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गुजरात ने जीती रणजी ट्रॉफी, मुंबई को पांच विकेट से हराकर रचा इतिहास

फाइनल में जीत के लिए मिले 311 रन के लक्ष्‍य को गुजरात ने कप्‍तान पार्थिव पटेल के शतक(143) के बूते 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया।

रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मुंबई के खिला। पार्थिव पटेल ने शतकीय पारी खेलकर गुजरात को जीत दिलाई। (Photo:PTI)

गुजरात ने मुंबई को पांच विकेट से हराकर रणजी ट्रॉफी 2016-17 का खिताब जीत लिया है। गुजरात ने पहली बार यह खिताब जीता है। फाइनल में जीत के लिए मिले 312 रन के लक्ष्‍य को गुजरात ने कप्‍तान पार्थिव पटेल के शतक(143) के बूते 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया। रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में गुजरात ने सबसे बड़े लक्ष्‍य का पीछा करते हुए जीत दर्ज की है। इसी के साथ वह दिल्‍ली, होलकर, कर्नाटक और हरियाणा जैसी टीमों के ग्रुप में शामिल हो गर्इ है जिसने फाइनल में मुंबई/बॉम्‍बे को हराकर रणजी ट्रॉफी जीती है। गुजरात 17वीं टीम है जिसने रणजी ट्रॉफी जीती है। वहीं मुंबई 46वीं बार फाइनल में पहुंचा था जो कि एक रिकॉर्ड है।इससे पहले वह आखिरी बार 1950-51 में फाइनल में पहुंची थी। उस समय उसे होलकर टीम के हाथों हार झेलनी पड़ी थी।

इससे पहले मुंबई की पहली पारी 228 रन तक चली थी। इसके जवाब में गुजरात ने 328 रन बनाए। दूसरी पारी में मुंबई ने सुधरा हुआ प्रदर्शन किया। अभिषेक नायर (91, श्रेयस अयर(82) और आदित्‍य तारे(69) की अर्धशतकीय पारियों के बूते उसने 411 रन बनाए। इसके चलते गुजरात को जीत के लिए 312 रन का लक्ष्‍य मिला। गुजरात ने सुबह बिना किसी नुकसान के 47 रन से आगे खेलना शुरू किया लेकिन उसने इसी स्कोर पर इस सत्र में सर्वाधिक 1310 रन बनाने वाले सलामी बल्लेबाज प्रियांक पांचाल (34) का विकेट गंवा दिया।

पांचाल ने बलविंदर संधू (101 रन देकर दो विकेट) की ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंद पर दूसरी स्लिप में खड़े सूर्यकुमार यादव को कैच दिया। संधू ने नये बल्लेबाज भार्गव मेराई (दो) को भी ज्यादा देर तक नहीं टिकने दिया जिसके बाद पार्थिव ने क्रीज पर कदम रखा लेकिन दूसरे सलामी बल्लेबाज समित गोहल (21) के आउट होने से गुजरात का स्कोर तीन विकेट पर 89 रन हो गया। मुंबई अच्छी स्थिति में दिख रहा था लेकिन पार्थिव ने मनप्रीत जुनेजा (54) के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिये 116 रन की साझेदारी निभायी जो आखिर में निर्णायक साबित हुई।

जुनेजा ने अखिल हेरवादकर की गेंद पर विकेटकीपर आदित्य तारे को कैच दिया। हालांकि तब बल्लेबाज को लग रहा था कि गेंद उनके बल्ले से लगकर नहीं गयी। रूजुल भट (नाबाद 27) ने हालांकि पार्थिव का अच्छा साथ दिया और अपने कप्तान के साथ पांचवें विकेट के लिये 94 रन जोड़े। भट जब केवल एक रन पर थे तब तारे ने उनका आसान कैच छोड़ा। गेंद उनके पीछे हेलमेट पर लगी जिससे मुंबई को पांच पेनल्टी रन भी गंवाने पड़े। भट को इसके बाद भी दो बार जीवनदान मिले। मैन आफ द मैच पार्थिव इस बीच संधू पर तीन चौके जड़कर शतक के करीब पहुंचे और उन्होंने हेरवादकर पर दो रन लेकर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना 25वां सैकड़ा पूरा किया। उन्होंने सबसे पहले ड्रेसिंग रूम में बैठे अपने साथियों और फिर दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया।

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