LinkedIn (लिंक्डइन) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आमतौर पर फुटबॉल एजेंट्स से जोड़कर देखा जाता है, न कि पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ियों से। हालांकि, आयरलैंड के क्लब शैमरॉक रोवर्स के लिए खेलने वाले 33 वर्षीय डिफेंडर रोबर्टो लोपेस की कहानी इससे बिल्कुल अलग है।

सोमवार 15 जून 2026 को रोबर्टो लोपेस ने 89वें मिनट में एक बेहद अहम ब्लॉक किया, जिसकी बदौलत पहली बार फीफा विश्व कप में खेलने उतरी द्वीपीय देश केप वर्डे की टीम यूरोपीय चैंपियन स्पेन को 0-0 से ड्रॉ पर रोकने में सफल रही।

लोपेस ने FIFPro को बताया, ‘‘मेरे इंटरनेशनल फुटबॉल करियर की शुरुआत की कहानी काफी पागलपन भरी है। कॉलेज के दौरान मैंने लिंक्डइन पर अपना अकाउंट बनाया था। कुछ दोस्तों से जुड़ा और फिर उसे कई वर्षों तक ऐसे ही छोड़ दिया।’’ FIFPro पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ियों की ग्लोबल यूनियन है। इसका प्रमुख उद्देश्य अपने नेटवर्क के करीब 70 हजार खिलाड़ियों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है।

केप वर्डे के मैनेजर को समझ लिया था SPAM

लोपेस ने बताया, ‘‘एक दिन मुझे उस समय केप वर्डे टीम के मैनेजर रुई अगुआस का मैसेज आया। उन्होंने पुर्तगाली भाषा में स्वागत संदेश भेजा था, जो उस समय मुझे आती भी नहीं थी। मैंने सोचा कि शायद यह सिर्फ कनेक्ट करने के लिए धन्यवाद या कोई स्पैम मैसेज होगा।’’

इसके बाद नौ महीने बीत गए और रोबर्टो लोपेस ने उस मैसेज के बारे में सोचा भी नहीं। फिर अगुआस ने दोबारा उनसे संपर्क किया। इस बार उन्होंने अंग्रेजी में लिखा, ‘‘हाय रोबर्टो, क्या आपको मौका मिला कि आपने मेरी कही हुई बात पर विचार किया?’’ इसके बाद लोपेस ने पिछला मैसेज कॉपी-पेस्ट करके देखा तो उन्हें पता चला कि वह केप वर्डे की नेशनल टीम के लिए खेलने का न्योता था।

लोपेस ने कहा, ‘‘मैंने जितनी जल्दी हो सकता था, उन्हें मैसेज किया। मैंने काफी माफी मांगी और कहा कि अगर अब भी यह मौका उपलब्ध है तो मैं इसका हिस्सा बनना चाहूंगा। तीन हफ्ते बाद मैं मार्सिले में केप वर्डे के लिए अपना डेब्यू कर रहा था।’’

पिता केप वर्डे मूल के और मां हैं आयरिश

रोबर्टो लोपेस के पिता केप वर्डे मूल के हैं और उनकी मां आयरलैंड की हैं। रोबर्टो लोपेस को प्यार से ‘पिको’ भी कहा जाता है। साल 2017 में डबलिन बैंक में मॉर्गेज एडवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे। उसी दौरान शैमरॉक रोवर्स ने उन्हें बतौर पेशेवर फुटबॉलर फुल टाइम कॉन्ट्रैक्ट दिया।

रोबर्टो लोपेस सोमवार 15 जून की रात (भारतीय समयानुसार) उन कई खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिन्होंने करीब चार हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग पांच लाख आबादी वाले इस द्वीपीय देश को दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन में अपने डेब्यू पर यादगार शुरुआत दिलाई।

कहानी क्रिस्टियानो से पहले के रोनाल्डो की, 23 की उम्र तक 200 गोल, 2 बार वर्ल्ड चैंपियन बने

फुटसल से शुरुआत, 200+ गोल का रिकॉर्ड और वर्ल्ड कप जीतने तक का सफर। 1998 वर्ल्ड कप के हीरो और 2002 के चैंपियन रोनाल्डो नाजारियो ने 3 बार फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और 2 बैलन डी’ओर खिताब जीता। (‘एल फेनोमेनो’ की पूरी कहानी पढ़ने के लिए क्लिक करें)