गौतम गंभीर ने दिया रविचंद्रन अश्विन का साथ, कहा- फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बीच में कूद रहे लोग; इरफान पठान ने दिलाई 2019 वर्ल्ड कप की याद

रविचंद्रन अश्विन और केकेआर के कप्तान इयोन मॉर्गन के बीच आईपीएल 2021 के दौरान हुई झड़प इस वक्त बड़ा मुद्दा बन गया है। कई दिग्गज खेल भावना पर चर्चा कर रहे हैं और अपने बयान दे रहे हैं। इसी बीच गौतम गंभीर, इरफान पठान और अजीत अगरकर ने भी इस पर अपनी राय सामने रखी है।

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अश्विन-मॉर्गन विवाद पर गौतम गंभीर और इरफान पठान ने दिया भारतीय स्पिनर का साथ (सोर्स- ट्विटर)

कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान इयोन मॉर्गन और दिल्ली कैपिटल्स के वरिष्ठ खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन के बीच आईपीएल 2021 के एक मुकाबले में हुई लड़ाई लगातार सुर्खियां बटोर रही है। दोनों स्टार खिलाड़ियों की इस झड़प के बाद खेल भावना का मुद्दा भी जमकर गूंज रहा है। इसी कड़ी में पूर्व भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर और इरफान पठान ने भी बयान दिया है।

गौतम गंभीर ने जहां भारतीय स्पिनर का साथ देते हुए कहा है कि लोग इस मामले में अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए कूद रहे हैं। उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। वहीं इरफान पठान ने 2019 वर्ल्ड कप फाइनल की याद दिलाई है जहां बेन स्टोक्स के पैर से लग कर गेंद बाउंड्री लाइन के पार चली गई थी।

स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए गौतम गंभीर और इरफान पठान ने इस मामले को लेकर अपने-अपने बयान दिए। गंभीर ने कहा कि,’मैं 100 प्रतिशत रविचंद्रन अश्विन का साथ दूंगा। उन्होंने जो किया वो नियमों के मुताबिक था। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। और कई ऐसे लोग हैं जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है वे फिर भी इसमें कूद रहे हैं। शायद अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए या फिर चर्चा में बने रहने के लिए। जिसका कोई मतलब नहीं हैं। अश्विन पूरी तरह अपनी जगह सही थे।’

वहीं इरफान पठान ने 2019 वर्ल्ड के फाइनल की याद दिलाते हुए इंग्लैंड के ऑलराउंडर बेन स्टोक्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि,’लोग खेल भावना शब्द का अपने अनुसार प्रयोग करते हैं। 2019 वर्ल्ड कप याद है ना। हमको इसमें नहीं पड़ना चाहिए। अगर आपको नियम से दिक्कत है तो नियम बदलो।’

उन्होंने ये भी कहा कि,’उस रनआउट के मामले (मांकडिंग) में निश्चित मैं कुछ और करता, लेकिन अश्विन ने जो किया नियमों के अनुसार किया। हम सब उनके साथ हैं।’

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गंभीर और पठान के अलावा पूर्व क्रिकेटर अजीत अगरकर ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि,’पिछले कुछ सालों से लोग खेल भावना शब्द का अलग-अलग मौकों पर अपने अनुसार प्रयोग कर रहे हैं। कभी कोई नियम लागू होता है और कभी नहीं, ऐसा नहीं होता। हमें जो नियम हैं उस अनुसार ही चलना चाहिए।’

अगरकर ने आगे कहा कि,’उन्होंने (अश्विन) कुछ गलत नहीं किया। अगर ऐसा होता तो अंपायर उसका विरोध करते। और खेल में गर्मागर्मी होती रहती है इसको लेकर दुनियाभर के लोग बयानबाजी कर रहे हैं जो मुझे समझ नहीं आता। हमें इसे भूलकर आगे बढ़ना चाहिए।’

क्या था पूरा मामला ?

