ताज़ा खबर
 

गैरी कर्स्टन का खुलासा, कहा- 7 मिनट में चुन लिए गया था टीम इंडिया का कोच, लेकिन नियुक्ति पत्र देख लौटा दिया था

कर्स्टन ने कहा, ‘मैं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पदाधिकारियों के सामने था। माहौल काफी गंभीर था। बोर्ड के सचिव ने कहा, ‘मिस्टर कर्स्टन क्या आप भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर अपना दृष्टिकोण पेश करोगे।’

gary kirsten team indiaगैरी कर्स्टन के कोच रहते टीम इंडिया ने 2009 में टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया और दो साल बाद वनडे वर्ल्ड कप जीता। (फाइल फोटो)

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज गैरी कर्स्टन की कभी कोचिंग में दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के कोच पद के लिए आवेदन भी नहीं किया था। हालांकि, गैरी कर्स्टन को 2007 में सिर्फ 7 मिनट के भीतर यह अहम पद मिल गया था। उनकी इस नियुक्ति में सुनील गावस्कर की अहम भूमिका थी। कर्स्टन ने ‘क्रिकेट कलेक्टिव’ पॉडकास्ट में 2007 की उन घटनाओं का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि वह सुनील गावस्कर के निमंत्रण पर साक्षात्कार के लिए गए थे। तब गावस्कर भी कोच चयन समिति का हिस्सा थे। कर्स्टन का इंटरव्यू सिर्फ 7 मिनट तक चला था। इसके बाद उन्हें कॉन्ट्रैक्ट लेटर पकड़ा दिया गया था। हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट लेटर (नियुक्ति पत्र) देख वह हैरान रह गए थे। दरअसल, जो लेटर उन्हें पकड़ाया गया था, उसमें उनके पूर्ववर्ती ग्रेग चैपल का नाम लिखा था। यह देख वह हैरान थे।

कर्स्टन ने बताया, ‘मुझे सुनील गावस्कर का ई-मेल मिला। उसमें लिखा था कि क्या मैं भारतीय टीम का कोच बनना चाहूंगा? मुझे लगा कि यह मजाक है। मैंने उस मेल का जवाब भी नहीं दिया। उन्होंने मुझे एक और मेल भेजा। उसमें पूछा गया था, ‘क्या आप साक्षात्कार के लिए आना चाहेंगे?’ मैं उस ईमेल को पत्नी को दिखाया। पत्नी ने कहा कि यह कोई गलत व्यक्ति हो सकता है। इसलिए यह पूरी तरह से एक विचित्र एंट्री थी। सही भी है, मेरा मतलब है, मेरे पास कोचिंग का कोई अनुभव या कुछ भी नहीं था।’

कर्स्टन ने बताया, मैं साक्षात्कार के लिए पहुंचा तो कई अलग-अलग तरह के अनुभव हुए। मैंने अनिल कुंबले को देखा। वह तत्कालीन भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान थे। उन्होंने मुझसे पूछा, ‘तुम यहां क्या कर रहे हो।’ मैंने कहा कि मैं आपका कोच बनने के लिए साक्षात्कार देने आया हूं। यह बात कह हम दोनों हंस पड़े थे। यह हंसने वाली बात भी थी।’

कर्स्टन ने कहा, ‘मैं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पदाधिकारियों के सामने था। माहौल काफी गंभीर था। बोर्ड के सचिव ने कहा, ‘मिस्टर कर्स्टन क्या आप भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर अपना दृष्टिकोण पेश करोगे।’ मैंने कहा, ‘मेरे पास कुछ भी नहीं है। किसी ने भी मुझसे इस तरह की तैयारी करने के लिए नहीं कहा था। मैं अभी यहां पहुंचा हूं।’

उन्होंने कहा, ‘समिति में शामिल रवि शास्त्री ने मुझसे कहा, ‘गैरी हमें यह बताओ कि दक्षिण अफ्रीकी टीम के रूप में भारतीयों को हराने के लिए आप क्या करते थे।’ मुझे लगा कि माहौल हल्का करने के लिए यह बहुत अच्छा था क्योंकि मैं इसका उत्तर दे सकता था। मैंने 2-3 मिनट में उसका जवाब दिया भी, लेकिन मैंने ऐसी किसी रणनीति का जिक्र नहीं किया जो हम उस दिन इस्तेमाल कर सकते थे।

कर्स्टन ने कहा, ‘वह और बोर्ड के अन्य सदस्य काफी प्रभावित थे, क्योंकि इसके तीन मिनट बाद बोर्ड सचिव ने मेरे पास अनुबंध पत्र (कॉन्ट्रैक्ट लेटर) खिसका दिया। मेरा साक्षात्कार केवल सात मिनट तक चला था। मैंने अनुबंध पत्र हाथ में लिया। पहला पेज देखा और अपना नाम ढूंढ़ने लगा। मुझे अपना नाम नहीं देखा। मुझे ग्रेग चैपल का नाम दिखा जो पूर्व कोच थे। मैंने उसे वापस उसे खिसका दिया। मैंने कहा, ‘सर, आपने मुझे अपने पिछले कोच का कॉन्ट्रैक्ट लेटर सौंपा है। तब उन्होंने अपनी जेब से पेन निकाला और उनका (चैपल) नाम काटकर मेरा नाम लिख दिया।’

Next Stories
1 नोवाक जोकोविच लॉकडाउन के बाद पहली बार कोर्ट पर उतरे, पुराने दिनों को याद कर रोने लगा वर्ल्ड नंबर वन टेनिस खिलाड़ी
2 डोनाल्ड ट्रंप ने दी खिलाड़ियों को ‘धमकी,’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- नस्लवाद का विरोध किया तो नहीं देखूंगा मैच
3 ‘क्रिकेट में हर लेवल पर नस्लवाद का सामना किया, इसे खत्म करने को घर से शुरुआत करनी होगी,’ दिग्गज भारतीय का छलका दर्द
ये पढ़ा क्या?
X