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हार्दिक-क्रुणाल पंड्या के पास नहीं थे EMI के पैसे, 2 साल तक बैंक वालों से छिपा कर रखी कार, IPL के रुपयों से चुकाया था कर्ज

हार्दिक और क्रुणाल पास के गांव लोकल टूर्नामेंट खेलने जाते थे। उसमें खेलने से उन्हें पैसा मिलता था। उस समय लोकल टूर्नामेंट में हार्दिक को 400 और क्रुणाल को हर मैच के लिए 500 रुपए मिलते थे। मैच से मिले पैसे से वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते थे।

पैसों की कमी के कारण हार्दिक और क्रुणाल किशोरावस्था में ही अपने टैलेंट से परिवार की आर्थिक मदद करने लगे थे।

पंड्या बंधुओं (हार्दिक पंड्या और क्रुणाल पंड्या) इस समय करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। वे क्रिकेट के मैदान पर अपना जलवा बिखेरने के साथ-साथ निजी जिंदगी में लैविश लाइफस्टाइल के लिए भी जाने-जाते हैं। हार्दिक अपनी कलाई में जो घड़ी पहनते हैं, उसकी कीमत ही डेढ़ करोड़ रुपए के आसपास है। हालांकि, यह कम लोगों को ही पता होगा कि एक समय उनके पास अपनी कार की ईएमआई (EMI) भरने तक के पैसे नहीं थे। उनकी कार कहीं बैंक वाले ले न जाएं, इसलिए उन्होंने 2 साल तक कार को उन लोगों की नजरों से छिपाकर रखा।

कोई उन्हें पिंच हिटर कहता है, कोई स्टार ऑलराउंडर और कोई एक्रोबेटिक फील्डर, जबकि कोई उन्हें रॉकस्टार बुलाता है। कॉफी विद करण एपिसोड के कारण वे कुछ लोगों के गुस्से का शिकार भी हो चुके हैं। जी हां, हार्दिक के के नेम और फेम से तो सब परिचित हैं, लेकिन उनके संघर्ष और कड़ी मेहनत की कहानी कम ही लोग जानते होंगे।

हार्दिक और क्रुणाल का जन्म एक धनी परिवार में हुआ था। उनका बचपन अमीरी में बीता। हालांकि, एक समय ऐसा आया, जब उनके परिवार को अपनी सारी संपत्ति गंवानी पड़ी। तीन साल तक वह और उनका परिवार पैसे-पैसे को मोहताज रहा। यहां तक उनके लिए 5-10 रुपए बचाना भी बहुत बड़ी बात थी। उनके पास अपनी क्रिकेट किट खरीदने के पैसे नहीं थे। उन्हें प्रैक्टिस के दौरान दूसरों से उधार की किट मांगनी पड़ती थी।

उस दौरान उनकी डाइट क्या थी, यह जानकर भी आपको आश्चर्य होगा। वे सुबह-शाम मैगी ही खाते थे। उन्होंने करीब 2 साल तक अपनी कार को बैंक कर्मियों से छिपाकर रखा, क्योंकि उनके पास कार लोन की ईएमआई देने के पैसे नहीं थे। उन्हें डर था कार देख लेने पर बैंक वाले कार घर से ले जाएंगे। यही वजह थी कि हार्दिक और क्रुणाल ने अपने टैलेंट से किशोरावस्था में ही परिवार की आर्थिक मदद करने शुरू कर दी थी।

हार्दिक और क्रुणाल पास के गांव लोकल टूर्नामेंट खेलने जाते थे। उसमें खेलने से उन्हें पैसा मिलता था। उस समय लोकल टूर्नामेंट में हार्दिक को 400 और क्रुणाल को हर मैच के लिए 500 रुपए मिलते थे। मैच से मिले पैसे से वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते थे। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से पहले उन्हें बतौर इनाम सबसे बड़ी धनराशि जो मिली थी वह 30 हजार रुपए थी।

यह पैसा उन्हें सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी टूर्नामेंट में मिला था। हार्दिक और क्रुणाल दोनों को ही 30-30 हजार रुपए मिले थे। कुछ महीने बाद आईपीएल नीलामी में मुंबई इंडियंस ने उन्हें खरीदा और उन्हें 50 लाख रुपए का चेक मिला। इस पैसे दोनों ने पिता को सरप्राइज देने की सोची। उन्होंने आईपीएल के पैसे से पहले पुरानी कार की ईएमआई चुकता की, फिर पिता के लिए एक नई कार खरीदी।

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