इंग्लैंड 1994 फुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया था। यह वही विश्व कप था जिसकी मेजबानी अमेरिका ने की थी, लेकिन इसके शुरुआती दौर में एक इंग्लिश व्यक्ति की भूमिका बेहद अहम रही। 1966 विश्व कप जीतने वाली इंग्लैंड टीम का हिस्सा रहे जैक चार्लटन ने 1994 तक आयरिश फुटबॉल इतिहास में खुद को सबसे सफल मैनेजर के रूप में स्थापित कर लिया था।
जैक चार्लटन की टीम ने 1994 टूर्नामेंट की शुरुआत इटली की उस टीम को 1-0 से हराकर की थी, जिसमें रॉबर्टो बैजियो, फ्रांको बैरेसी और पाओलो मालदिनी जैसे दिग्गज खिलाड़ी थे। वही इटली की टीम अंत में फाइनल तक पहुंची थी। हालांकि, अगर कोई इस मैच के दौरान चार्लटन को टचलाइन पर गुस्से में चिल्लाते और इशारे करते हुए देखता तो उसे लग सकता था कि आयरलैंड के लिए सब कुछ गलत हो रहा है, लेकिन उनके इस व्यवहार की वजह एक ऐसी चीज थी, जो 2026 विश्व कप में भी एक बड़े मुद्दे के रूप में सामने आई है। वह चीज है पानी।
मैच के लगभग 24वें मिनट में प्रसारण के दौरान कैमरा चार्लटन पर गया, जहां वह टचलाइन के पास आने वाले अपने खिलाड़ियों पर पानी फेंकते नजर आए। वह खुले हुए पानी की बोतलें भी खिलाड़ियों की ओर उछाल रहे थे, जिसके लिए चौथे अधिकारी ने उन्हें कई बार चेतावनी दी। एक क्लिप में वह गुस्से में खुली हुई पानी की बोतल जमीन पर फेंकते हुए भी दिखते हैं।
बेवजह नहीं था गुस्सा
जैक चार्लटन का गुस्सा बेवजह नहीं था। 1994 फीफा विश्व कप एक ऐतिहासिक गर्मी की लहर के दौरान आयोजित हुआ था। मुकाबले ऐसे स्टेडियमों में खेले गए थे, जो कंक्रीट के बने बंद ढांचे थे और दिन के समय फुटबॉल मैचों के लिए तैयार नहीं किये गए थे। स्टेडियमों के अंदर औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के मध्य में था, जबकि कैलिफोर्निया के पासाडेना स्थित रोज बाउल स्टेडियम में खेला गया फाइनल 38 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में हुआ था।
खेल से बाहर जाने पर भी नहीं थी पानी पीने की मंजूरी
फीफा ने इस समस्या का सामना ऐसे किया जैसे यह कोई समस्या थी ही नहीं। ड्रिंक्स ब्रेक की बात तो दूर, खिलाड़ियों को गेंद के खेल से बाहर जाने पर भी पानी पीने की अनुमति नहीं थी। ड्रिंक्स ब्रेक को 2026 फीफा वर्ल्ड कप में शामिल किया गया है। जैक चार्लटन इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। न्यू जर्सी में इटली के खिलाफ मैच के बाद, पूर्व लीड्स यूनाइटेड डिफेंडर ने कहा कि वह खिलाड़ियों के लिए पानी के ब्रेक की मांग करते हुए फीफा को एक पत्र लिखेंगे।
आयरलैंड का अगला मैच मैक्सिको के खिलाफ था और उन्होंने कहा कि उनकी चिंता सिर्फ अपने खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि विपक्षी टीम के खिलाड़ियों के लिए भी थी। 21 जून 1994 की लॉस एंजिल्स टाइम्स की रिपोर्ट में चार्लटन के हवाले से कहा गया, ‘‘जब खिलाड़ी किनारे पर होते हैं तो उन्हें पानी देना आसान है। हमने किसी को मैदान के दूसरी तरफ भी भेजा था। हमें फीफा के एक प्रतिनिधि ने बताया था कि हम ऐसा कर सकते हैं, लेकिन सुरक्षा कर्मचारियों ने उसे टचलाइन के पास जाने नहीं दिया।’’
जैक चार्लटन ने कहा, ‘‘हर हाफ में दो या तीन बार, 10-15 सेकंड के लिए। मैं बस इतना ही चाहता हूं। पता नहीं हमें यह मिलेगा या नहीं। पहले हाफ में मेरे पांच खिलाड़ियों ने शुरुआती 45 मिनट के तीन-चौथाई हिस्से तक पानी नहीं पिया था…।’’
कोई सहानुभूति नहीं
फीफा ने जवाब दिया… लेकिन तंज के साथ। फीफा के तत्कालीन महासचिव सेप ब्लाटर के हवाले से 23 जून 1994 को द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘यह संयोग नहीं था कि शिकायत करने वाला एकमात्र मैनेजर आयरलैंड का था। उन्हें पानी की समस्या नहीं है, उन्हें ज्यादातर स्टेडियमों के अधिकारियों से समस्या है और यह फीफा की गलती नहीं है। अगर उनके खिलाड़ी मैक्सिको के खिलाफ पानी चाहते हैं तो वे ले सकते हैं। कोई समस्या नहीं है और उन्हें शिकायत करना बंद कर देना चाहिए।’’
अकेले नहीं थे जैक चार्लटन
हालांकि शिकायत करने वाले सिर्फ चार्लटन नहीं थे। मेजबान अमेरिका के कई खिलाड़ियों ने पोंटियाक, मिशिगन स्थित सिल्वरडोम स्टेडियम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जहां अमेरिका ने 18 जून को स्विट्जरलैंड के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेला था। खिलाड़ियों ने इसे ‘जहां मैंने कभी खेला, वहां की सबसे खराब जगह’, ‘शायद अब तक का सबसे गर्म मैच’ और ‘ऐसा लगा जैसे हम रेत में दौड़ रहे हों’ जैसे शब्दों में बताया था।
आखिरकार, फुटबॉल की वैश्विक संस्था को झुकना पड़ा और खिलाड़ियों को पानी पीने के लिए पानी की थैलियां मैदान में फेंकने की अनुमति दे दी गई। तीन दशक बाद विश्व कप फिर अमेरिका लौट रहा है। इस बार हर मैच में दोनों हाफ के बीच में अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक होंगे। ये ब्रेक लगभग 22वें और 67वें मिनट के आसपास होंगे और मौसम की स्थिति चाहे जैसी भी हो, इन्हें लागू किया जाएगा।
स्टैंड में पानी की बोतलों पर प्रतिबंध
हालांकि, विडंबना खत्म नहीं हुई है, बस इसका स्थान बदल गया है। फीफा ने इस साल के टूर्नामेंट के लिए स्टैंड में पानी की बोतलों पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद प्रशंसकों ने विरोध किया। छह जून को यह फैसला वापस लिया गया और अब प्रशंसकों को अमेरिका और कनाडा में होने वाले फीफा विश्व कप 2026 के किसी भी मैच में ‘एक सॉफ्ट प्लास्टिक, 20 औंस (590 मिलीलीटर), फैक्ट्री सील वाली डिस्पोजेबल पानी की बोतल’ लाने की अनुमति होगी। तीन दशक बीत चुके हैं, लेकिन अमेरिका में विश्व कप और पानी की कहानी अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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