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1983 वर्ल्ड कप से लेकर ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में पहली बार हराने तक, भारतीय क्रिकेट के इन 7 बड़े पलों के गवाह रहे रवि शास्त्री

रवि शास्त्री कभी बतौर खिलाड़ी तो कभी कमेंटेटर बनकर तो कभी कोच बनकर ऐतिहासिक पलों के गवाह रहे हैं। 27 मई 1962 को मुंबई में जन्में शास्त्री चार साल तक टीम इंडिया के कोच रहे। इससे पहले कमेंट्री में उन्होंने काफी नाम कमाया।

रवि शास्त्री। (फाइल फोटो)

1983 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने से लेकर अबतक भारतीय क्रिकेट के ऐतिहासिक पलों की जब भी बात होगी, तो रवि शास्त्री के बिना ये कभी पूरी नहीं होगी। कभी बतौर खिलाड़ी तो कभी कमेंटेटर बनकर तो कभी कोच बनकर वह इन पलों के गवाह रहे हैं। 27 मई 1962 को मुंबई में जन्में शास्त्री चार साल तक टीम इंडिया के कोच रहे। इससे पहले कमेंट्री में उन्होंने काफी नाम कमाया। आइए नजर डालते हैं भारतीय क्रिकेट के उन सात ऐतिहासिक पलों पर, जिनका वो गवाह रहे हैं।

1983 वर्ल्ड कप- साल 1983 में दिग्गज कपिल देव की कप्तानी में टीम इंडिया वर्ल्ड कप जीती थी। यह भारतीय क्रिकेट का सबसे ऐतिहासिक पल है। रवि शास्त्री इस टीम के सदस्य थे। हालांकि, उन्हें फाइनल मैच में खेलने को मौका नहीं मिला था। उन्होंने 30 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। 230 मैचों में उन्होंने 6938 रन बनाए और 280 विकेट चटकाए।

आमेर सोहेल-वेंकटेश प्रसाद विवाद- साल 1996 के वर्ल्ड कप के भारत-पाकिस्तान मैच में आमेर सोहेल और वेंकटेश प्रसाद के बीच कहासुनी हुई थी। 288 रनों के लक्ष्य के जवाब में पाकिस्तान के बल्लेबाजी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे। सोहेल ने वेंकटेश की गेंद पर चौका जड़ा और बल्ला दिखाकर उनसे कुछ कहा। इसके अगली गेंद पर वह बोल्ड हो गए। रवि तब कमेंट्री कर रहे थे। उन्होंने कहा, ” डैट्स अ बेस्ट वे टू ऑनसर अ बैट्समैन। वेंकटेश प्रसाद क्लींड अप आमेर सोहेल।”

युवराज सिंह के छह छक्के- साल 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड की छह गेंदों पर लगातार छह छक्के जड़े थे। रवि शास्त्री तब भी कमेंट्री कर रहे थे। उन्होंने कहा, “सिक्स सिक्सेज इन एन ओवर,युवराज सिंह फिनिशेज थिंग्स इन स्टाइल।”

2007 टी-20 वर्ल्ड कप- महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया साल 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप जीती थी। जोगिंदर शर्मा की गेंद पर मिस्बाह उल हक का जब एस श्रीसंत ने कैच पकड़ा तब रवि शास्त्री कमेंट्री कर रहे थे। उन्होंने कहा, ” इट्स इन द एयर… श्रीसंत टेक्स इट…इंडिया विन। ”

सचिन तेंदुलकर का दोहरा शतक- वनडे क्रिकेट में सबसे पहला दोहरा शतक जड़ने का करनामा मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने किया था। साल 2009 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। कमेंट्री कर रहे रवि शास्त्री ने कहा, “द फर्स्ट मैन ऑन द प्लेनेट टू रिच 200 एंड इट्स सुपरमैन फ्रॉम इंडिया।”


2011 वर्ल्ड कप- महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया 2011 वनडे वर्ल्ड कप जीती थी। धोनी ने जब श्रीलंका के तेज गेंदबाज नुवान कुलशेकरा की गेंद पर छक्का जड़कर जीत दिलाया तो कमेंट्री कर रहे रवि शास्त्री ने कहा, ” धोनी फिनिशेज थिंग्स इन स्टाइल।”

ऑस्ट्रेलिया के ऑस्ट्रेलिया में हराया- विराट कोहली की कप्तानी में साल 2018-19 में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराया और ट्रॉफी पर कब्जा किया। पहली बार ऐसा हुआ कि कंगारुओं की धरती पर टीम इंडिया टेस्ट सीरीज जीती। रवि शास्त्री तब टीम इंडिया के कोच थे।

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