रामचंद्र गुहा बोले- टीम के काम का नहीं कोहली का अक्खड़पन, उनके सामने न झुके बीसीसीआई - former BCCI panel of administrators Ramachandra Guha article about indian captian virat kohli - Jansatta
ताज़ा खबर
 

रामचंद्र गुहा बोले- टीम के काम का नहीं कोहली का अक्खड़पन, उनके सामने न झुके बीसीसीआई

रामचंद्र गुहा ने BCCI के प्रशासक पद से 28 मई (2017) को भारतीय क्रिकेट बोर्ड की प्रशासकों की समिति के अध्यक्ष विनोद राय को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।

इतिहासकार रामचंद्र गुहा और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली। (फोटो सोर्स सोशल मीडिया)

भारतीय इतिहासकार और करीब चार महीने तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित बीसीसीआई की कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (सीएसी) का हिस्सा रहे लेखक रामचंद्र गुहा ने भारतीय कप्तान विराट कोहली और बीसीसीआई दोनों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने विराट कोहली को भारतीय क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज करार दिया है, लेकिन कोलकाता टेलीग्राफ के लिए लिखे एक लेख में भारतीय कप्तान पर कई सवाल भी उठा दिए हैं। रामचंद्र गुहा ने लिखा है कि बीसीसीआई विराट कोहली के आगे बौनी पड़ रही है। वह विराट कोहली को अपनी सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम का कप्तान बनते देखना चाहती है लेकिन बतौर कप्तान कोहली को अपने अधिकार और अहंकार दोनों में ही विन्रमता लानी पड़ेगी।

लेख में इतिहासकार ने आगे लिखा है, ‘मैंने अपने कार्यकाल के दौरान बीसीसीआई में कोहली को दबदबे को देखा है। बोर्ड के अधिकारी उन मुद्दों को भी कोहली के सामने रखते हैं जो उनके दायरे में भी नहीं आते।’ उन्होंने आगे लिखा की कोहली का अक्खड़पन टीम के काम का नहीं है इसलिए बीसीसीआई को भी कोहली के सामने झुकना नहीं चाहिए। लेख में आगे लिखा गया, ‘फ्यूचर टूर प्रोग्राम (एफटीपी) तैयार करने पर बातचीत होनी थी, तो बोर्ड के कानूनी सलाहकार ने कहा कि विराट की सहमति हर हाल में ली जानी चाहिए। इससे पहले जब बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के प्रबंधन का मामला हमारे समक्ष आया, तो बोर्ड के सीईओ ने सुझाव देते हुएकि विराट कोहली के शब्द पहले और आखिरी होने चाहिए कि नेशनल अकादमी कैसे चलाई जानी चाहिए।’

इतिहास रामचंद्र गुहा ने बीसीसीआई के एक फैसले पर तंज कसते हुए लिखा, ‘भारतीय क्रिकेट इतिहास में ‘संपूर्णता’ में विराट कोहली की बराबरी वाले एकमात्र अनिल कुंबल की जगह ऐसे व्यक्ति को कोच क्यों बनाया गया, जो विराट की तुलना में व्यक्तित्व और मैदानी उपलब्धियों के आगे ‘आश्चर्यजनक रूप से तुच्छ’ हैं। वहीं इस शख्स को कोचिंग का अनुभव भी नहीं था। सीएसी के चेयरमैन विनोद राय ने विराट कोहली के व्यक्तित्व के आगे अपनी स्वतंत्रता और स्वायत्तता को समर्पित कर दिया। कुछ ऐसा ही क्रिकेट कमेटी ने भी किया। सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, विनोद राय और लक्ष्मण ने टॉम मूडी (और अन्य दावेदार) की अनदेखी कर रवि शास्त्री को चुना क्योंकि ये दिग्गज विराट कोहली से घबरा गए और इन्होंने संस्था को व्यक्ति विशेष के अधीन कर दिया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App