एक समय था जब गुरिंदरवीर सिंह ने आईने में देखना तक छोड़ दिया था। किसी की कही बात ने उनके आत्मविश्वास को इस कदर तोड़ दिया कि वह नजरें झुकाकर चलने लगे। दूसरी तरफ, भारत का सबसे तेज धावक बनने का सपना उन्हें अपनी पसंदीदा पिन्नी और रस मलाई तक से दूर कर रहा था, लेकिन दर्द, तानों और संघर्ष के बीच गुरिंदरवीर रुके नहीं।
अब वही लड़का 10.09 सेकेंड की विस्फोटक दौड़ के साथ भारत का सबसे तेज धावक बन चुका है। फेडरेशन कप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद गुरिंदरवीर ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में अपने संघर्ष, मानसिक लड़ाई, कोच जेम्स हिलियर की सीख और ‘वर्ल्ड क्लास स्प्रिंटर’ बनने के सपने पर खुलकर बात की।
गुरिंदरवीर सिंह ने 23 मई 2026 को फेडरेशन कप में 10.09 सेकंड में 100 मीटर की जबरदस्त दौड़ लगाकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड तक पहुंचने के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है।
टूर्नामेंट के पहले ही दिन उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया था, लेकिन वह इसे सिर्फ पांच मिनट तक ही अपने नाम रख पाए, क्योंकि उनके तुरंत बाद अनिमेष कुजूर ने इस रिकॉर्ड को और भी बेहतर बना दिया।
इसके बाद उनके कोच जेम्स हिलियर ने उनसे बाहरी शोर-शराबे से खुद को दूर रखने को कहा। इसका मतलब था कोई स्मार्टफोन नहीं और कोई सोशल मीडिया नहीं, लेकिन 24 घंटे बाद ही उनकी रिकॉर्ड-तोड़ दौड़ एक वायरल कंटेंट बन गई।
- सवाल: क्या आपको उम्मीद है कि आप और भी युवाओं को एथलेटिक्स अपनाने के लिए प्रेरित कर पाएंगे? खासकर तब, जब पंजाब उन राज्यों में से एक है जहां नशे की समस्या बहुत ज्यादा है।
- जवाब: इसका असर अगली पीढ़ी पर पड़ सकता है, लेकिन उन लोगों पर नहीं जो पहले से ही इसमें (नशे में) फंसे हुए हैं। जो लोग नशे में फंसे हैं, उन्हें तो यह भी नहीं पता कि गुरिंदरवीर सिंह कौन हैं, रांची कहां है या एथलेटिक्स किसे कहते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह दौड़ अगली पीढ़ी को सही रास्ता चुनने में मदद कर सकती है।
- सवाल: हालिया वर्षों में पंजाब ‘थ्रोअर’ (गोला फेंकने वाले) पैदा करने के लिए जाना जाता है, जबकि इतिहास में यह ‘क्वार्टर-माइलर’ (400 मीटर के धावक) पैदा करने के लिए मशहूर था। पंजाब से एक ‘स्प्रिंटर’ (तेज धावक) होने का आपके लिए क्या मतलब है?
- जवाब: पहले यहां थ्रोअर हुआ करते थे। 400 मीटर के धावक भी थे। लोग ज्यादातर थ्रो वाले इवेंट ही चुनते थे। अब मैंने 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ चुनी है। मुझे लगता है कि लोग मुझे देखकर कहेंगे कि अगर यह कर सकता है, तो मैं भी कर सकता हूं।
- सवाल: कल से अब तक आपने कितनी रील्स देखी हैं? खासकर तब जब परसों आपको फोन छूने की भी मंजूरी नहीं थी।
- जवाब: मैं तो बस अपनी ही रील्स देख रहा हूं। हर दूसरी या तीसरी रील मेरे ही बारे में है। यह जानकर बहुत अच्छा लग रहा है कि पूरा देश मेरे बारे में बात कर रहा है। यह अहसास शायद पांच दिनों तक अच्छा लगेगा और उसके बाद फिर से वही ट्रेनिंग की रोजमर्रा की मेहनत शुरू हो जाएगी।
- सवाल: आपने एक दिन पहले ही नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा था, लेकिन अनिमेष ने उसे तुरंत वापस हासिल कर लिया। आपको उस बारे में कैसा लगा?
- जवाब: मैं अनिमेष कुजूर के लिए खुश था और मैंने खुद पर कोई तनाव नहीं लिया। मैं पूरी तरह से अपनी लय में था। मैंने अपनी स्ट्रेचिंग की। रात में चार घंटे सोया और फिर पूरे दिन सोता रहा। उठा, स्टेडियम आया और नेशनल रिकॉर्ड तोड़ दिया। जब मैं अंडर-16 में था तो कई अधिक-उम्र के लड़के प्रतियोगिता में थे और मैं उनसे डरता था। मेरे मामाजी ने कहा, ‘‘जंगल में सिर्फ एक शेर है जबकि बहुत सारी बकरियां हैं, अब तू शेर बनकर खेल।’’
- सवाल: यह पहली बार नहीं है जब आपने नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। आपने पिछले साल भी ऐसा किया था, लेकिन उसके बाद आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा; आखिर हुआ क्या था?
