एक समय था जब क्रिकेट मैक्सिको में ब्रिटिश साम्राज्य और प्रवासियों की निशानी हुआ करता था। फिर इतिहास ने करवट ली, ब्रिटिश लोग देश छोड़कर चले गए और क्रिकेट भी धीरे-धीरे हाशिये पर चला गया। करीब एक सदी बाद वही खेल अब मैक्सिको की जेलों में लौट आया है, जहां कैदी बल्ला थामकर सिर्फ रन बनाने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि अनुशासन और बदलाव की कहानी लिखने के साथ-साथ आपसी सम्मान और नई जिंदगी की दिशा भी तलाश रहे हैं।
पहला विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटिश बसने वालों के आखिरी ग्रुप के साथ जो क्रिकेट इस देश से चला गया था। मैक्सिको के नेशनल कमीशन फॉर फिजिकल कल्चर एंड स्पोर्ट की एक पहल के तहत अब यह खेल कम से मध्यम सुरक्षा वाली चार जेलों में खेला जा रहा है। कमीशन का मानना था कि क्रिकेट से कैदियों में अनुशासन आएगा।
उन्होंने इस खेल के बारे में सिर्फ दो साल पहले ही सुना था। मैक्सिको सिटी ने 2021 में ICC अमेरिका महिला T20 रीजनल क्वालिफायर की मेजबानी की थी और खेल मंत्रालय को इसे देखने के लिए बुलाया गया था। कुछ महीनों बाद मैक्सिकन क्रिकेट एसोसिएशन के सेक्रेटरी क्रेग व्हाइट की मुलाकात नेशनल कमीशन के प्रमुख एडुआर्डो एसेवेडो से एक प्रेजेंटेशन के दौरान हुई। एसेवेडो ने तुरंत ही जेलों के फिजिकल एक्टिविटी प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर क्रिकेट को शामिल करने का प्रस्ताव रखा।
क्रेग व्हाइट कहते हैं, ‘‘यह हम सभी के लिए एक शानदार अनुभव था। न सिर्फ खेल को फैलाना, बल्कि यह सुनना कि इससे उनकी ज़िंदगी में बदलाव आ रहा है। उनसे बात करना, उनकी जिंदगी और असलियत को समझना- यह एक बहुत बड़ा अनुभव था। एक बात ने शुरू में ही कमीशन का ध्यान खींचा।’’ क्रिकेट में अंपायर का फैसला आखिरी होता है और उस पर कभी सवाल नहीं उठाया जाता।
क्रेग व्हाइट कहते हैं, ‘‘उन्हें अनुशासन वाली यह बात पसंद आई।’’ ऐसे देश में जहां फुटबॉल रेफरी खिलाड़ियों के बर्ताव को लेकर हड़ताल पर जा चुके हों, वहां बिना सवाल उठाए माने जाने वाले अधिकार पर आधारित खेल का आकर्षण समझ में आता है। एसेवेडो कहते हैं, ‘‘क्रिकेट कैदियों को एक-दूसरे से जुड़ना, सम्मान करना और अनुशासन में रहना सिखा रहा है, साथ ही उन्हें कसरत करने का मौका भी देता है। यह दूसरे खेलों जैसा नहीं है जो दुश्मनी और हिंसा को बढ़ावा देते हैं।’’
एक जेल में कैदियों ने अपने बैट खुद बनाना शुरू कर दिए हैं। एसेवेडो कहते हैं, ‘‘बढ़ईगिरी की क्लास में कैदियों से बैट बनवाना हमारा एक और मकसद है। इससे उन्हें काम की स्किल्स सीखने को मिलती हैं।’’
महिला कैदी भी खेल रही हैं। रिहा होने पर वे इस खेल को अपने समुदाय में ले जा सकती हैं। दूसरों को सिखा सकती हैं। इससे पैसे भी कमा सकती हैं।’’ एसेवेडो को उम्मीद है कि वह इस कार्यक्रम को उच्च-सुरक्षा वाली जेलों तक भी ले जा पाएंगे, जहां कार्टेल का सरगना और उसके साथी बंद हैं।
जब आप इसका इतिहास जानेंगे, तो यह सब कितना अजीब लगता है, यह बात समझ में आएगी। 19वीं सदी में ब्रिटिशों के साथ मैक्सिको में क्रिकेट आया। यह आम लोगों का खेल नहीं, बल्कि ऊंचे दर्जे और साम्राज्य की पहचान था। फुटबॉल की तरह इसे भी स्कॉटलैंड के कॉर्निश खनिकों ने शुरू किया था, लेकिन जहां फुटबॉल आम लोगों का खेल बन गया, वहीं क्रिकेट ऊंचे दर्जे के लोगों तक ही सीमित रहा।
