Golden Era of cricket coming very Soon - Jansatta
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क्रिकेट का आने वाला सुनहरा कल

आइसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप जीतना भारत के लिए कोई नई बात नहीं। न्यूजीलैंड में हुए इस विश्वकप को अजेय रहते हुए भारत ने जिस धमाकेदार अंदाज में जीता, वो वाकई चौंकाने वाला है।

Author February 8, 2018 3:00 AM
कमलेश नगरकोटी, शिवम मावी और ईशान पोरेल ने मिलकर इस विश्व कप में 24 विकेट बटोरे। इन तीनों ने करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी की। आस्ट्रेलियाई कोट रेयान हैरिस, जो खुद भी तेज गेंदबाज रह चुके हैं, भारतीय गेंदबाजों से खासे प्रभावित हुए। ऐसे में ये तीन रत्न बनेंगे देश के क्रिकेट के बेहतर भविष्य

आइसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप जीतना भारत के लिए कोई नई बात नहीं। न्यूजीलैंड में हुए इस विश्वकप को अजेय रहते हुए भारत ने जिस धमाकेदार अंदाज में जीता, वो वाकई चौंकाने वाला है। रेकॉर्ड चौथी सफलता की राह में जीत का अंतर श्रेष्ठता की कहानी बयां कर देता है। फाइनल में भारत ने जिस सहजता से आस्ट्रेलिया को आठ विकेट से धोया, उससे सभी टीम इंडिया की नई पौध के कायल हो गए। तीन बार की चैंपियन आस्ट्रेलियाई टीम को लीग मैच में 100 रन के बड़े अंतर से हराकर ही भारत ने अंडर-19 विश्व कप के सफर की शुरुआत की थी। युवा टीम इंडिया के पास मनजोत कालरा (84 की औसत से 252 रन) और पृथ्वी शॉ (65.25 की औसत से 261 रन) के रूप में आक्रामक ओपनर हैं। 180, 67, 155, 16, 89 और 71 रन की इनकी साझेदारियों ने टीम को मजबूत आधार दिया। शुभमान गिल एक भरोसेमंद बल्लेबाज हैं जिनके आदर्श हैं विराट कोहली। 372 रन बटोरकर शुभमान गिल ह्यमैन आफ द टूर्नामेंट बने। 63, नाबाद 90, 86, नाबाद 102 और 31 रन की पारियों में उनके बल्लेबाजी कौशल की चमक दिखाई दी।

तेज गेंदबाजों की तो जितनी तारीफ की जाए, कम है। कमलेश नगरकोटी, शिवम मावी और ईशान पोरेल ने मिलकर इस विश्व कप में 24 विकेट बटोरे। इन तीनों ने करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी की। आस्ट्रेलियाई कोट रेयान हैरिस, जो खुद भी तेज गेंदबाज रह चुके हैं, भारतीय गेंदबाजों से खासे प्रभावित हुए। उस देश से, जो अपनी स्पिन ताकत से ज्यादा जाना जाता है, तेज गेंदबाजों की प्रभावशाली पौध निकलती देखकर हैरिस हैरान हैं। तेज गेंदबाजों ने ही नहीं, स्पिनरों ने अपनी असरदार गेंदबाजी से रंग जमाया। बाएं हाथ के स्पिनर अंकुल राय 14 विकेट लेकर संयुक्त रूप से सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। 9.07 की औसत से लिए उनके विकेट दर्शाते हैं कि वे कितने उपयोगी रहे।
इस स्तर पर खिलाड़ियों को तराशने में कोच की भूमिका अहम होती है।

जब आपके पास राहुल द्रविड़ जैसी महान शख्सियत हो तो फिर चिंता कैसी। जो खुद अपने खिलाड़ी जीवन में मेहनती, अनुशासित और तकनीकी रूप से सक्षम बल्लेबाज रहा हो तो उससे हर कोई बेहतर परिणाम की अपेक्षा रखता है। द्रविड़ ने इस टीम को बनाने में पूरी जान लगा दी। हितों के टकराव के कारण आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के कोच पद को छोड़कर उन्होंने युवा प्रतिभाओं को निखारना ही अपना लक्ष्य बनाया। जब कोच का कद बड़ा हो तो उसकी सीख को नजरअंदाज करने की खिलाड़ी हिम्मत नहीं कर सकता। 2015 में अंडर-19 और भारत ‘ए’ टीमों की कमान संभालने के बाद से द्रविड़ की प्राथमिकता ऐसे खिलाड़ी उभारने की रही है जो सीनियर टीम में खिलाड़ियों का विकल्प बन सके। दिल्ली के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत की तो वे पिछले साल से ही वकालत कर रहे हैं।

इस चैंपियन टीम के भी कई खिलाड़ी आइपीएल नीलामी में बिके हैं। पैसा और प्रसिद्धि समय के साथ बढ़ेगी। इसलिए चैंपियन खिलाड़ियों को करिअर आगे बढ़ाने के लिए धैर्य दिखाना होगा। पिछले अंडर-19 विश्व कपों से कई सितारे चमके पर उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाए जहां उन्हें जाना चाहिए था। 2012 अंडर-19 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तानन उन्मुक्त चंद इनमें से एक हैं। पर पिछली विश्व कप जीत के हीरो मोहम्मद कैफ, युवराज सिंह और विराट कोहली सरीखे खिलाड़ी अपने करिअर को ऊंचाइयां देने में सफल रहे।
इस विश्व विजेता टीम की खासियत यह है कि खिलाड़ी ज्यादा पेशेवर, अनुशासित और परिपक्व दिखते हैं। उन पर न तो पाकिस्तान के साथ सेमीफाइनल खेलने का दबाव दिखाई दिया और न ही आस्ट्रेलिया जैसी सशक्त टीम के साथ खेलने का खौफ। खिलाड़ी दबंगई के साथ खेले।
देश में क्रिकेट की अपार प्रतिभाएं हैं। इस चैंपियन टीम में मुंबई और दिल्ली के खिलाड़ी नहीं नहीं, पंजाब, बंगाल, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के खिलाड़ियों को प्रतिनिधित्व मिला है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी संतुलन भारतीय क्रिकेट की सुनहरी झलक प्रस्तुत करता है।

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