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दोनों वक्‍त मैगी खाकर भूख शांत करते थे हार्दिक पांड्या, उधार के बल्‍ले से सीखी बैटिंग

अंडर-16 के दौरान स्थिती और भी बेकार थी क्योंकि खुद को रोकना काफी मुश्किल होता था लेकिन अब सब बदल गया है।

Author नई दिल्ली | July 31, 2017 4:58 PM
मैं मैग्गी का बहुत बड़ा फैन था और कुछ परिस्थितियां भी ऐसी थीं कि मुझे केवल मैग्गी ही खानी पड़ती थी। (Photo Source: Facebook@hardikpandya)

ऑल राउंडर क्रिकेटर हार्दिक पांड्या भारतीय टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आज जिस मुकाम पर हार्दिक पहुंचे हैं उसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की है। क्रिकेट के लिए हार्दिक का इतना जुनून था कि वे दूसरे से किट उधार लेकर खेलने के लिए जाते थे और पूरे दिन में केवल दो समय ही मैग्गी खाकर अपना पेट भरते थे। भारतीय टीम का हिस्सा बनने और इतना अच्छा खिलाड़ी बनने के पीछे के संघर्ष की बात करते हुए हार्दिक ने बताया कि अंडर-19 के दौरान मैं सिर्फ मैग्गी खाता था। मैं मैग्गी का बहुत बड़ा फैन था और कुछ परिस्थितियां भी ऐसी थीं कि मुझे केवल मैग्गी ही खानी पड़ती थी।

हार्दिक ने कहा आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपनी डायट को मैनेज करना मेरे लिए काफी मुश्किल था। अब मैं जो चाहूं वो खा सकता हूं लेकिन उस समय आर्थिक परेशानियों के चलते परिवार के कई मुद्दे थे इसलिए दोनों समय दिन और शाम में मैं मैग्गी ही खाता था। व्हाट द डक शो पर अपनी जिंदगी के बारे में बात करते हुए हार्दिक ने कहा कि मैच खेलने से पहले सुबह में और घर वापस आने के बाद शाम को मैं मैग्गी ही खाता था। वहीं अंडर-16 के दौरान स्थिती और भी बेकार थी क्योंकि खुद को रोकना काफी मुश्किल होता था लेकिन अब सब बदल गया है। वह दौर बेहद ही खूबसूरत था। मैं बहुत भाग्यशाली हूं क्योंकि उस मुश्किल के समय ने आज मुझे इस मुकाम पर पहुंचाया है। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि बिना किसी सेविंग के हमने एक गाड़ी खरीदी थी।

मैं और मेरा भाई कृणाल मैच खेलने के लिए गाड़ी से ही जाया करते थे। हमने एक साल के लिए बरोड़ा क्रिकेट एसोसिएशन से क्रिकेट उधार ली थी। मेरी उम्र उस समय 17 थी और कृनाल की लगभग 19 थी। कई लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए थे कि हम गाड़ी से आते हैं लेकिन हम खुद की एक क्रिकेट किट खरीदने के लिए सक्षम नहीं है। हार्दिक ने कहा कि लोग कुछ जानते नहीं है और बेवजह सवाल खड़े करने लगते है। मैंने और कृणाल से फैसला कर लिया था चाहे कैसी भी परस्थिती क्यों न हो हम कभी कमजोर नहीं पड़ेंगे। अपने और कृणाल के संघर्ष के बारे में बात करते हुए हार्दिक ने कहा कि परिवार में केवल पिता जी ही थे जो कमाते थे। हम दोनों भाइयों को मैंच खेलने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता था। कृणाल को एक मैच का 500 और मुझे 400 रुपए मिलता था। यह सिलसिला आईपीएल खेलने से छह महीने पहले तक चलता रहा था लेकिन अब हमारे पास सबकुछ है।

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