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FIFA BANNED AIFF: सुप्रीम कोर्ट की हाई कोर्ट के फैसले पर रोक, टल सकता है अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी पर आया खतरा

केंद्र और आईओए की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति भारतीय संघ को निलंबित कर सकती है जैसा कि हाल में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के मामले में हुआ था।

FIFA BANNED AIFF: सुप्रीम कोर्ट की हाई कोर्ट के फैसले पर रोक, टल सकता है अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी पर आया खतरा
भारतीय ओलंपिक संघ की अपील पर उच्चतम न्यायालय में अब 22 अगस्त को सुनवाई होगी।

FIFA BANNED INDIAN FOOTBALL ASSOCIATION: फुटबॉल की शीर्ष वैश्विक संस्था फीफा ने 15 अगस्त 2022 की रात भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद भारत में 11 से 30 अक्टूबर तक होने वाले फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी भी खतरे में पड़ गई। हालांकि, 18 अगस्त 2022 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के बाद भारत की मेजबानी में अंडर-17 महिला फुटबॉल विश्व कप के आयोजन की संभावना फिर दिखने लगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार यानी 18 अगस्त 2022 को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की तीन सदस्यीय समिति (सीओए) देश की सर्वोच्च खेल संस्था का कामकाज नहीं संभालेगी।

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और आईओए की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर गौर किया कि विश्व खेल संस्थाएं सीओए जैसे निकाय को मान्यता नहीं देती। इसके परिणाम स्वरूप भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोका जा सकता है। शीर्ष अदालत ने विधि अधिकारी की इस दलील पर भी गौर किया कि इस आदेश का देश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने आईओए के मामलों में यथास्थिति बनाए रखने के लिए अंतरिम राहत प्रदान की। उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के बाद अब दिल्ली उच्च न्यायालय से नियुक्त प्रशासकों की समिति आईओए का कामकाज नहीं संभाल पाएगी।

प्रशासकों की समिति में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल आर दवे, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी और विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव विकास स्वरूप को रखा गया था।

उच्चतम न्यायालय में आईओए की अपील पर 22 अगस्त को सुनवाई होगी। इससे पहले उच्चतम न्यायालय आईओए की अपील पर दिन में ही सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) भारतीय संघ को निलंबित कर सकती है जैसा कि हाल में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के मामले में हुआ था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 16 अगस्त को आईओए के कार्यो के संचालन के लिए तीन सदस्यीय सीओए के गठन का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि आईओए खेल संहिता का पालन करने को लेकर लगातार अनिच्छा दिखा रहा है। इस कारण उसके कामकाज को सीओए को सौंपना अनिवार्य हो गया है।

फीफा ने कहा था कि भारतीय फुटबॉल संघ को तब तक बहाल नहीं किया जाएगा, जब तक कामकाज की कमान सीओए की जगह एआईएफएप को नहीं सौंपा जाती। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से फीफा से बात कर प्रतिबंध हटाने के समाधान पर पहुंचने की बात कही थी।

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