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क्रिकेटर को हत्या की धमकी देने के आरोप में राज्य क्रिकेट संघ के सचिव समेत 7 के खिलाफ FIR, उत्तराखंड विधानसभा में भी उठा था CAU में भ्रष्टाचार का मुद्दा

प्राथमिकी के अनुसार, वीरेंद्र सेठी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पिछले साल विजय हजारे टूर्नामेंट के दौरान उत्तराखंड के कोच मनीष झा, टीम मैनेजर नवनीत मिश्रा और वीडियो विश्लेषक पीयूष रघुवंशी ने जान से मारने की धमकी दी थी।

फाइल फोटो

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के सचिव माहिम वर्मा और राज्य क्रिकेट इकाई के 6 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। इन लोगों पर अंडर-19 के एक पूर्व क्रिकेटर को जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। खास यह है कि कुछ दिन पहले ही उत्तराखंड विधानसभा में भी राज्य क्रिकेट इकाई में भ्रष्ट्राचार का मुद्दा उठ चुका है। अंडर-19 के पूर्व क्रिकेटर आर्य सेठी के पिता वीरेंद्र सेठी ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत की थी। इसके बाद उक्त लोगों को प्राथमिकी में नामजद किया गया है।

20 जून को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, वीरेंद्र सेठी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पिछले साल विजय हजारे टूर्नामेंट के दौरान उत्तराखंड के कोच मनीष झा, टीम मैनेजर नवनीत मिश्रा और वीडियो विश्लेषक पीयूष रघुवंशी ने जान से मारने की धमकी दी थी। देहरादून के वसंत विहार पुलिस थाने में आपराधिक षड्यंत्र (120बी), जानबूझकर चोट पहुंचाने (323), जबरन वसूली (384), और जानबूझकर अपमान करना (504) और आपराधिक धमकी (506) की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

प्राथमिकी में कहा गया है कि पिछले साल दिसंबर में राजकोट में एक अभ्यास सत्र के दौरान कोच मनीष झा ने आर्य सेठी को गाली दी और मारा था। मामला तब और बिगड़ गया जब आर्य सेठी ने राज्य संघ के सचिव माहिम वर्मा से संपर्क किया और उन्हें घटना की जानकारी दी। उत्तराखंड की टीम का राजकोट में विजय हजारे ट्रॉफी के लिए शिविर लगा था।

प्राथमिकी में कहा गया है कि आर्य सेठी ने जब माहिम वर्मा से शिकायत की तो उन्हें कोच के कमरे में बुलाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। प्राथमिकी में कोच मनीष झा, मैनेजर नवनीत मिश्रा और वीडियो एनालिस्ट पीयूष रघुवंशी पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर के अनुसार, तीनों ने आर्य से यह भी कहा कि वे भाड़े के हत्यारे से यह काम कराएंगे।

प्राथमिकी में कहा गया है कि टीम के लौटने पर आर्य के पिता वीरेंद्र सेठी माहिम वर्मा से मिलने उनके आवास पर गए। हालांकि, माहिम वर्मा ने धैर्यपूर्वक सुनने की बजाय उनसे घूस में 10 लाख रुपए मांगे ताकि यह सुनिश्चित हो कि राज्य स्तर पर आर्य सेठी के करियर में कोई बाधा न आए। वीरेंद्र सेठी ने प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया कि माहिम वर्मा ने उन्हें धमकी दी थी। देहरादून के वसंत विहार पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी में क्रिकेट संघ के प्रवक्ता संजय गुसाईं और एसोसिएशन के दो अन्य कर्मचारी सत्यम वर्मा और पारुल के नाम भी शामिल हैं।

वसंत विहार थाना प्रभारी के एसएचओ विनोद सिंह राणा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने बताया, ‘हमने एफआईआर दर्ज की है और जांच प्रक्रिया जारी है। हमने टीम बनाई थी, जो मामले की जांच कर रही है। सीएयू के पदाधिकारियों को नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन उनकी ओर से हमें कुछ नहीं बताया गया।’

विनोद सिंह राणा ने कहा, ‘हमें पता चला है कि 7 में से 2 ने अदालत का रुख किया, जहां से उन्हें गिरफ्तारी से छूट मिली थी। इसके बजाय पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में हमें अदालत का आदेश नहीं मिला है।’ वहीं, सीएयू सचिव माहिम वर्मा ने संवाददाता के फोन कॉल या टेक्स्ट संदेशों का जवाब नहीं दिया।

हाल ही में विधानसभा में एक सत्र के दौरान निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने सीएयू के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। विधायक उमेश कुमार ने मंगलवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कोविड महामारी के कारण कोई क्रिकेट नहीं खेले जाने के बावजूद पेशेवर फीस का भुगतान काफी बढ़ा दिया गया है।

उन्होंने बताया, ‘कोविड के दौरान, सीएयू ने प्रोफेशनल फीस के तौर पर 6.5 करोड़ रुपए बांटे। मैं जानना चाहता हूं कि उन्होंने यह पैसा किसे दिया? मार्च 2020 से पहले प्रोफेशनल फीस लगभग 2.75 करोड़ रुपए थी। कोविड के दौरान 1.27 करोड़ रुपए का लंच और डिनर किसने किया? मैंने इसे उत्तराखंड सदन में भी उठाया था। मुझे लगता है कि बीसीसीआई को हस्तक्षेप करना चाहिए, यहां बहुत बड़ा भ्रष्टाचार चल रहा है।’

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