फीफा विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में मोरक्को ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड्स को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। इस जीत के साथ ही जहां मोरक्को में रातभर जश्न का माहौल रहा। वहीं, नीदरलैंड्स विश्व कप से बाहर हो गया था, लेकिन देश की सड़कों पर जश्न देखने को मिला।
इसकी वजह यह थी कि वहां बड़ी संख्या में रहने वाले मोरक्को मूल के लोगों ने मूल देश की ऐतिहासिक जीत का उत्सव मनाया। द हेग, एम्स्टर्डम और रॉटरडैम जैसे शहरों में लोग मोरक्को के झंडे लेकर सड़कों पर उतर आए, कार रैलियां निकालीं और आतिशबाजी की।
हालांकि, द हेग में कुछ जगहों पर यह जश्न हिंसक झड़पों में बदल गया और पुलिस को वॉटर कैनन तथा बल प्रयोग करना पड़ा। खासकर द हेग के शिल्डर्सवाइक (Schilderswijk) इलाके में पुलिस और कुछ समर्थकों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।
मैच के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर गला काटने जैसे इशारे किये जाने का दावा किया गया। हालांकि, इन वीडियो की पुष्टि नहीं हो पाई है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
बता दें कि मैक्सिको के मॉन्टेरे में खेले गए मैच में अतिरिक्त समय के बाद भी स्कोर 1-1 से बराबर रहा। इसके बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। दोनों ओर से कुछ पेनल्टी मिस होने के बाद पीएसवी आइंडहोवन के फॉरवर्ड इस्माइल सैबारी ने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदल दिया।
इसके साथ ही मोरक्को ने अंतिम-16 में जगह बना ली। अब उसका सामना शनिवार को सह-मेजबान कनाडा से होगा। दिलचस्प यह है कि 2022 विश्व कप के ग्रुप चरण में भी मोरक्को ने कनाडा को 2-1 से हराया था।
कासाब्लांका में सुबह तक जश्न
निर्णायक पेनल्टी के गोल में बदलते ही मोरक्को के सबसे बड़े शहर कासाब्लांका में सन्नाटा खुशी के शोर में बदल गया। कैफे, रेस्तरां और सार्वजनिक स्थानों पर मैच देख रहे हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आये। आसमान में आतिशबाजी हुई, फ्लेयर्स जलाए गए, कारों के हॉर्न गूंजते रहे और लोग मोरक्को के झंडे लहराते हुए देर रात तक नाचते-गाते रहे।
रात का मुकाबला होने और अगले दिन कार्यदिवस होने के बावजूद स्थानीय समयानुसार सुबह करीब पांच बजे भी दर्जनों प्रशंसक शहर के प्रमुख बुलेवार्ड पर जश्न मना रहे थे। वे ‘कनाडा, हम आ रहे हैं’ के नारे लगा रहे थे और टीम की अगली चुनौती का स्वागत कर रहे थे। चार साल पहले विश्व कप के सेमीफाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचने वाली मोरक्को से इस बार भी देश को बड़ी उम्मीदें हैं। समर्थकों को भरोसा है कि एटलस लायंस एक और यादगार अभियान लिख सकते हैं।
नीदरलैंड्स में भी उमड़ा उत्साह
मोरक्को की जीत का सबसे बड़ा असर नीदरलैंड्स में देखने को मिला। नीदरलैंड्स में बड़ी संख्या में मोरक्को मूल के लोग रहते हैं। द हेग शहर में ही लगभग 32 हजार मोरक्को मूल के निवासी हैं, जो शहर की आबादी का करीब 6 प्रतिशत हैं। इनमें से अधिकांश उन परिवारों के वंशज हैं, जो 1969 में दोनों देशों के बीच हुए श्रम समझौते के तहत उत्तरी मोरक्को से नीदरलैंड्स आये थे। शिल्डर्सवाइक जैसे इलाके आज मोरक्को-डच संस्कृति के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।
मोरक्को की जीत के बाद द हेग की सड़कों पर सैकड़ों लोग मोरक्को के झंडे लेकर निकल पड़े। लोग कारों के साथ जश्न मनाने लगे, हॉर्न बजने लगे, आतिशबाजी हुई और समर्थक फुटबॉल हवा में उछालते हुए नाचते दिखाई दिए। कई लोग गुजरती कारों पर चढ़कर भी खुशी का इजहार कर रहे थे।
जश्न के बीच हिंसा, पुलिस से झड़प
हालांकि यह उत्सव ज्यादा देर तक शांतिपूर्ण नहीं रह सका। करीब एक घंटे बाद हालात बिगड़ने लगे और पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए दंगा-रोधी दस्तों को तैनात किया। पुलिस ने वॉटर कैनन (पानी की बौछार) और लाठीचार्ज का सहारा लिया। नीदरलैंड्स पुलिस के अनुसार शिल्डर्सवाइक इलाके में भारी मात्रा में आतिशबाजी की गई और कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पटाखे तथा पत्थर फेंके। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
