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फ्रांस ने जीता कप, क्रोएशिया ने दिल

विश्व कप के शुरुआत से ही काइलियन एमबेपे ने जो रफ्तार दिखाई उससे फुटबॉल जगत के दिग्गज उनके दीवाने हो गए। उन्हें फ्रांस की टीम के लिए तुरुप का इक्का माना जा रहा था। उन्होंने क्रोएशिया के खिलाफ फाइनल मुकाबले में गोल दाग कर अपनी काबिलियत का लोहा मनावा दिया।

Author July 16, 2018 2:31 AM
क्रोएशिया पहली बार फाइनल में पहुंचा था।

अहम मौकों पर स्कोर करने की अपनी काबिलियत के दम पर फ्रांस ने रविवार को फीफा विश्व कप के रोमांचक फाइनल में दमदार क्रोएशिया को 4-2 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। फ्रांस ने 18वें मिनट में मारियो मैंडजुकिच के आत्मघाती गोल से बढ़त बनाई। हालांकि इवान पेरिसिच ने 28वें मिनट में बराबरी का गोल दागा। फ्रांस को जल्द ही पेनल्टी मिली जिसे एंटोनी ग्रीजमैन ने 38वें मिनट में गोल में बदला। इससे फ्रांस मध्यांतर तक 2-1 से आगे रहा। पॉल पोग्बा ने 59वें मिनट में तीसरा गोल दागा और कालियन एमबेपे ने 65वें मिनट में फ्रांस की बढ़त 4-1 कर दी। मैंडजुकिच ने 69वें मिनट में गोल करके उसकी उम्मीद जगाई लेकिन इससे सिर्फ वह हार का अंतर ही कम कर पाए। फ्रांस ने इससे पहले 1998 में विश्व कप जीता था। तब उसके कप्तान डिडियर डेसचैम्प्स थे जो अब टीम के कोच हैं।

क्रोएशिया पहली बार फाइनल में पहुंचा था। उसने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किए और अपने कौशल और चपलता से दर्शकों का दिल भी जीता लेकिन आखिर में जालटको डालिच की टीम को उप विजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा। निसंदेह क्रोएशिया ने बेहतर फुटबॉल खेली लेकिन फ्रांस अधिक प्रभावी और चतुराईपूर्ण खेल दिखाया, यही उसकी असली ताकत है जिसके दम पर वह 20 साल बाद फिर चैंपियन बनने में सफल रहा। दोनों टीमें 4-2-3-1 के संयोजन के साथ मैदान पर उतरी। क्रोएशिया ने इंग्लैंड के खिलाफ जीत दर्ज करने वाली शुरुआती एकादश में बदलाव नहीं किया तो फ्रांसीसी कोच डेसचैम्प्स ने अपनी रक्षापंक्ति को मजबूत करने पर ध्यान दिया। क्रोएशिया ने अच्छी शुरुआत की और पहले हाफ में न सिर्फ गेंद पर अधिक कब्जा जमाए रखा बल्कि इस बीच आक्रामक रणनीति भी अपनाए रखी।  उसने दर्शकों में रोमांच भरा जबकि फ्रांस ने अपने खेल से निराश किया। यह अलग बात है कि भाग्य फ्रांस के साथ था और वह बिना किसी खास प्रयास के दो गोल करने में सफल रहा। फ्रांस के पास पहला मौका 18वें मिनट में मिला और वह इसी पर बढ़त बनाने में कामयाब रहा। फ्रांस को दार्इं तरफ बॉक्स के करीब फ्री किक मिली। ग्रीजमैन का क्रॉस शॉट गोलकीपर डेनियल सुबासिच की तरफ बढ़ रहा था लेकिन तभी मैंडजुकिच ने उस पर हेडर लगा दिया और गेंद गोल में घुस गई।