- जवाब: किसी ने मेरी शक्ल-सूरत के बारे में कुछ कहा था और वह भी मेरे मुंह पर। पिछले साल मैं इस बात से बहुत परेशान हो गया था। मैंने खुद को आईने में देखना ही छोड़ दिया था। मैं हमेशा नजरें झुकाकर चलता था। मैंने सीधे आगे देखना भी छोड़ दिया था। अगर मैं किसी और की आंखों में खुद को देखता तो मुझे लगता कि वह भी मेरे बारे में वही सोच रहा है। इस वजह से मेरा आत्मविश्वास काफी डगमगा गया था। मैं आपको बता नहीं सकता कि वे शब्द क्या थे, लेकिन बहुत तकलीफ देने वाले थे।
- सवाल: आप उस भावना से कैसे उबर पाए? आपकी मदद किसने की?
- जवाब: वह मैं खुद था और कोच हिलियर। उन्होंने मुझसे कुछ अच्छी बातचीत की। उन्होंने मुझे बहुत सी चीजें सिखाईं। जब मैं थोड़ा उदास था तो मैंने उन्हें बताया कि मुझे क्या दिक्कत हो रही है। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं इतनी धीमी गति से नहीं दौड़ सकता। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हुआ। मैंने उन्हें बताया कि मुझ पर बहुत ज्यादा दबाव है। मुझे हल्का महसूस नहीं हो रहा है।
- उन्होंने मुझसे कहा कि कोई भी मेरे लिए खड़ा नहीं होगा। मुझे ही स्टार्टिंग लाइन पर खड़ा होना होगा। कोई भी मुझे प्रेरित करने के लिए नहीं आएगा। मुझे स्टार्टिंग लाइन पर खुद को ही प्रेरित करना होगा। मुझे जिंदगी में खुद को ही प्रेरित करना होगा। कोई भी मुझे परेशान करने के लिए कुछ भी कह सकता है। तुम्हें खुद को मजबूत बनाना होगा। कोई भी तुम पर असर नहीं डाल सकता। उन्होंने मुझे सिखाया कि लोगों की बात कैसे सुननी है। उन्होंने मुझे सिखाया कि लोगों को कैसे नजरअंदाज करना है। जैसे-जैसे मैं समझने लगा, वैसे-वैसे मुझमें सुधार आने लगा।
- सवाल: जब आपने हिलियर के साथ ट्रेनिंग शुरू की थी तो आप काफी भारी-भरकम थे, लेकिन अब आपका फैट परसेंटेज कम हो गया है और आप ज्यादा दुबले-पतले दिखते हैं। इसके लिए आपको क्या त्याग करना पड़ा?
- जवाब: मैंने सब कुछ छोड़ दिया है। मैंने काफी समय से कुछ भी नहीं खाया है। अब गर्मियां शुरू हो गईं हैं। मेरा परिवार पिन्नी और रसमलाई खा रहा है। मुझे पिन्नी और खोया बहुत पसंद है। जब मैं उन्हें देखता हूं तो मेरा मन खाने का करता है, लेकिन एक विश्वस्तरीय फर्राटा धावक बनने के अपने सपने की वजह से मैं ऐसा नहीं कर पाता।
- सवाल: एक एथलीट के लिए जूते उसके सबसे अच्छे दोस्त की तरह होते हैं। आपके जूतों के साथ आपका कैसा रिश्ता है?
- जवाब: मैं पहले स्ट्रेंजर और स्पार्टन के स्पाइक्स पहनता था। वे चमड़े के बने होते थे। फिर मेरे पहले स्पाइक्स न्यूजीलैंड से आए। मैं उन्हें मेज पर ही रखता था। जब तक मैं दौड़ नहीं रहा होता था तब तक मैं उन्हें जमीन पर भी नहीं रखने देता था। मुझे नए और रंग-बिरंगे जूते खरीदना बहुत पसंद है। अभी, मेरे पास नाइकी मैक्स फ्लाई 2 है।
- सवाल: भारत के सबसे तेज धावक के लिए अब आगे क्या है?
- जवाब: कुछ नहीं। बस लौटना है, खाना है, कसरत करनी है, ट्रेनिंग करनी है और यही सब दोहराना है।

गुरिंदरवीर ने 100 मीटर रेस में रचा इतिहास, एक दिन में 3 बार टूटा नेशनल रिकॉर्ड; उसैन बोल्ट से सिर्फ 0.51 सेकंड पीछे
भारतीय धावक गुरिंदरवीर सिंह ने रांची में जारी फेडरेशन कप में इतिहास रच दिया। उनके नाम भारत का 100 मीटर स्प्रिंट का रिकॉर्ड दर्ज हुआ। वह वर्ल्ड रिकॉर्ड के मामले में उसैन बोल्ट से मात्र 0.51 सेकंड पीछे रह गए। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
