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Harbhajan singh Birthday: क्रिकेट छोड़ ट्रक ड्राइवर बनना चाहते थे हरभजन सिंह!

Harbhajan singh Birthday: हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत में बल्लेबाजी को चुना था और उनके पहले कोच चरनजीत सिंह भुल्लर उन्हें एक बल्लेबाज के तौर पर ट्रेनिंग दे रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद ही हरभजन सिंह के कोच चरनजीत सिंह भुल्लर की असमय मौत हो गई।

हरभजन सिंह के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य। (image source-Facebook)

‘द टर्बनेटर’ हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे दमदार गेंदबाजों में से एक हैं। अपने करियर के दौरान भारत को अपनी गेंदबाजीसे कई मैच जिताने वाले हरभजन सिंह आज अपना 38वां जन्मदिन मना रहे हैं। 3 जुलाई 1980 को पंजाब के जालंधर में जन्में हरभजन सिंह टीम में ऐसे खिलाड़ी के तौर पर जाने जाते हैं, जो आसानी से घुटने टेकने में विश्वास नहीं रखते हैं। हरभजन सिंह की जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य भी हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। हरभजन सिंह के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्यों से हम आपको रुबरु करा रहे हैं।

बल्लेबाज बनना चाहते थे हरभजन सिंहः 5 बहनों के इकलौते भाई हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत में बल्लेबाजी को चुना था और उनके पहले कोच चरनजीत सिंह भुल्लर उन्हें एक बल्लेबाज के तौर पर ट्रेनिंग दे रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद ही हरभजन सिंह के कोच चरनजीत सिंह भुल्लर की असमय मौत हो गई, जिसके बाद हरभजन सिंह ने देविंदर अरोरा से कोचिंग लेना शुरु कर दिया। देविंदर अरोरा के मार्गदर्शन में ही हरभजन सिंह ने बल्लेबाज से स्पिन गेंदबाजी की तरफ शिफ्ट किया। हरभजन सिंह ने 1995-96 के सीजन में पंजाब की तरफ से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया था और अपने पहले ही मैच में हरियाणा के खिलाफ 7/46 और 5/138 के शानदार आंकड़ों के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया।

क्रिकेट छोड़ना चाहते थे हरभजन सिंहः हरभजन सिंह ने साल 1998 में बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार अपनी जगह बनायी थी। हालांकि इस मैच में हरभजन सिंह सिर्फ 2 विकेट ही ले पाए और भारत यह मैच हार गया। इसके बाद 1999-2000 के सीजन के दौरान हरभजन सिंह का प्रदर्शन औसत ही रहा, जिस कारण उनका टीम में स्थान पक्का नहीं था। यही वो समय था, जब मुरली कार्तिक, सुनील जोशी और सरनदीप सिंह जैसे स्पिनर भारतीय टीम में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। ऐसे वक्त में हरभजन सिंह को क्रिकेट छोड़ने का ख्याल भी आया था और हरभजन क्रिकेट छोड़कर अमेरिका जाकर ट्रक ड्राइवर बनकर पैसे कमाने के बारे में सोचने लगे थे। लेकिन हरभजन सिंह की मां और बहनों के समर्थन से हरभजन सिंह ने फिर से क्रिकेट पर फोकस किया।

2001 से पलटी किस्मतः हरभजन सिंह के करियर के लिए साल 2001 का ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा स्वर्णिम साबित हुआ। इस सीरीज के दौरान हरभजन सिंह ने 3 टेस्ट मैचों में 32 विकेट लिए, जिसमें पहले टेस्ट मैच में एक हैट्रिक भी शामिल है। हरभजन सिंह, भारत की 2 वर्ल्ड कप विजेता टीमों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें से पहला साल 2007 में खेला गया आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप और साल 2011 का आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप शामिल है। हरभजन सिंह भारत की तरफ से 400 टेस्ट विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज हैं। हरभजन को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए साल 2003 में अर्जुन अवार्ड और साल 2009 में पद्म श्री अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

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