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2021 के 41वें मुकाबले में पहली पारी के दौरान दिल्ली कैपिटल्स के रविचंद्रन अश्विन और केकेआर के कप्तान इयोन मॉर्गन के बीच तू-तू मैं-मैं देखने को मिली। हालांकि केकेआर के विकेटकीपर दिनेश कार्तिक ने बीच-बचाव किया और अपने हमवतन खिलाड़ी अश्विन को अलग किया और मैच के बाद बताया कि किस बात पर दोनों का झगड़ा हुआ था।

दरअसल ये विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब केकेआर के फील्डर राहुल त्रिपाठी ने थ्रो फेंका और गेंद ऋषभ पंत से टकराकर दूर चली गई। अश्विन ने इसके बाद अतिरिक्त रन चुराने का प्रयास किया। कार्तिक ने इस झगड़े को लेकर बताया कि, उनके कप्तान मॉर्गन को लगा कि यह ‘खेल भावना’ के अंतर्गत नहीं था और टिम साउदी की गेंद पर जब अश्विन आउट हुए तो उन्होंने उनसे यह बात कही।

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मॉर्गन द्वारा इस बात को लेकर छींटाकशी करने पर मैदान से बाहर जा रहे नाराज अश्विन इसके बाद रुक गए और गुस्से में केकेआर के कप्तान की ओर बढ़ने लगे। जिसके बाद दिनेश कार्तिक दोनों के बीच में आ गए और उन्होंने तमिलनाडु टीम के अपने साथी को अलग किया।

इसके बाद इस मुद्दे को लेकर ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वार्न ने भारतीय गेंदबाज की गलती बताई है। यही नहीं, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भी रविचंद्रन अश्विन को ही विलेन करार दिया है। हालांकि, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने उन्हें करारा जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा है कि जब वर्ल्ड कप फाइनल में ओवर थ्रो के जरिए इंग्लैंड की टीम को चौका मिल गया था, तब इयोन मॉर्गन की खेल भावना क्यों मर गई थी।

अश्विन ने भी दिया जवाब

गुरुवार को अश्विन ने इस मामले पर ट्वीट किया और लिखा कि, ‘मैं फील्डर के थ्रो करने पर ही दौड़ पड़ा था और मुझे यह नहीं पता था कि गेंद ऋषभ के शरीर पर लगी है। अगर मुझे यह दिख भी जाए तो क्या मैं भागूंगा? जी हां और यह मेरा अधिकार है। क्या मॉर्गन का मुझे कलंक बुलाकर अपमान करना उचित था? बिलकुल नहीं।’

उन्होंने ये भी लिखा कि,‘मैंने लड़ाई नहीं की, न ही किसी का अपमान किया, बल्कि अपना बचाव किया। मेरे शिक्षकों और माता-पिता ने मुझे यही सिखाया है। आप भी अपने बच्चों को खुद के लिए खड़े होना सिखाएं। मॉर्गन और साउदी अपने अनुसार नियम बनाते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। उन्हें दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का हक नहीं है।’

भारतीय स्पिनर ने आगे इस मामले पर लिखा कि,‘मैं इससे ज्यादा इस बात से हैरान हूं कि लोग इस पर बहस कर रहे हैं और यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन अच्छा है और कौन बुरा।’

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उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘इस खेल में लाखों युवक और युवतियां अपने अंदाज में खेलते हुए अपने करियर को संवारने की कोशिश करते हैं। उन्हें सिखाइए कि एक गलत थ्रो पर रन चुराने से आप अपना करियर बना सकते हैं और नॉन स्ट्राइकर छोर पर बाहर खड़े रहने से आपके करियर को नुकसान हो सकता है। आप उन्हें ऐसा कहकर भ्रमित मत कीजिए कि ऐसी परिस्थितियों में रन ना लेने से या खिलाड़ी को चेतावनी देने से आप अच्छे इंसान बन जाते हैं। यह हिदायत वही देते हैं जो खेल से पेट पाल चुके हैं और सफलता प्राप्त कर चुके हैं।’

अश्विन ने आखिरी में ये भी लिखा कि,‘मैं सिर्फ इतना समझता हूं कि आप मैदान पर अपना सब कुछ दे दें और नियमों के भीतर खेलें। आप मैदान पर डटकर मुकाबला करिए और मैच खत्म होने पर हाथ मिला लीजिए। मेरे लिए यही स्पिरिट ऑफ द गेम (खेल भावना) की परिभाषा है। यही खेल भावना मेरी समझ में आती है।’

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