क्रिकेट के 1827 में खेले जाने के रिकॉर्ड मौजूद हैं। यानी फुटबॉल, बेसबॉल और बॉक्सिंग के लोकप्रिय होने से भी पहले। बिब्लियोटेका वास्कोनसेलोस के रिकॉर्ड में सम्राट मैक्सिमिलियन की एक श्वेत-श्याम तस्वीर है।
मैक्सिमिलियन ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक थे जिन्होंने तीन साल तक मैक्सिको पर शासन किया था और वह रविवार को यह खेल खेलते थे। दो साल बाद राष्ट्रपति बेनिटो जुआरेज की रिपब्लिकन सेना ने उन्हें पकड़ लिया और गोली मार दी। तस्वीर तो रह गई, लेकिन साम्राज्य नहीं रहा।
क्रिकेट का सुनहरा दौर 19वीं सदी के आखिर में आया, जब ब्रिटेन के साथ मैक्सिको के व्यापारिक संबंध गहरे हुए। ब्रिटिश स्कूलों में पढ़े लुईस अमोर ने 1896 में मैक्सिको क्रिकेट क्लब की स्थापना की, फिर क्रांति आ गई।
पांचो विला (वह कुछ लोगों के लिए हीरो थे, कुछ के लिए विलेन और सभी के लिए एक बहुत बड़ी हस्ती) की वजह से ब्रिटिश निवासी वहां से जाने लगे। क्रेग व्हाइट जो मैक्सिको में इस खेल के इतिहास पर एक किताब लिख रहे हैं। वह कहते हैं, ‘‘इस घटना और पहले विश्व युद्ध ने असल में क्रिकेट को खत्म ही कर दिया। उनमें से ज्यादातर लोग अपने देश लौट गए और कभी वापस नहीं आए।’’
उनमें से कुछ लोग दूसरे विश्व युद्ध के बाद लौटे, लेकिन तब तक फुटबॉल आम लोगों के लिए नशे की तरह हो चुका था। उसने उसे कभी वापस नहीं दिया। जेल की दीवारों के बाहर मैक्सिको सिटी के उत्तर-पश्चिम में नौकालपन में क्रिकेट जिंदा है।
इसे दो फ़ुटबॉल पिचों के बीच बनी एक छोटी सी जगह पर खेला जाता है। MCA (मैक्सिको क्रिकेट एसोसिएशन) के पास एक टर्फ विकेट और दो नेट हैं। बैट, पैड, गेंदें सब कुछ बाहर से मंगाना पड़ता है।
क्रेग व्हाइट कहते हैं, ‘‘यहां क्रिकेट का सामान बेचने वाली कोई खेल की दुकान नहीं है। यह महंगा है और हमारा संगठन वॉलंटियर्स द्वारा चलाया जाता है।’’ खिलाड़ी ज्यादातर दक्षिण एशियाई और ब्रिटेन से आए लोग हैं। क्रेग व्हाइट खुद भी ऐसे ही एक व्यक्ति हैं। यॉर्कशायर के रहने वाले क्रेग व्हाइट को 2005 की एशेज सीरीज देखकर इस खेल से प्यार हो गया।
क्रेग व्हाइट ब्रिटिश दूतावास के काम से मैक्सिको आए, फिर एक NGO के लिए रुक गए और यहीं के होकर रह गए। एक स्थानीय मैक्सिकन जूनियर खिलाड़ी ने उनका ध्यान खींचा है। क्रेग व्हाइट उसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहते, लेकिन जिस तरह से वह उसका जिक्र करते हैं, उससे लगता है कि वह ठीक इसी चीज का इंतजार कर रहे थे।
क्रिकेट अंग्रेजों के साथ मैक्सिको आया, उनके साथ ही चला गया और लगभग एक सदी तक सिर्फ रिकॉर्ड और यादों में ही जिंदा रहा। इसका लौटना ही अपने आप में अजीब बात है। जेल के मैदानों में इसका लौटना, एक ऐसी बात है जो इस खेल के लंबे और उतार-चढ़ाव भरे इतिहास को देखते हुए बिल्कुल स्वाभाविक लगती है। बता दें कि जेल के मैदानों में कैदी एक ही क्लास में बल्लेबाजी करना और बैट बनाना सीखते हैं।
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