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दृष्टिबाधितों की अनदेखी दुखी करने वाली: अंकुर

क्यो ओलंपिक 2020 की तैयारियों को लेकर खेल मंत्रालय काफी सजग नजर आ रहा है। बात चाहे टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) की हो या अपने स्तर से खिलाड़ियों की मदद की, खेल मंत्रालय भरसक कोशिश को तैयार है।

Author February 8, 2018 05:19 am
paralympics Sports man Satyanarayana

संदीप भूषण
तो क्यो ओलंपिक 2020 की तैयारियों को लेकर खेल मंत्रालय काफी सजग नजर आ रहा है। बात चाहे टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) की हो या अपने स्तर से खिलाड़ियों की मदद की, खेल मंत्रालय भरसक कोशिश को तैयार है। लेकिन यह सभी चीजें केवल उन खिलाड़ियों के लिए हैं जो शारीरिक रूप से सक्षम हैं। यह कहना है भारत की ओर से रियो ओलंपिक में पहले पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित एथलीट के तौर पर भाग लेने वाले अंकुर धामा का। वे सरकार के पैरा खिलाड़ियों के प्रति उदासीन रवैए से काफी नाराज हैं।
अंकुर बचपन में भी रोशनी गांवा चुके हैं लेकिन अपने हौसले से जीवन की सभी कठिनाइयों को मात देते हुए देश के अव्वल पैरा एथलीटों की श्रेणी में शामिल हैं। एशियाई खेलों की तैयारी में जुटे अंकुर ने पैरा खिलाड़ियों के प्रति राज्य सरकार और खेल मंत्रालय के उदासीनता से दुखी हैं। उन्होंने कहा कि जब मैं रियो ओलंपिक की तैयारी कर रहा था तब भी किसी सरकारी महकमे से मुझे कोई सहायता नहीं मिली और आज भी वही हाल है। 23 साल के इस ओलंपियन ने कहा कि सरकार की सभी योजनाएं सिर्फ सबल और सक्षम लोगों के लिए ही हैं। कई बार साई के अधिकारियों को पत्र लिखने के बाद मुझे टॉप्स में जगह मिली है। अगर ऐसा है तो फिर कैसे कोई खिलाड़ी अपना ध्यान ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन पर लगा सकता है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीतने वाले उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी धामा ने कहा कि हमेशा से ही पैरा एथलीटों की अनदेखी होती रही है। हम कभी अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं समझते लेकिन क्या सरकार को हमारी मदद के लिए आगे नहीं आना चाहिए। अंकुर ने कहा कि कोर्ट पर हमारा जीवन काफी कम होता है। हम पांच या सात साल ही मैदान पर सक्रिय खिलाड़ी होते हैं। इसके बाद न तो हमें कोई पूछता है न ही कहीं से मदद मिलती। कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर नौकरी की मांग करने लगते हैं लेकिन मैंने तो कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक जीते हैं। इसके बाद भी मेरी सुनने वाला कोई नहीं है।

दिल्ली के संत स्टीफंस कॉलेज से एमए की पढ़ाई करने वाले इस पैराएथलीट ने कहा कि सरकार को हमारे लिए कोई उचित व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से अन्य एथलीटों को मान-सम्मान दिया जाता है, वैसा ही व्यवहार हमारे साथ हो तो हम काफी आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेल मंत्रालय को पैरा एथलीटों और पैरा खिलाड़ियों के लिए स्कूल स्तर से ही खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन और प्रोत्साहन का इंतजाम करना होगा, तभी हम देश के लिए पदक जीतेंगे।

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