पुलिस ने बताया कि सार्वजनिक हिंसा में शामिल होने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया। कुछ युवकों को मौके पर ही जमीन पर लिटाकर हथकड़ी लगाई गई और पुलिस वाहनों में ले जाया गया। द हेग के अलावा रॉटरडैम में भी कुछ लोगों की गिरफ्तारी की खबरें हैं।
यह मुकाबला सिर्फ फुटबॉल नहीं था
नीदरलैंड्स में इस मैच का महत्व केवल खेल तक सीमित नहीं था। मैच से पहले देश में रहने वाले मोरक्को मूल के लोगों में से कइयों से एक ही सवाल पूछा जा रहा था, ‘‘आप किस टीम का समर्थन करेंगे?’’ अधिकांश लोगों के लिए यह बातचीत सहज और सम्मानजनक रही। कई डच नागरिकों ने यह स्वीकार किया कि दो देशों से भावनात्मक जुड़ाव रखने वाले लोगों के लिए यह फैसला आसान नहीं होता। हालांकि, सोशल मीडिया पर माहौल अलग था।
दक्षिणपंथी नेता गीर्ट विल्डर्स और उनके समर्थकों की ओर से लंबे समय से मोरक्को मूल के लोगों और मुस्लिम समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणियां की जाती रही हैं। मैच से पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर मोरक्को को लेकर व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा की थी। मैच खत्म होने के बाद उन्होंने मोरक्को को जीत की बधाई भी दी, लेकिन इस मुकाबले ने फिर नीदरलैंड्स में पहचान, प्रवासन और सामाजिक एकता पर बहस को हवा दे दी।
डच टीम में क्यों नहीं दिखते मोरक्को मूल के खिलाड़ी?
हाल के वर्षों में कई ऐसे खिलाड़ी सामने आए हैं, जिनका जन्म नीदरलैंड्स में हुआ, लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोरक्को का प्रतिनिधित्व चुना। मौजूदा मोरक्को टीम में नुसैर मजराउई, सोफियान अमराबात और अनास सलाह-एद्दीन जैसे खिलाड़ी नीदरलैंड्स में जन्मे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि नीदरलैंड्स में बढ़ते दक्षिणपंथी राजनीतिक माहौल और पहचान से जुड़े सवालों ने भी कुछ खिलाड़ियों के फैसलों को प्रभावित किया है। पूर्व डच अंतरराष्ट्रीय इब्राहिम अफेलाय ने अपने समय में नीदरलैंड्स का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन पिछले एक दशक में मोरक्को मूल का कोई नया खिलाड़ी डच राष्ट्रीय टीम में स्थायी जगह नहीं बना पाया।
एम्स्टर्डम ने पेश की अलग तस्वीर
द हेग में जहां झड़पें हुईं, वहीं राजधानी एम्स्टर्डम में पूरी तरह अलग माहौल देखने को मिला। यहां मोरक्को और नीदरलैंड्स दोनों टीमों के समर्थकों ने साथ बैठकर मैच देखा। मोरक्को की जीत के बाद डच प्रशंसकों ने विपक्षी टीम के समर्थकों को बधाई दी, गले लगाया और आगे के मुकाबलों में मोरक्को का समर्थन करने की बात कही। मैच खत्म होने के बाद कारों के काफिले शहर की सड़कों पर निकल पड़े, झंडे लहराए गए और हॉर्न बजते रहे, लेकिन माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। पुलिस की सीमित मौजूदगी के बावजूद किसी बड़े उपद्रव की सूचना नहीं मिली।
मोरक्को की उम्मीदें फिर आसमान पर
विश्व कप 2022 में इतिहास रचने के बाद मोरक्को ने फिर साबित कर दिया है कि वह दुनिया की शीर्ष फुटबॉल टीमों में शामिल हो चुका है। नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीम को बाहर कर एटलस लायंस ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। अब उसकी नजरें सह-मेजबान कनाडा के खिलाफ होने वाले अंतिम-16 मुकाबले पर हैं, जहां जीत उसे एक बार फिर विश्व कप के इतिहास में नया अध्याय लिखने के करीब पहुंचा सकती है।
FIFA World Cup 2026: फ्रांस ने स्वीडन को हराया; एम्बाप्पे ने दागे दो गोल, बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड
फीफा वर्ल्ड कप में अब तक एम्बाप्पे के 18 गोल हो गए हैं जो इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा गोल हैं। उन्होंने जर्मनी के महान फुटबॉलर मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। (पूरी मैच रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें)