इस तरह से मैंडजुकिच विश्व कप फाइनल में आत्मघाती गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। यह वर्तमान विश्व कप का रेकार्ड 12वां आत्मघाती गोल है। पेरिसिच ने हालांकि जल्द ही बराबरी का गोल करके क्रोएशियाई प्रशंसकों और मैंडजुकिच में जोश भरा। पेरिसिच का यह गोल दर्शनीय था। क्रोएशिया को फ्री किक मिली और फ्रांस इसके खतरे को नहीं टाल पाया। इसके तुरंत बाद पेरिसिच की गलती से फ्रांस को पेनल्टी मिल गई। बॉक्स के अंदर गेंद पेरिसिच के हाथ से लग गई। रेफरी ने वीएआर की मदद ली और फ्रांस को पेनल्टी दे दी। अनुभवी ग्रीजमैन ने उस पर गोल करने में कोई गलती नहीं की। यह 1974 के बाद विश्व कप में पहला अवसर है जब फाइनल में मध्यांतर से पहले तीन गोल हुए। क्रोएशिया ने दूसरे हाफ में भी आक्रमण की रणनीति अपनाई और फ्रांस को दबाव में रखा। खेल के 48वें मिनट में लुका मोड्रिच ने एंटे रेबिच का गेंद थमाई जिन्होंने गोल पर अच्छा शॉट जमाया लेकिन लोरिस ने बड़ी खूबसूरती से उसे बचा दिया। खेल के 59वें मिनट में एमबेपे दाएं छोर से गेंद लेकर आगे बढ़े। उन्होंने पोग्बा तक गेंद पहुंचाई जिनका शॉट विडा ने रोक दिया। रिबाउंड पर गेंद फिर से पोग्बा के पास पहुंची जिन्होंने उस पर गोल दाग दिया।

इसके छह मिनट बाद एमबेपे ने स्कोर 4-1 कर दिया। उन्होंने बाएं छोर से लुकास हर्नाडेज से मिली गेंद पर नियंत्रण बनाया और फिर 25 गज की दूरी से शॉट जमाकर गोल दाग दिया जिसका विडा और सुबासिच के पास कोई जवाब नहीं था। एमबापे ने 19 साल 207 दिन की उम्र में गोल दागा और वह विश्व कप फाइनल में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए। पेले ने 1958 में 17 साल की उम्र में गोल दागा था। तीन गोल से पिछड़ने के बावजूद उसका जज्बा देखने लायक था लेकिन उसने दूसरा गोल फ्रांसीसी गोलकीपर लोरिस की गलती से किया। उन्होंने तब गेंद को ड्रिबल किया जबकि मैंडजुकिच पास में थे। क्रोएशियाई फॉरवर्ड ने उनसे गेंद छीनकर आसानी से उसे गोल में डाल दिया।
विश्व कप के शुरुआत से ही काइलियन एमबेपे ने जो रफ्तार दिखाई उससे फुटबॉल जगत के दिग्गज उनके दीवाने हो गए। उन्हें फ्रांस की टीम के लिए तुरुप का इक्का माना जा रहा था। उन्होंने क्रोएशिया के खिलाफ फाइनल मुकाबले में गोल दाग कर अपनी काबिलियत का लोहा मनावा दिया। वे फाइनल में गोल करने वाले पेलले के बाद दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। मैच के 65वें मिनट में बाएं छोर से लुकास हर्नाडेज से मिली गेंद पर नियंत्रण बना कर एमबेपे ने 25 गज की दूरी से दमदार शॉट लगाया। उनके इस गोल का क्रोएशियाई खिलाड़ी और गोलकीपर के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने 19 साल 207 दिन की उम्र में यह गोल दागा। इसके 60 साल बाद पहले 1958 में पेले ने 17 साल की उम्र में गोल दागा था।

मैच की खास बात
– पेले के बाद फाइनल में गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने एमबेपे
– 1974 के बाद विश्व कप में पहला अवसर था जब फाइनल में मध्यांतर से पहले तीन गोल हुए।
– दोनों टीमें 4-2-3-1 के संयोजन के साथ मैदान पर उतरी।

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