कपिल से काफी पीछे है। कपिल ने 1978 में अपने तीसरे ही टैस्ट में 33 गेंद में 50 रन बनाकर बना कर जता दिया था कि वे तेज गति से आउटस्विंगर फेंकने अलावा बल्ले से आकर्षक शॉट भी लगा सकते हैं।

कपिल की प्रतिभा ने भारतीय क्रिकेट को सहारा दिया। 1983 में उनके नेतृत्व में भारत ने विश्व कप जीतकर जो इतिहास रचा उसने टीम की दिशा ही बदल दी। उस विश्व कप में जिंबाब्वे के खिलाफ उनकी 175 रनों की पारी को भला कोई कैसे भूल सकता है। 1990 में लॉर्ड्स में खेली गई कपिल की पारी भी उनके बल्लेबाजी का नमूना पेश करती है। इंग्लैंड के पहले पारी में बनाए गए 653 रन के जवाब में भारत के 430 रन पर नौ बल्लेबाज पवेलियन लौट गए थे। भारत को फॉलोआन बचाने के लिए 24 रन चाहिए थे। कपिल का साथ देने के लिए पिच पर सिर्फ नरेंद्र हिरवानी बचे थे। कपिल ने इस दौरान खुद स्ट्राइक रखकर स्पिनर हेमिंग्स के ओवर में लगातार चार छक्के जड़ दिए। उनकी इस पारी से पूरा मैदान स्तब्ध था। कपिल की पारी के बदले पंड्या ने भी श्रीलंका के खिलाफ एक टैस्ट में शतक लगाने के दौरान एक ओवर में 26 रन कूटे थे। लेकिन तब के हालात और आज के हालात में काफी फर्क है। जिस दबाव में कपिल ने छक्के लगाए उससे पंड्या की इस पारी की तुलना करना नाइंसाफी है।

कपिल फिटनेस के मामले में भी कम नहीं थे। उन्होंने 131 टैस्ट में केवल एक टैस्ट मिस किया था और दो टैस्ट में उन्हें बाहर बैठना पड़ा था। 434 टैस्ट विकेट के साथ पांच हजार से ज्यादा रन कपिल को एक अद्भुत हरफनमौला की श्रेणी में लाता है और हार्दिक पंड्या को इसकी बराबरी के लिए अभी काफी कुछ हासिल करना है। वे धुआंधार बल्लेबाजी जरूर करते हैं लेकिन कपिल की बराबरी के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। जानकारों की माने तो कपिल देव बनने के लिए हार्दिक को खुद को और अनुशासित करना होगा। साथ ही अपनी फिटनेस को इस लायक बनाना होगा कि वे लंबे स्पेल कर सकें। बल्लेबाजी में भी पंड्या को काफी सुधार की जरूरत है ताकि वे विदेशी पिच पर ऑफ स्टंप के बाहर से निकलती गेंद को बेहतर तरीके से खेल पाएं। हालांकि इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि वे वर्तमान में भारत के लिए बेहतरीन ऑलराउंडर हैं लेकिन खुद को तराशकर ही वे दुनिया के बेहतरीन हरफनमौला की सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।

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