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आत्मघाती गोल से उबरना आसान नहीं

विश्व कप से आत्मघाती गोल का एक काला अध्याय भी जुड़ा है। 1994 के विश्व कप में अमेरिका के विरुद्ध कोलंबिया के डिफेंडर ट्ंड्रेस एस्कोबार से अपनी टीम पर गोल हो गया था।

मनमोहन हर्ष

विश्व कप से आत्मघाती गोल का एक काला अध्याय भी जुड़ा है। 1994 के विश्व कप में अमेरिका के विरुद्ध कोलंबिया के डिफेंडर ट्ंड्रेस एस्कोबार से अपनी टीम पर गोल हो गया था। कोलंबिया को यह मैच गंवाना पड़ा। विश्व कप के बाद एस्कोबार की उनके देश में बंदूकधारी लोगों ने गोल-गोल कहते हुए छह गोलियां दाग कर हत्या कर दी थी।

रूस में संपन्न फीफा विश्व कप का 21वां संस्करण खिलाड़ियों के लिए कुछ ऐसे अनचाहे रेकार्ड के कारण चर्चित रहा, जब यश के लिए मैदान में उतरे खिलाड़ियों के गले अपयश पड़ गया। विश्व कप फुटबॉल में मैदान पर खिलाड़ी यह हसरत लेकर उतरते हैं कि मैच समाप्ति के बाद अपने देश के लिए उनके खाते में सबसे अधिक गोल दर्ज हों लेकिन, खिलाड़ियों पर कई बार वक्त की मार पड़ जाती है। किस्मत उनकी झोली में ऐसा दंश लिख देती है, जो फिर आजीवन कचोटता है। इस विश्व कप में कुछ गोल बिना किसी मंशा और प्रयास के फुटबॉलरों के गले आ पड़े। कुल 64 मैचों में स्कोर हुए 169 गोलों में 12 मौकों पर खिलाड़ी अनजाने में खुद की टीम पर गोल (आत्मघाती या खुद गोल) कर बैठे।

विश्व कप के इतिहास में यह नया रेकार्ड है। यहां तक कि फ्रांस और क्रोएशिया के बीच लुज्निक स्टेडियम में खेले गए फाइनल मैच (15 जुलाई) में भी जब क्रोएशिया के मारियो माजुकिच हेडर से बॉल को क्लियर करने का प्रयास कर रहे थे तो वह उनके ही गोल में जा घुसी। यह फीफा विश्व कप के इतिहास में फाइनल मैच में होने वाला पहला आत्मघाती गोल था। इस मुकाबले से पहले मेजबान रूस के दो, बेल्जियम, मोरक्को, आस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, पोलैंड, मिस्र, मेक्सिको, स्विट्जरलैंड और ट्यूनिशिया के एक-एक खिलाड़ियों की गलती से आत्मघाती गोल हुए। फीफा विश्व कप के इतिहास में पहला स्वयं गोल 1930 में उरुग्वे में हुए पहले विश्व कप में चिली के सामने मेक्सिको के मैनुअल रोसास से हुआ था। कालांतर में कमोबेश विश्व कप के हर संस्करण में ऐसे गोल खिलाड़ियों की बदनसीबी का सबब बने हैं।

गत विश्व कप तक टीमों द्वारा स्कोर किए गए करीब 2300 गोलों में से आत्मघाती गोलों की संख्या 41 थी, जो अब बढ़कर 53 हो गई है। विश्व कप में 70 फीसद से अधिक मुकाबलों में आत्मघाती गोल सेटीमों ने मैच गंवाए हैं। सात मुकाबलों में टीमों को आत्मघाती गोल के बाद जीत और आठ में ही ऐसे गोल के बाद टीमें मैच ड्रॉ कराने में कामयाब हुई है। रूस में आत्मघाती गोल का शिकार नौ टीमें मैच हार गर्इं। हालांकि ट्यूनिशिया की टीम पनामा के खिलाफ आत्मघाती गोल के बावजूद मैच जीतने में सफल रही। ग्रुप स्टेज में स्विट्जरलैंड की टीम आत्मघाती गोल के बाद कोस्टारिका से मैच ड्रॉ खेलने में सफल रही। प्री क्वार्टर फाइनल में मेजबान रूस के सर्गेई इग्नासेविच से स्पेन के खिलाफ खुद ही गोल हो गया था। बाद में अतिरिक्त समय तक बराबर रहे इस मैच को रूस ने पेनल्टी शूटआउट में जीता। विश्व कप से आत्मघाती गोल का एक काला अध्याय भी जुड़ा है।